महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) की परीक्षा व्यवस्था और कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र असंतोष अब राजनीतिक मुद्दा भी बनता जा रहा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार, 6 सितंबर को आंदोलन कर रहे छात्रों का समर्थन करते हुए कहा कि यह नाराजगी केवल किसी एक परीक्षा या भर्ती तक सीमित नहीं है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कहा कि महाराष्ट्र में हजारों छात्र शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतर रहे हैं क्योंकि व्यवस्था पर उनका भरोसा टूट गया है। उन्होंने पेपर लीक से लेकर भर्ती में देरी, शिक्षा की लागत, हॉस्टल की स्थिति और Direct Benefit Transfer (DBT) से जुड़ी कथित गड़बड़ियों तक कई मुद्दे उठाए।
उनका बयान ऐसे समय आया है जब MPSC Drug Inspector परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच चल रही है और छात्रों की ओर से परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने की मांग उठाई गई है।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन को व्यापक भर्ती और शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि महाराष्ट्र में हजारों विद्यार्थी सड़कों पर शांतिपूर्ण विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इसकी वजह सिर्फ एक परीक्षा या भर्ती नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था में “टूट चुका भरोसा” है।
राहुल ने BJP के नेतृत्व वाली केंद्र और राज्य सरकारों को निशाने पर लेते हुए पेपर लीक, लंबित भर्तियों, शिक्षा के बढ़ते खर्च और हॉस्टल की खराब परिस्थितियों जैसे मुद्दों का उल्लेख किया।
उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि MPSC जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। यह राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप है; इसे जांच एजेंसियों या किसी न्यायिक निष्कर्ष द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
‘छात्रों की आवाज सुननी होगी’
राहुल गांधी ने सरकार से छात्रों की मांगों पर तत्काल ध्यान देने को कहा।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार उनकी आवाज नहीं सुनती और कार्रवाई नहीं करती है तो ‘छात्रों की गूंज’ और तेज होगी।
उनका बयान कांग्रेस के छात्र और युवा मुद्दों पर चल रहे outreach programme ‘Chhatron Ki Goonj’ से भी जुड़ा है, जहां MPSC की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों ने परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया से संबंधित अपनी शिकायतें सामने रखी हैं।
क्या है MPSC Drug Inspector पेपर लीक मामला?
वर्तमान विवाद की पृष्ठभूमि में MPSC की Drug Inspector (Group-B) भर्ती परीक्षा से जुड़ा प्रश्नपत्र लीक मामला है।
इस मामले में जांच आगे बढ़ चुकी है। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने कई गिरफ्तारियां की हैं और कथित तौर पर लीक हुए प्रश्नपत्र तथा संबंधित WhatsApp बातचीत भी जांच का हिस्सा बनी है।
Indian Express की 28 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार उस समय तक मामले में छह गिरफ्तारियां हो चुकी थीं। जांच में यह आरोप सामने आया कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र कुछ अभ्यर्थियों तक पहुंचा था। इन आरोपों की जांच कानून-प्रवर्तन एजेंसियां कर रही हैं।
छात्रों की मांग—परीक्षा रद्द कर दोबारा कराई जाए
MPSC अभ्यर्थियों के एक वर्ग ने प्रभावित परीक्षा को रद्द करने और दोबारा आयोजित करने की मांग की है।
‘Chhatron Ki Goonj’ कार्यक्रम के दौरान एक महिला MPSC अभ्यर्थी ने राहुल गांधी से छात्रों की इस मांग का समर्थन करने की अपील की थी। उसने यह भी कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं का महिला अभ्यर्थियों पर अलग तरह का दबाव पड़ता है क्योंकि उन्हें शादी और परिवार से जुड़े सामाजिक दबावों का सामना करना पड़ सकता है।
छात्रों की मांग और पुलिस जांच दो अलग प्रक्रियाएं हैं। परीक्षा रद्द होगी या नहीं, इसका अंतिम निर्णय संबंधित प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।
MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने क्या कहा?
विवाद के बीच MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने अपने ऊपर लग रहे आरोपों का जवाब दिया है।
भीमनवार के अनुसार संबंधित पेपर लीक उनके अध्यक्ष पद संभालने से पहले हुआ था। उन्होंने 18 फरवरी 2026 को पदभार संभाला था और कहा कि घटना के लिए व्यक्तिगत रूप से उन्हें जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
MPSC की ओर से पुलिस शिकायत और जांच से संबंधित कदम उठाए जाने की बात भी कही गई है।
यह पक्ष इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राजनीतिक नेताओं और प्रदर्शनकारी छात्रों की आलोचना के साथ आयोग का जवाब भी पूरे विवाद का हिस्सा है।
महाराष्ट्र सरकार ने बनाई उच्चस्तरीय समिति
छात्रों की चिंताओं के बीच महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है।
समिति का नेतृत्व Additional Chief Secretary स्तर के अधिकारी द्वारा किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाने के उपायों की समीक्षा करना है।
समिति छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, coaching institutes और जनप्रतिनिधियों सहित विभिन्न पक्षों से सुझाव लेने वाली है।
पुणे में 7 से 10 सितंबर के बीच सुझाव जुटाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है, जबकि समिति 12 सितंबर को Savitribai Phule Pune University में छात्रों के साथ बातचीत करने वाली है।
7 सितंबर को पुणे में प्रस्तावित छात्र मार्च
MPSC और अन्य सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े अभ्यर्थियों की मांगों को लेकर 7 सितंबर 2026 को पुणे में शांतिपूर्ण मार्च आयोजित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार मार्च अलका टॉकीज चौक से जिला कलेक्टर कार्यालय तक प्रस्तावित है।
इससे साफ है कि विवाद अब केवल ऑनलाइन प्रतिक्रिया या राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। छात्रों की मांगें सड़क पर प्रदर्शन, प्रशासनिक समीक्षा और राजनीतिक बहस—तीनों स्तरों पर पहुंच चुकी हैं।
अब किन बातों पर रहेगी नजर?
MPSC विवाद में आगे की तस्वीर मुख्य रूप से तीन घटनाक्रमों से स्पष्ट होगी—Drug Inspector पेपर लीक मामले में पुलिस जांच का नतीजा, प्रभावित परीक्षा को लेकर आयोग का अंतिम फैसला और महाराष्ट्र सरकार की उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशें।
राहुल गांधी के समर्थन ने छात्रों की मांगों को राष्ट्रीय राजनीतिक मंच पर अतिरिक्त जगह जरूर दी है, लेकिन पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और भर्ती व्यवस्था में बदलाव के लिए जांच और आधिकारिक प्रक्रिया के निष्कर्ष निर्णायक होंगे।
