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राजनीति

MPSC Paper Leak पर बड़ा फैसला: CM फडणवीस ने SIT जांच के दिए आदेश, परीक्षाओं की भी होगी पड़ताल

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर बढ़ते विवाद के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने का आदेश दिया है। सरकार ने 2025 की Group B और Group C परीक्षाओं से जुड़े मामलों की जांच, State Services Main Examination की उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच और प्रक्रिया में सुधार के लिए अलग समिति गठित करने जैसे कदमों की घोषणा की है।

MPSC Paper Leak पर बड़ा फैसला: CM फडणवीस ने SIT जांच के दिए आदेश, परीक्षाओं की भी होगी पड़ताल
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Janta Scope

महाराष्ट्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच MPSC विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं से जुड़े कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं की जांच के लिए Special Investigation Team (SIT) को जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब MPSC अभ्यर्थी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। खास तौर पर Drug Inspector, Group-B भर्ती परीक्षा से जुड़े प्रश्नपत्र लीक मामले ने विवाद को तेज किया है। MPSC ने अगस्त में इस भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया था।

सरकार ने SIT जांच के अलावा उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच और MPSC की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए एक अलग समिति बनाने का भी फैसला किया है।

SIT के दायरे में आएंगी Group B और Group C परीक्षाएं

मुख्यमंत्री के फैसले के मुताबिक, 2025 की Group B और Group C परीक्षाओं से संबंधित कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों की SIT जांच की जाएगी। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि परीक्षा प्रक्रिया में कहां और किस स्तर पर अनियमितता हुई तथा उसके लिए कौन जिम्मेदार था।

सरकार ने केवल मौजूदा विवाद तक जांच सीमित रखने के बजाय पूर्व में सामने आए पेपर लीक मामलों की भी पड़ताल करने का संकेत दिया है।

हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि जांच शुरू होने से पहले सभी आरोपों को साबित तथ्य नहीं माना जाए। SIT के निष्कर्ष ही यह निर्धारित करने में अहम होंगे कि किन मामलों में वास्तविक गड़बड़ी हुई और जिम्मेदारी किसकी थी।

Main Examination की Answer Sheets की होगी दोबारा जांच

सरकार का एक और महत्वपूर्ण फैसला 2025 State Services Main Examination से संबंधित है।

मुख्यमंत्री ने मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराने का निर्देश दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रक्रिया के पूरा होने तक संबंधित interview process को रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं।

यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि अभ्यर्थियों की शिकायतें केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं रही हैं। परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

MPSC में सुधार के लिए अलग Committee

जांच के साथ सरकार ने MPSC की व्यवस्था में संस्थागत सुधार की दिशा में भी कदम उठाया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अतिरिक्त मुख्य सचिव वी. राधा की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है। इसका उद्देश्य आयोग की कार्यप्रणाली का अध्ययन करना और परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के उपाय सुझाना है।

सरकार की योजना में उम्मीदवारों की शिकायतों के समाधान के लिए नया Grievance Cell तैयार करने का कदम भी शामिल है।

इससे SIT और सुधार समिति की भूमिकाएं अलग-अलग दिखाई देती हैं—SIT कथित अनियमितताओं की जांच करेगी, जबकि समिति भविष्य की परीक्षा व्यवस्था में सुधार पर काम करेगी।

Drug Inspector Paper Leak से तेज हुआ विवाद

मौजूदा विवाद की पृष्ठभूमि में Drug Inspector भर्ती परीक्षा का मामला महत्वपूर्ण है।

Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, MPSC ने अगस्त 2026 में Drug Inspector, Group-B recruitment process को question-paper leak के कारण रद्द कर दिया था। इसके बाद आयोग की परीक्षा सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध और तेज हुआ।

इसी विवाद के बीच MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग भी उठी है।

भीमनवार ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि संबंधित पेपर लीक उनके MPSC अध्यक्ष के कार्यकाल से पहले हुआ था। उन्होंने अपने खिलाफ लगाए जा रहे कुछ आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित भी बताया है।

Rohit Pawar ने लगाए गंभीर आरोप

NCP (SP) विधायक रोहित पवार ने विवाद के बीच MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

पुणे में 34 पन्नों की presentation के जरिए पवार ने भीमनवार के परिवहन आयुक्त रहने के दौरान भ्रष्टाचार और खरीद प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए। इनमें HSRP number plates, vehicle interceptors और GPRS kits से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, पवार ने FDA पेपर लीक मामले में करीब ₹40 करोड़ की संभावित लेन-देन का आरोप भी लगाया। यह पवार का दावा है और इसे जांच में स्थापित तथ्य नहीं माना गया है।

इस अंतर को स्पष्ट रखना जरूरी है, क्योंकि राजनीतिक आरोप और जांच में प्रमाणित तथ्य एक ही चीज नहीं हैं।

MPSC Chairman के इस्तीफे पर सरकार का क्या रुख?

अभ्यर्थियों की ओर से MPSC अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग उठने के बावजूद सरकार ने फिलहाल इसे स्वीकार नहीं किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा है कि अध्यक्ष के खिलाफ ठोस सबूत मिलने पर जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सरकार को ऐसा ठोस प्रमाण नहीं मिला है जिसके आधार पर इस्तीफे की मांग स्वीकार की जाए।

इसका अर्थ है कि सरकार ने एक तरफ परीक्षा से जुड़े मामलों की SIT जांच का रास्ता खोला है, वहीं दूसरी ओर आयोग के पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को सबूतों से जोड़कर रखा है।

अभ्यर्थियों के आंदोलन ने सरकार पर बढ़ाया दबाव

MPSC अभ्यर्थी पिछले कुछ दिनों से कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध कर रहे हैं।

इससे पहले छात्रों और शिक्षकों के प्रतिनिधियों ने नागपुर में मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ लगभग 45 मिनट की बैठक की थी। बैठक में पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाने का आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद अभ्यर्थियों ने ठोस कार्रवाई की मांग जारी रखी और राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी।

अब SIT जांच, answer-sheet recheck और सुधार समिति की घोषणा सरकार की ओर से उस बढ़ते दबाव का औपचारिक जवाब है।

अब SIT जांच पर रहेंगी निगाहें

MPSC विवाद में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि SIT का दायरा कितना व्यापक होगा और जांच में क्या सामने आता है।

पेपर लीक जैसे मामलों का प्रभाव केवल एक परीक्षा या भर्ती तक सीमित नहीं रहता। लाखों अभ्यर्थी सरकारी नौकरी की तैयारी में वर्षों लगाते हैं, इसलिए भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता सीधे उम्मीदवारों के भरोसे से जुड़ी होती है।

सरकार द्वारा SIT जांच और संस्थागत सुधारों की घोषणा महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने के लिए जांच के निष्कर्ष, जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया और भविष्य में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए उठाए गए ठोस कदम निर्णायक होंगे।

फिलहाल, पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं से जुड़े कई आरोप जांच के अधीन हैं। इसलिए अंतिम निष्कर्ष SIT और अन्य आधिकारिक जांचों के परिणाम सामने आने के बाद ही निकाला जाना उचित होगा।

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