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राजनीति

Maharashtra DJ Row: गणेशोत्सव से पहले BJP-VHP के सुर अलग, नागपुर-पुणे में भी अलग तस्वीर

महाराष्ट्र में त्योहारों के दौरान तेज आवाज वाले DJ और sound systems पर नियंत्रण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। नागपुर में BJP नेताओं ने पाबंदियों पर पुनर्विचार की मांग की है, जबकि पुणे में पार्टी के नेता DJ और laser lights के खिलाफ सख्त रुख अपना रहे हैं। VHP ने नियमों के कथित चुनिंदा इस्तेमाल पर सवाल उठाया है।

Maharashtra DJ Row: गणेशोत्सव से पहले BJP-VHP के सुर अलग, नागपुर-पुणे में भी अलग तस्वीर
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Janta Scope

DJ पर बहस, लेकिन मामला सिर्फ ‘बैन’ का नहीं

गणेशोत्सव से पहले महाराष्ट्र में तेज आवाज वाले DJ और sound systems का मुद्दा प्रशासनिक नियमों से निकलकर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। नागपुर, पुणे, सोलापुर और कुछ अन्य शहरों में लागू या प्रस्तावित पाबंदियों ने एक ऐसी तस्वीर बनाई है जिसमें BJP और Vishwa Hindu Parishad के रुख में अंतर तो दिखता ही है, BJP के भीतर भी एक राय नहीं है।

विवाद को पूरे महाराष्ट्र में लागू किसी एक समान “DJ ban” के रूप में देखना भी सही नहीं होगा।

अलग-अलग शहरों में स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने high-decibel sound systems, powerful bass equipment, Dolby systems और laser lights को लेकर अलग आदेश जारी किए हैं। नागपुर पुलिस ने बाद में साफ किया कि निर्धारित noise limits के भीतर इस्तेमाल होने वाले सभी sound systems पर रोक नहीं है।

इसके बावजूद त्योहारों का समय करीब आने के साथ सवाल राजनीतिक हो गया है: धार्मिक आयोजनों की परंपरा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े noise-control rules के बीच सीमा कहां तय की जाए?

नागपुर में BJP चाहती है नियमों पर पुनर्विचार

नागपुर में विवाद तब बढ़ा जब पुलिस ने festive season से पहले अत्यधिक आवाज और vibration पैदा करने वाले sound systems पर सख्ती की।

स्थानीय BJP नेताओं ने इसे जरूरत से ज्यादा व्यापक मानते हुए पुलिस प्रशासन से दोबारा विचार करने को कहा।

शहर BJP अध्यक्ष Dayashankar Tiwari के नेतृत्व में पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने Police Commissioner Vishwas Nangre Patil से मुलाकात की। पार्टी ने तर्क दिया कि प्रशासन को noise pollution और law and order के साथ DJ तथा sound-system कारोबार से जुड़े लोगों की आजीविका का भी ध्यान रखना चाहिए।

बैठक के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक अधिक vibration पैदा करने वाले bass systems पर पाबंदी बरकरार रह सकती है, जबकि तय नियमों का पालन करने वाले top और mid-range sound systems को इस्तेमाल की अनुमति मिल सकती है।

इस स्पष्टीकरण ने शुरुआती “blanket ban” की धारणा को कुछ हद तक बदला।

पुलिस ने खींची high-decibel equipment की सीमा

Police Commissioner Nangre Patil ने बाद में स्पष्ट किया कि पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर कोई रोक नहीं है। कानूनी noise limits के भीतर चलने वाले sound systems भी प्रतिबंध के दायरे में नहीं आते।

पुलिस की आपत्ति खास तौर पर multilayer, plasma और pressure-mid जैसे उन systems से है जो बहुत अधिक आवाज और vibration पैदा करते हैं। Laser और beam lights पर भी restrictions लगाई गई हैं।

इस अंतर का महत्व इसलिए है क्योंकि राजनीतिक बहस में “DJ ban” शब्द व्यापक रूप से इस्तेमाल हो रहा है, जबकि प्रशासनिक कार्रवाई का वास्तविक दायरा अधिक सीमित हो सकता है।

BJP के भीतर भी दो अलग रुख

नागपुर में BJP की आपत्ति को पूरे राज्य में पार्टी की आधिकारिक लाइन मानना मुश्किल है।

Central Nagpur MLA और पूर्व मेयर Pravin Datke ने restrictions की timing पर सवाल उठाए हैं। BJP-nominated corporator Subodh Acharya ने कहा था कि Badkas Chowk में Dahi Handi कार्यक्रम DJ के साथ आयोजित किया जाएगा।

दूसरी तरफ पूर्व मेयर और पूर्व MLC Sandip Joshi ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया।

पुणे में यह अंतर और साफ दिखाई देता है।

BJP की Rajya Sabha MP Medha Kulkarni ने गणेशोत्सव के दौरान DJ और laser lights पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग का समर्थन किया है। उनका तर्क है कि अत्यधिक आवाज बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए परेशानी पैदा करती है।

यानी नागपुर में जहां पार्टी के कुछ नेता restrictions को नरम करने की मांग कर रहे हैं, वहीं पुणे में BJP से ही सख्त नियंत्रण की आवाज उठ रही है।

VHP की आपत्ति नियम से ज्यादा उसके इस्तेमाल पर

Vishwa Hindu Parishad ने बहस को दूसरे रास्ते पर ले जाते हुए पूछा है कि ऐसी पाबंदियों का असर हिंदू त्योहारों पर ही क्यों दिखाई दे रहा है।

स्थानीय VHP नेता Amol Thakre ने restrictions के कथित selective application पर सवाल उठाया है। संगठन की मौजूदा आपत्ति का केंद्र यह नहीं है कि noise-control rules होने ही नहीं चाहिए, बल्कि यह है कि उनका इस्तेमाल सभी समुदायों और आयोजनों पर समान रूप से होना चाहिए।

यह रुख इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक VHP पिछले वर्ष तक हिंदू त्योहारों में DJ के इस्तेमाल पर रोक की मांग करने वाले संगठनों में शामिल था।

मौजूदा बहस में संगठन का जोर अब enforcement की समानता पर अधिक दिखाई देता है।

पुणे में विरोध की बहस हिंसा तक पहुंची

Noise pollution को लेकर चल रही बहस ने पुणे में गंभीर मोड़ तब लिया जब कार्यकर्ता विद्यानंद बापट पर हमला हुआ।

बापट सार्वजनिक त्योहारों के दौरान तेज आवाज वाले loudspeakers और sound systems के खिलाफ लंबे समय से आवाज उठाते रहे हैं। वह Tilak Road पर एक television interview दे रहे थे, जब उन पर हमला किया गया।

Pune Police Commissioner Amitesh Kumar ने आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि की। पुलिस ने cognizable और non-bailable धाराओं के तहत मामला दर्ज किया और बापट को चौबीसों घंटे सुरक्षा उपलब्ध कराई।

हमले ने DJ restrictions की बहस में एक स्पष्ट सीमा खींच दी। प्रशासनिक नीति या त्योहार मनाने के तरीके पर असहमति राजनीतिक हो सकती है, लेकिन किसी व्यक्ति को उसके विचारों के लिए निशाना बनाना अलग कानून-व्यवस्था का प्रश्न है।

Fadnavis और Sharad Pawar ने हमले की निंदा की

मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने बापट पर हुए हमले को गलत बताते हुए अभिव्यक्ति के अधिकार का समर्थन किया।

उन्होंने कहा:

“Everyone has the right to express their opinion. Attacking someone for expressing their views is not right.”

NCP (Sharad Pawar faction) प्रमुख Sharad Pawar ने भी हिंसा की आलोचना की और माना कि noise pollution पर बापट की चिंताओं में कुछ आधार है।

पवार ने कहा:

“Festivals should bring joy. What Bapat is saying about noise pollution has some substance to it. In a democracy, beating up someone for his views is wrong.”

दोनों नेताओं के बयान DJ के इस्तेमाल पर किसी साझा राजनीतिक नीति का संकेत नहीं देते, लेकिन हिंसा के सवाल पर उनका रुख स्पष्ट है।

मुख्यमंत्री ने की ‘पारंपरिक’ गणेशोत्सव की अपील

DJ controversy के बीच मुख्यमंत्री Fadnavis की पुणे में की गई एक टिप्पणी ने भी ध्यान खींचा है।

BJP की state executive meeting में उन्होंने पुणे के लोगों से गणपति उत्सव को “traditional” तरीके से मनाने की अपील की।

इस बयान को statewide DJ ban की घोषणा नहीं माना जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने ऐसी कोई औपचारिक राज्यव्यापी पाबंदी घोषित नहीं की।

फिर भी DJ, laser lights और high-decibel celebrations पर चल रही बहस के बीच पारंपरिक आयोजन पर उनका जोर राजनीतिक संदर्भ हासिल कर चुका है।

दूसरे शहरों में भी सख्ती

मामला नागपुर और पुणे तक सीमित नहीं है।

सोलापुर में Police Commissioner M Rajkumar ने DJs, Dolby systems और powerful laser lights पर प्रतिबंध लगाया है। Bhandara और Sangli में भी इसी तरह की पाबंदियों की रिपोर्ट सामने आई है।

लेकिन हर शहर के आदेश की शर्तें और दायरा अलग हो सकता है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे पूरे महाराष्ट्र में लागू एक समान statewide DJ prohibition कहना सही नहीं होगा।

यही फर्क मौजूदा राजनीतिक बहस को समझने के लिए जरूरी है।

त्योहार, सार्वजनिक स्वास्थ्य और राजनीति

महाराष्ट्र में DJ को लेकर खड़ा हुआ विवाद वास्तव में तीन मुद्दों के बीच संतुलन की परीक्षा है।

एक तरफ धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को अपने तरीके से मनाने की मांग है। दूसरी तरफ noise pollution से प्रभावित होने वाले नागरिकों, अस्पतालों, बच्चों और बुजुर्गों की चिंता है। तीसरा सवाल enforcement का है: यदि नियम लागू होते हैं, तो क्या वे सभी आयोजनों और समुदायों पर समान तरीके से लागू किए जा रहे हैं?

इसी वजह से राजनीतिक खेमे भी साफ रेखाओं में नहीं बंटे हैं।

VHP enforcement की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है। नागपुर में BJP के कुछ नेता restrictions में ढील चाहते हैं। पुणे में उसी पार्टी के नेता DJ और laser lights पर सख्ती का समर्थन कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि उसका निशाना संगीत या पारंपरिक उत्सव नहीं, बल्कि तय सीमा से अधिक आवाज और vibration पैदा करने वाला equipment है।

गणेशोत्सव के दौरान इस विवाद की असली परीक्षा प्रशासनिक अमल में होगी। यदि नियम स्पष्ट और समान तरीके से लागू होते हैं तो बहस noise-control तक सीमित रह सकती है। अलग-अलग आयोजनों के लिए अलग व्यवहार की धारणा बनी तो राजनीतिक विवाद और बढ़ सकता है।

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