क्या है MPSC पेपर लीक का पूरा मामला?
मार्च 2026 में महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन (mpsc) ने ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती की परीक्षा आयोजित की थी, लेकिन इसके प्रश्न पत्र लीक हो जाते हैं। जिसके संदर्भ में पुलिस की गहन जांच के बाद 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जिसमें MPSC के अंडर सेक्रेटरी सहित 2 असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर और एक कोचिंग क्लासेस के फाउंडर के साथ अन्य 2 लोग शामिल थे। इसके बाद पुणे में स्टूडेंट्स ने परीक्षा प्रक्रिया में ट्रांसपेरेंसी और परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों की मांग को लेकर 11 दिनों तक प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन का असर यह रहा कि सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच वार्तालाप के बाद कई मांगों पर सहमति जताई गई थी।
महाराष्ट्र सरकार का MPSC पेपर लीक विषय में अहम कदम?
इसी विषय में महाराष्ट्र सरकार ने रविवार को महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) में पेपर लीक सहित अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए एक समिति बनाई, समिति को लीड करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे को इस समिति का अध्यक्ष चुना।
यह घोषणा लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री शिवेंद्र राजे भोसले की प्रदर्शनकारी , राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक रोहित पवार, और कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम से मुलाकात के बाद की गई। पवार, MPSC भर्ती परीक्षा के विषय में पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। वहीं यह प्रदर्शन रविवार देर रात तक चला जिसके बाद ही समिति का गठन करके तुकाराम मुंडे को समिति का सचिव चुना गया।
जांच प्रक्रिया के दौरान विवेक भीमनवार रहेंगे छुट्टी पर।
MPSC पेपर लीक के मामले में IAS तुकाराम मुंडे को मामले की जांच की जिम्मेदारी देने के बाद महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन के चेयरमैन विवेक भीमनवार ने यह घोषणा की कि, वह यह जांच प्रक्रिया पूरी होने तक छुट्टी पर ही रहेंगे। क्योंकि पेपर लीक के मामले में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आयोग में सुधार के साथ MPSC चेयरमैन के इस्तीफे की मांग की थी। लेकिन बिना किसी सबूत के महाराष्ट्र सरकार ने विवेक भीमनवार को पद से हटाया नहीं है। बल्कि जांच पूरी होने तक उन्हें छुट्टी पर रहने की मंजूरी दी है।
पेपर लीक पर MPSC चेयरमैन विवेक भीमनवार का बयान, “मैंने अपने पूरे जीवन में नैतिकता को प्राथमिकता दी है”
हाल ही में MPSC चेयरमैन विवेक भीमनवार की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि, “महाराष्ट्र राज्य सरकार ने MPSC पेपर लीक मामले की न्यायिक जांच की घोषणा की है। मैंने अपने पूरे जिंदगी में हमेशा से नैतिकता को सबसे ज्यादा अहम माना। इसलिए मैंने जांच पूरी होने तक पद पर बने रहने के बजाय इस मामले की जांच के दौरान छुट्टी पर जाने का फैसला किया है।” इसके साथ ही विवेक भीमनवार ने कहा कि, MPSC की ऑटोनॉमी, कैलिब्रिटी और स्टूडेंट की भलाई हमेशा से मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता रही है और भविष्य में भी रहेगी।
जांच समिति में किस-किसकी हुई नियुक्ति?
बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस, जस्टिस दिलीप भोसले को इस समिति का चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है, समिति में पूर्व जस्टिस पी. डी. नाइक, प्रशासनिक अधिकारी तुकाराम मुंडे, रिटायर्ड सचिव गणेश पाटिल और इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस लखमी गौतम शामिल होंगे। वहीं तुकाराम मुंडे समिति के सचिव रहेंगे।
समिति का मुख्य उद्देश्य।
इस समिति का काम होगा, MPSC के काम करने के तरीकों में सुधार लाना, एग्जामिनेशन प्रोसेस में आने वाली बाधाओं का अध्ययन करना और जरूरी सुधारों के बारे में सुझाव देना। वहीं स्टूडेंट्स की मांगों में सरकार की तरफ से अप्रूव किए गए ड्राफ्ट में पेपर लीक की घटनाएं भी शामिल हैं। ड्राफ्ट में यह कहा गया है कि जिस भी परीक्षाओं में पेपर लीक हुए हैं, उन सभी परीक्षाओं की जांच की जाएगी। इसलिए परीक्षा प्रक्रिया में होने वाली गड़बड़ियों और उनके बारे में मिली शिकायतों की इंक्वायरी होने की संभावना है।
सरकार द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया कि, आंदोलन के समय छात्रों के खिलाफ जो भी केस दर्ज हुए थे, वो सभी वापस लिए जाएंगे।
इसी के संदर्भ में NCP विधायक रोहित पवार ने X पर एक पोस्ट में कहा, “महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन (MPSC) छात्रों का सत्याग्रह अंततः विजयी हुआ। एकता, दृढ़ संकल्प और लगन की जीत।”
