महाराष्ट्र में UCC को लेकर सरकार का अगला बड़ा कदम
महाराष्ट्र में Uniform Civil Code (UCC) लागू करने की प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण चरण की ओर बढ़ रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि राज्य सरकार का लक्ष्य आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान UCC से संबंधित विधेयक विधानसभा में पेश करना है।
शीतकालीन सत्र नागपुर में आयोजित होगा। हालांकि, सरकार के आगे बढ़ने से पहले राज्य द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।
फडणवीस के मुताबिक, समिति फिलहाल अपनी सिफारिशों पर काम कर रही है और उसकी रिपोर्ट आने के बाद सरकार आगे की प्रक्रिया पूरी करेगी।
जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति
महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई 2026 में UCC का मसौदा तैयार करने और इससे जुड़े कानूनी तथा सामाजिक पहलुओं का अध्ययन करने के लिए सात सदस्यीय समिति गठित की थी।
इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं।
सरकार ने संकेत दिया है कि समिति की रिपोर्ट और सिफारिशें प्रस्तावित कानून की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
यानी अभी अंतिम UCC कानून की पूरी रूपरेखा सार्वजनिक नहीं हुई है। इसलिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार या अन्य व्यक्तिगत कानूनों में महाराष्ट्र का अंतिम विधेयक वास्तव में क्या बदलाव प्रस्तावित करेगा, इस पर समिति की रिपोर्ट और वास्तविक Bill text सामने आने के बाद ही निश्चित निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
फडणवीस ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि राज्य ने UCC तैयार करने के लिए समिति पहले ही गठित कर दी है और सरकार उसकी रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
सरकार की मौजूदा समयसीमा के अनुसार कोशिश यह है कि रिपोर्ट मिलने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधेयक को नागपुर के शीतकालीन सत्र में लाया जाए।
इसलिए इसे अभी “UCC लागू हो गया” कहना सही नहीं होगा। फिलहाल महाराष्ट्र कानून बनाने की प्रक्रिया में है और प्रस्तावित विधेयक को अभी विधायी चरणों से गुजरना बाकी है।
UCC आखिर है क्या?
Uniform Civil Code का मूल विचार नागरिकों के कुछ व्यक्तिगत मामलों के लिए धर्म-आधारित अलग-अलग personal laws की जगह एक समान नागरिक कानूनी ढांचा तैयार करना है।
इसमें आम तौर पर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे विषय शामिल होते हैं।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों में Uniform Civil Code का उल्लेख करता है।
लेकिन महाराष्ट्र में इन विषयों पर कौन-से विशिष्ट नियम लागू होंगे, किन समुदायों या परिस्थितियों को छूट मिलेगी और संक्रमणकालीन व्यवस्था कैसी होगी—इन सवालों का उत्तर प्रस्तावित महाराष्ट्र विधेयक का वास्तविक मसौदा सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
महाराष्ट्र का कदम अभी क्यों महत्वपूर्ण है?
महाराष्ट्र की घोषणा ऐसे समय हुई है जब UCC एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुंबई में कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA-शासित राज्यों में UCC लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा।
महाराष्ट्र की योजना इसी व्यापक राजनीतिक और विधायी घटनाक्रम के बीच सामने आई है।
सभी NDA सहयोगियों की राय एक जैसी नहीं
UCC को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक सहमति अभी पूर्ण नहीं है।
हालिया रिपोर्टिंग के अनुसार, TDP और शिवसेना जैसे NDA सहयोगियों ने UCC की दिशा में कदम का समर्थन किया है, जबकि JD(U) ने बिहार के संदर्भ में अलग रुख अपनाया है।
इससे स्पष्ट होता है कि UCC सिर्फ कानूनी मुद्दा नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक रूप से भी संवेदनशील विषय बना हुआ है।
महाराष्ट्र के प्रस्तावित UCC में क्या होगा?
यही फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण अनुत्तरित सवाल है।
समिति की अंतिम रिपोर्ट और सरकार का वास्तविक Bill draft सार्वजनिक होने से पहले यह निश्चित रूप से कहना जल्दबाजी होगी कि महाराष्ट्र का UCC:
विवाह और तलाक के नियमों को किस तरह बदलेगा,
उत्तराधिकार और संपत्ति अधिकारों पर क्या प्रावधान करेगा,
गोद लेने से जुड़े नियम कैसे तय करेगा,
tribal communities या अन्य समूहों के लिए कोई exemption रखेगा या नहीं,
और पहले से हुए विवाह या अन्य व्यक्तिगत कानूनी व्यवस्थाओं पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
इन बिंदुओं पर किसी दूसरे राज्य के UCC को सीधे महाराष्ट्र पर लागू मान लेना भी उचित नहीं होगा।
आगे क्या होगा?
अब सबसे पहले निगाह जस्टिस रंजना देसाई समिति की रिपोर्ट पर रहेगी।
रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार को उसकी सिफारिशों का अध्ययन करना होगा और प्रस्तावित कानून को अंतिम रूप देना होगा। इसके बाद विधेयक को राज्य विधानमंडल में पेश किया जा सकता है।
यदि सरकार अपनी मौजूदा समयसीमा पर कायम रहती है, तो नागपुर का आगामी शीतकालीन सत्र महाराष्ट्र में UCC को लेकर निर्णायक विधायी चरण बन सकता है।
लेकिन बिल पेश होने, पारित होने और कानून लागू होने में अंतर है। इसलिए जब तक विधेयक का अंतिम मसौदा, विधायी मंजूरी और लागू होने की अधिसूचना सामने नहीं आती, महाराष्ट्र में UCC को लागू कानून के रूप में पेश करना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
