Manoj Jarange Hunger Strike: मुंबई पुलिस ने क्यों नहीं दी अनुमति?
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे पाटील और मुंबई पुलिस एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। मुंबई पुलिस ने 19 सितंबर 2026 से मुंबई के आजाद मैदान में प्रस्तावित उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को अनुमति देने से इनकार कर दिया है।
आजाद मैदान पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक राजा बिडकर की ओर से जारी छह पन्नों के पत्र में जरांगे की टीम की औपचारिक अनुमति की मांग को खारिज किया गया। पुलिस ने गणेशोत्सव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, संभावित भारी भीड़ और कानून-व्यवस्था से जुड़े जोखिमों को फैसले के प्रमुख कारणों में शामिल किया है।
पुलिस ने किन कारणों से रोकी भूख हड़ताल?
पुलिस के अनुसार, मुंबई में 14 से 25 सितंबर तक गणेशोत्सव के कारण पहले से बड़े स्तर पर पुलिस बल की तैनाती की आवश्यकता है। ऐसे समय में बड़े आंदोलन को अनुमति देने से अतिरिक्त सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन संबंधी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
पुलिस के इनकार पत्र में Public Meetings, Demonstrations and Processions Rules से जुड़ी शर्तों और पिछले आंदोलनों के दौरान आयोजन स्थल की शर्तों के कथित उल्लंघन का भी उल्लेख किया गया है।
पुलिस अधिकारियों ने पिछले आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि अपेक्षा से अधिक लोगों के पहुंचने के कारण छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) और BMC मुख्यालय के आसपास यातायात व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा था।
आयोजकों की ओर से आंदोलन शांतिपूर्ण रखने का भरोसा दिए जाने के बावजूद पुलिस का आकलन है कि गणेशोत्सव के दौरान इतने बड़े प्रदर्शन को अनुमति देना परिचालन और कानून-व्यवस्था की दृष्टि से जोखिम पैदा कर सकता है।
19 सितंबर से आजाद मैदान में आंदोलन की थी योजना
जरांगे ने मराठा आरक्षण से जुड़ी मांगों को लेकर 19 सितंबर से मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की है।
उनकी योजना के अनुसार मुंबई की ओर मार्च 15 सितंबर से शुरू होना है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब महाराष्ट्र में गणेशोत्सव के कारण मुंबई सहित कई शहरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही और सार्वजनिक कार्यक्रम होने हैं।
पुलिस के फैसले पर क्या बोले Manoj Jarange?
अनुमति नहीं मिलने के बाद जरांगे ने महाराष्ट्र सरकार और पुलिस के फैसले की कड़ी आलोचना की है।
उन्होंने सवाल उठाया कि आंदोलन शुरू होने से पहले ही यह क्यों माना जा रहा है कि प्रदर्शनकारी नियमों का उल्लंघन करेंगे। उन्होंने पुलिस के फैसले को कानूनी रूप से चुनौती देने की बात भी कही है।
जरांगे का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक होगा और पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद वह मुंबई जाने की अपनी योजना पर कायम हैं।
उन्होंने यह भी कहा है कि पुलिस की अनुमति खारिज किए जाने के विरोध में वह चिकित्सा उपचार और तरल पदार्थ लेना बंद करेंगे।
हत्या की साजिश का भी लगाया आरोप
जरांगे ने अपने प्रस्तावित मुंबई मार्च को लेकर एक गंभीर दावा भी किया है। उनका आरोप है कि मार्च के दौरान उन्हें निशाना बनाने की साजिश रची जा रही है।
यह जरांगे द्वारा लगाया गया आरोप है और उपलब्ध रिपोर्टिंग में इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने अपने समर्थकों से आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया है और कहा है कि वह अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे।
Bombay High Court का मामला भी चर्चा में
इस विवाद में बॉम्बे हाई कोर्ट की हालिया कार्यवाही भी महत्वपूर्ण है।
रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने जरांगे के नए मुंबई आंदोलन को रोकने की मांग वाली याचिका पर तत्काल प्रतिबंधात्मक आदेश देने से इनकार किया था। अदालत ने कहा था कि केवल कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के आधार पर पहले से रोक लगाने का आदेश नहीं दिया जा सकता और विरोध प्रदर्शन का अधिकार मौजूद है।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रस्तावित आंदोलन को स्वतः पुलिस की अनुमति मिल गई। सार्वजनिक सभा और प्रदर्शन के आयोजन पर लागू नियमों और प्रशासनिक शर्तों का पालन अलग विषय है।
आखिर क्या है Manoj Jarange की प्रमुख मांग?
जरांगे लंबे समय से मराठा समुदाय के लिए आरक्षण संबंधी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
उनकी प्रमुख मांगों में पुराने सरकारी रिकॉर्ड और गजट दस्तावेजों के आधार पर पात्र मराठाओं को Kunbi प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने तथा इसके जरिए उन्हें OBC आरक्षण का लाभ देने की व्यवस्था शामिल है।
दूसरी ओर, कुछ OBC संगठनों ने ऐसी मांगों का विरोध किया है। उनका तर्क है कि इससे मौजूदा OBC आरक्षण के लाभ और हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है।
इसलिए यह मुद्दा केवल जरांगे और राज्य सरकार के बीच आंदोलन तक सीमित नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र की व्यापक आरक्षण राजनीति और विभिन्न सामाजिक समूहों के हितों से भी जुड़ा हुआ है।
अब आगे क्या?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बाद जरांगे की टीम अगला कानूनी कदम क्या उठाती है।
जरांगे ने स्पष्ट किया है कि उनकी कानूनी टीम पुलिस के आदेश को चुनौती देगी और वह प्रस्तावित मुंबई आंदोलन से पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।
ऐसे में 15 सितंबर से प्रस्तावित मुंबई मार्च और 19 सितंबर की भूख हड़ताल से पहले प्रशासन, आंदोलनकारियों और अदालत से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रहेगी।
