महाराष्ट्र में मानसून की कमी और कई इलाकों में फसलों पर पड़े असर के बीच NCP (Sharadchandra Pawar) प्रमुख शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से गंभीर रूप से प्रभावित तालुकाओं को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है।
पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री पवार ने कहा कि औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार किए बिना प्रभावित क्षेत्रों में राहत शुरू की जानी चाहिए। उन्होंने फसल नुकसान झेल रहे किसानों को कम से कम ₹50,000 प्रति हेक्टेयर और खेत-मजदूर परिवारों को ₹25,000 की विशेष सहायता देने की मांग भी रखी।
31 जिलों में कम बारिश का हवाला
पवार ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में दावा किया कि महाराष्ट्र के 36 में से 31 जिलों में औसत की तुलना में काफी कम बारिश दर्ज की गई है।
उनके अनुसार, 1 जून से 15 सितंबर 2026 के बीच राज्य में लगभग 648 mm बारिश हुई, जिसे उन्होंने औसत से करीब 19% कम बताया। उन्होंने कहा कि बारिश की कमी के कारण कई क्षेत्रों में खरीफ की फसलें प्रभावित हुई हैं और आगे पीने के पानी तथा पशुओं के चारे की उपलब्धता को लेकर भी गंभीर समस्या पैदा हो सकती है।
ये आंकड़े पवार द्वारा अपने पत्र में प्रस्तुत किए गए हैं; इन्हें इस लेख में उनके दावे के रूप में ही उद्धृत किया जा रहा है।
Soybean, Cotton और Pulses समेत कई फसलों पर असर
पवार के मुताबिक कम बारिश के कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों में सोयाबीन, कपास, बाजरा, मक्का, तूर, मूंग और उड़द जैसी फसलों को नुकसान पहुंचा है।
उन्होंने फसलों पर कीट और रोगों के बढ़ते प्रकोप का मुद्दा भी उठाया और चेताया कि कृषि संकट के साथ पानी और चारे की कमी ग्रामीण क्षेत्रों की मुश्किलें बढ़ा सकती है।
पवार ने अपने पत्र में Vidarbha और Marathwada में बुवाई क्षेत्र घटने का भी दावा किया। उनके अनुसार, Vidarbha में अगस्त के अंत तक बुवाई का क्षेत्र पिछले साल लगभग 50.04 लाख हेक्टेयर था, जो इस वर्ष करीब 47.5 लाख हेक्टेयर रह गया। Marathwada में यह आंकड़ा करीब 48.21 लाख हेक्टेयर से घटकर 46.19 लाख हेक्टेयर बताया गया।
किसानों को ₹50,000 प्रति हेक्टेयर देने की मांग
पवार की प्रमुख मांग प्रभावित किसानों के लिए सीधे आर्थिक राहत की है।
उन्होंने सरकार से फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को कम से कम ₹50,000 प्रति हेक्टेयर सहायता देने और प्रत्येक प्रभावित खेत-मजदूर परिवार को ₹25,000 की विशेष मदद देने को कहा है।
इसके साथ ही उन्होंने किसानों के लिए कर्जमाफी योजना तत्काल लागू करने और नए crop loans उपलब्ध कराने की मांग की है।
नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों को मिलने वाले प्रोत्साहन को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख करने की मांग भी पत्र में शामिल है।
पानी और पशुओं के चारे पर भी चिंता
मामला केवल फसलों के नुकसान तक सीमित नहीं है।
पवार ने सरकार से संभावित पेयजल संकट वाले गांवों का तत्काल सर्वेक्षण कराने, आवश्यकता पड़ने पर सरकारी टैंकर उपलब्ध कराने और पशुओं के लिए fodder camps शुरू करने की मांग की।
इसके साथ पशुओं के लिए पीने के पानी और veterinary services की व्यवस्था करने की मांग भी की गई है।
राज्य सरकार ने भी संभावित जल संकट को देखते हुए अधिकारियों को अक्टूबर 2026 से जून 2027 तक की अवधि के लिए कार्ययोजना तैयार करने को कहा है। Groundwater Survey and Development Agency को संभावित जल-संकट वाले गांवों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं।
विद्यार्थियों की पूरी Educational Fee माफ करने की मांग
पवार ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए भी राहत मांगी है।
उनका कहना है कि drought concessions को केवल परीक्षा शुल्क की माफी तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। प्रभावित तालुकाओं के स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की पूरी शैक्षणिक फीस माफ करने का फैसला किया जाए।
उन्होंने बारिश, फसलों की स्थिति, पानी की कमी, चारे की उपलब्धता और पशुधन की स्थिति की रोजाना निगरानी के लिए राज्य और जिला स्तर पर control rooms स्थापित करने का सुझाव भी दिया है।
महाराष्ट्र सरकार ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उनकी सरकार राज्य में सूखे जैसी स्थिति को गंभीरता से ले रही है और जरूरी कदम उठा रही है। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार पवार के सुझावों पर भी विचार करने के लिए तैयार है।
वहीं, संबंधित मंत्री ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सूखा घोषित करने की जरूरत है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री प्रभावित इलाकों की स्थिति का जमीनी आकलन करने के लिए पांच से छह जिलों का दौरा करने वाले हैं। चारा शिविरों और पशुधन तथा डेयरी सेक्टर से जुड़े उपाय भी सरकार के विचाराधीन हैं।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने पवार के पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार पहले ही सूखे से निपटने के लिए कदम उठा रही है और संबंधित विभाग पंचनामे तैयार कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष से इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करने की अपील भी की।
तत्काल घोषणा पर क्यों है जोर?
इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू सूखा घोषित करने की औपचारिक प्रक्रिया है।
पवार का तर्क है कि प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए सरकार को निर्धारित औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार नहीं करना चाहिए और गंभीर रूप से प्रभावित तालुकाओं को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करना चाहिए।
सरकार की ओर से कहा गया है कि स्थिति की समीक्षा की जा रही है और राहत संबंधी कदम पहले से प्रक्रिया में हैं। इसलिए फिलहाल पवार की मांग और महाराष्ट्र सरकार द्वारा औपचारिक रूप से सूखा घोषित किए जाने को अलग-अलग समझना जरूरी है—पवार ने घोषणा की मांग की है; उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उस समय तक राज्यव्यापी औपचारिक घोषणा नहीं हुई थी।
किसानों के लिए आगे क्या महत्वपूर्ण होगा?
आने वाले दिनों में तीन चीजें विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहेंगी—सरकार किन तालुकाओं को आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित करती है, किसानों के लिए वित्तीय राहत की राशि और पात्रता क्या तय होती है, और पानी व चारे की कमी से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर कौन-से कदम लागू किए जाते हैं।
पवार ने अपनी मांगों में किसानों, खेत-मजदूरों, विद्यार्थियों और पशुधन को शामिल करते हुए राहत को व्यापक बनाने की मांग की है। अब राज्य सरकार के औपचारिक फैसले से यह स्पष्ट होगा कि इनमें से किन प्रस्तावों को स्वीकार किया जाता है।
