विज्ञापन - शीर्ष बैनर
Read in English —JantaScope English
राजनीति

मराठा आरक्षण पर फिर मुंबई कूच करेंगे मनोज जरांगे, 15 सितंबर से मार्च; आज़ाद मैदान में बड़े आंदोलन की तैयारी

मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरे मनोज जरांगे पाटील ने एक बार फिर मुंबई की ओर मार्च करने की घोषणा की है। अंतरवाली सराटी से 15 सितंबर को यात्रा शुरू करने की योजना है। मुंबई पहुंचने के बाद आज़ाद मैदान में आंदोलन और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की तैयारी है। जरांगे ने समर्थकों से आंदोलन शांतिपूर्ण और अनुशासित रखने की अपील की है।

मराठा आरक्षण पर फिर मुंबई कूच करेंगे मनोज जरांगे, 15 सितंबर से मार्च; आज़ाद मैदान में बड़े आंदोलन की तैयारी
विज्ञापन

द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Janta Scope

मुंबई/जालना: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर बड़े आंदोलन की ओर बढ़ रहा है। मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटील ने घोषणा की है कि वह 15 सितंबर 2026 को जालना जिले के अंतरवाली सराटी से मुंबई की ओर मार्च शुरू करेंगे।

जरांगे ने कहा है कि मुंबई पहुंचने के बाद आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा और आज़ाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की योजना है। ताज़ा रिपोर्टों में मुंबई कार्यक्रम की तारीख को लेकर कुछ अंतर है—कुछ रिपोर्टें 19 सितंबर से भूख हड़ताल की बात करती हैं, जबकि अन्य में 20 सितंबर को मुंबई पहुंचने और बड़े प्रदर्शन का उल्लेख है।

इसलिए फिलहाल सबसे स्पष्ट घोषित तारीख 15 सितंबर को मार्च की शुरुआत है।

15 सितंबर को अंतरवाली सराटी से शुरू होगा मार्च

मनोज जरांगे के मुताबिक आंदोलनकारी 15 सितंबर को अंतरवाली सराटी से मुंबई के लिए रवाना होंगे। यात्रा का उद्देश्य महाराष्ट्र सरकार पर मराठा आरक्षण से जुड़ी मांगों को लेकर दबाव बढ़ाना है।

जरांगे लंबे समय से मराठा समुदाय के पात्र सदस्यों को कुनबी प्रमाणपत्र देने और उन्हें OBC आरक्षण के दायरे में लाभ उपलब्ध कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

ताज़ा मार्च भी इसी लंबे आंदोलन की अगली कड़ी है।

रिपोर्टों के मुताबिक मार्च के दौरान बीड़, श्रीगोंदा, हडपसर और खोपोली जैसे स्थान प्रमुख पड़ावों में शामिल हो सकते हैं, जिसके बाद आंदोलनकारी मुंबई पहुंचेंगे।

मुंबई में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की तैयारी

जरांगे ने मुंबई पहुंचने के बाद आज़ाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की योजना जाहिर की है।

इससे पहले वह अंतरवाली सराटी में भी अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन कर चुके हैं।

उनका कहना है कि जब तक मराठा आरक्षण से जुड़ी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मुंबई में बड़े पैमाने पर आंदोलन महाराष्ट्र सरकार के सामने प्रशासनिक और राजनीतिक—दोनों स्तरों पर दबाव बढ़ा सकता है।

समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील

जरांगे ने अपने समर्थकों से आंदोलन को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाने की अपील की है।

उन्होंने समुदाय के लोगों से किसी भी तरह की हिंसा, पथराव या आगजनी से दूर रहने को कहा है। साथ ही, समर्थकों से उकसावे में नहीं आने और मार्च के दौरान अनुशासन बनाए रखने की अपील की गई है।

यह अपील महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़े काफिले के मुंबई की ओर बढ़ने से यातायात और कानून-व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मार्च रोकने से किया इनकार

प्रस्तावित मुंबई मार्च के बीच मामला बॉम्बे हाई कोर्ट तक भी पहुंचा।

अदालत ने जरांगे के प्रस्तावित मार्च को रोकने के लिए तत्काल निषेधात्मक आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। अदालत से मार्च और विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रदर्शनकारियों को कानून या प्रशासनिक नियमों से छूट मिल गई है। मुंबई में वास्तविक प्रदर्शन और सभा को पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन की लागू शर्तों और कानून-व्यवस्था संबंधी व्यवस्थाओं का पालन करना होगा।

मराठा आरक्षण आंदोलन में कुनबी प्रमाणपत्र क्यों अहम?

जरांगे के आंदोलन का एक केंद्रीय मुद्दा पात्र मराठों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र दिलाने से जुड़ा है।

कुनबी समुदाय महाराष्ट्र में OBC श्रेणी में आता है। इसलिए पात्र मराठा व्यक्तियों को ऐतिहासिक रिकॉर्ड और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर कुनबी प्रमाणपत्र मिलने से उन्हें OBC आरक्षण से जुड़े लाभ प्राप्त करने का रास्ता मिल सकता है।

जरांगे ने पहले भी सरकार से पुराने कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया तेज करने की मांग की है।

यही कारण है कि मौजूदा विवाद को केवल सामान्य “मराठा आरक्षण” की मांग के रूप में देखना अधूरा होगा। इसके भीतर कुनबी रिकॉर्ड, प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया और OBC लाभ तक पहुंच जैसे अलग-अलग कानूनी और प्रशासनिक सवाल शामिल हैं।

सरकार और जरांगे के बीच क्यों नहीं बन पा रही बात?

महाराष्ट्र सरकार और जरांगे के बीच पिछले कुछ वर्षों में कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।

ताज़ा घटनाक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बातचीत के जरिए समाधान खोजने की बात कही है। सरकार का रुख रहा है कि संवैधानिक और कानूनी दायरे में आने वाली मांगों पर चर्चा की जा सकती है।

दूसरी ओर, जरांगे का दबाव मुख्य रूप से मांगों को प्रशासनिक स्तर पर लागू करने और संबंधित सरकारी आदेशों तथा प्रमाणपत्र प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।

इसी अंतर के कारण बातचीत और आंदोलन का सिलसिला लगातार जारी है।

2025 में भी मुंबई पहुंचा था आंदोलन

यह पहली बार नहीं है जब जरांगे मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मुंबई पहुंचे हैं।

अगस्त 2025 में भी उन्होंने मुंबई में बड़ा आंदोलन किया था। उस दौरान आज़ाद मैदान आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना और बड़ी संख्या में समर्थकों की मौजूदगी ने दक्षिण मुंबई में यातायात और प्रशासनिक व्यवस्था पर असर डाला था।

बाद में सरकार के साथ बातचीत और मांगों पर आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त किया गया।

अब लगभग एक साल बाद मुंबई फिर मराठा आरक्षण आंदोलन का केंद्र बनने की तैयारी में है।

इस बार सरकार के सामने क्या चुनौती?

आगामी मार्च महाराष्ट्र सरकार के लिए तीन स्तरों पर महत्वपूर्ण होगा।

पहला सवाल मराठा समुदाय की आरक्षण और कुनबी प्रमाणपत्र से जुड़ी मांगों का है। दूसरा, मुंबई में संभावित बड़ी भीड़ को संभालने और सामान्य जनजीवन प्रभावित होने से बचाने की प्रशासनिक चुनौती है।

तीसरा और सबसे संवेदनशील पहलू OBC आरक्षण की मौजूदा संरचना से जुड़ा है। मराठा समुदाय को OBC लाभ देने की मांग का प्रभाव राज्य की मौजूदा आरक्षण व्यवस्था और दूसरे OBC समुदायों की चिंताओं से भी जुड़ता है।

इसलिए सरकार के लिए समाधान केवल राजनीतिक घोषणा तक सीमित नहीं रह सकता; किसी भी कदम को संवैधानिक और कानूनी कसौटी पर भी टिकना होगा।

अब आगे क्या?

फिलहाल अगली महत्वपूर्ण तारीख 15 सितंबर 2026 है, जब जरांगे ने अंतरवाली सराटी से मुंबई की ओर मार्च शुरू करने की घोषणा की है।

इसके बाद ध्यान इस बात पर रहेगा कि मार्च में कितने समर्थक शामिल होते हैं, मुंबई पुलिस आंदोलन के लिए क्या व्यवस्था और शर्तें तय करती है और राज्य सरकार आंदोलनकारियों से बातचीत के लिए कोई नया प्रस्ताव रखती है या नहीं।

मुंबई पहुंचने और आज़ाद मैदान में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू होने की अंतिम समय-सारिणी को भी आधिकारिक घटनाक्रम के साथ देखना जरूरी होगा, क्योंकि प्रकाशित रिपोर्टों में इस हिस्से को लेकर 19 और 20 सितंबर की अलग-अलग तारीखें सामने आई हैं।


साझा करें
विज्ञापन - मध्य लेख
विज्ञापन - नीचे