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राजनीति

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कुर्सी से हटाओ: केरल विधानसभा का बड़ा प्रस्ताव।

केरल: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर देशभर में प्रदर्शन तेज होते जा रहे हैं। राजधानी दिल्ली के प्रदर्शन को देखते हुए अब केरल विधानसभा ने भी ज्ञानेश कुमार को हटाए जाने को लेकर प्रस्ताव पारित कर दिया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कुर्सी से हटाओ: केरल विधानसभा का बड़ा प्रस्ताव।
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: जागरण, नवभारत, प्रभात, जनसत्ता

केरल विधानसभा का प्रस्ताव? एनडीए पर लगाया वोट चोरी का आरोप।

सीजेपी और इंडिया गठबंधन द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर वोट चोरी और एसआईआर में बदलाव के आरोप लगाए गए हैं। जिस कारण प्रदर्शनकारी उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। अब केरल विधानसभा ने भी प्रस्ताव पारित कर दिया है, जिसमें उन्होंने एसआईआर में कथित अनियमितताओं को दूर करने की मांग की है। खास ध्यान देने वाली बात यह है कि, विपक्षी नेताओं ने एसआईआर के जरिए ज्ञानेश कुमार और सत्तारूढ़ गठबंधन एनडीए पर वोट चोरी का आरोप लगाया है। वही सोमवार से शुरू हो रही विधानसभा सत्र की बैठकें 12, 13, 14, 15, 16 और फिर 26 और 29 अक्टूबर तक होनी हैं।

पारित प्रस्ताव में केरल ने 3 मांगें रखी हैं।

प्रस्ताव में केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने लिखा है कि, “केरल की विधानसभा ने पहली बार मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने वाला प्रस्ताव पारित किया है। हमारी चुनाव करने की प्रक्रिया और किसी का पक्षपात न करने की खूबी और ईमानदारी से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। वोटर लिस्ट में किए गए बदलाव, सूची से योग्य मतदाताओं का नाम हटाने और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर दिख रही गंभीर चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

पहली मांग, सूची से हटाए गए मतदाताओं को फिर से वोटिंग का अधिकार दिया जाए। एसआईआर प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों को ठीक किया जाए।

दूसरी मांग, मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाया जाए।

तीसरी मांग, वोटिंग प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है। चुनाव आयोग की चयन समिति का फिर से गठन किया जाए। और इसमें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाए, ताकि चुनाव आयोग की आजादी और उस पर भरोसा दोनों बने रहें।

केरल के मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव में आगे लिखा कि, मतदान का अधिकार हमारे लोकतंत्र का आधार है। किसी भी संगठन को हमारे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। हमारा फैसला सही है, वोटिंग राइट की रक्षा करना जरूरी है। संविधान को बनाए रखना जरूरी है, लोकतंत्र की जीत होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि, केरल निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों के लिए मजबूती से खड़ा है।

बता दें कि, केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की ओर से पेश किया गया यह प्रस्ताव ऐसा पहला प्रस्ताव है। इससे पहले इस संबंध में देश में ऐसा कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है।

केरल विधानसभा में पारित प्रस्ताव को सत्तारूढ़ गठबंधन और वाम दलों का समर्थन मिला।

केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने 140 सदस्यीय केरल विधानसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए प्रस्ताव पेश किया। इस विधानसभा में कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन के 102 सदस्य हैं, जबकि वाम दलों के पास 35 सदस्य हैं। दोनों पक्षों के समर्थन के चलते प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो गया। इस घटना को केरल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया है और ऐसा माना जाता है कि भारत के इतिहास में यह पहली बार हुआ है।

पारित किए गए प्रस्ताव पर भाजपा की प्रतिक्रिया।

सीईसी को पद से हटाने के लिए केरल विधानसभा में पेश किए गए प्रस्ताव पर भाजपा विधायक दल के नेता बी.पी. गोपकुमार ने केरल के मुख्यमंत्री से सवाल किया है कि, उनका निर्वाचन वैध है या नहीं? उन्होंने प्रस्ताव में संशोधन का सुझाव दिया है कि 2026 की राज्य विधानसभा भंग की जाए। प्रस्ताव पारित होने के तुरंत बाद विरोधी भाजपा समर्थकों ने विधानसभा परिसर के बाहर उसकी प्रति जलाई।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए प्रस्ताव को फर्जीवाड़ा बताया और कहा कि इसे ऐसे समय पर पारित किया गया है, जब मामला सुप्रीम कोर्ट में पहले से है। प्रस्ताव पारित होने से पता चलता है कि कांग्रेस और माकपा मिलकर काम कर रहे हैं, जबकि दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर यह आरोप लगाती हैं कि उन्होंने भाजपा के साथ समझौता किया है।

वहीं चंद्रशेखर ने सवाल करते हुए कहा कि केरल के पूर्व मुख्य चुनाव अधिकारी को पद से क्यों नहीं हटाया गया, जो अब तक मुख्यमंत्री के निजी सचिव हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान, जब वह आधिकारिक जिम्मेदारी संभाल रहे थे, तब मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण से कांग्रेस को फायदा हुआ था।

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