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राजनीति

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेशकुमार की इस्तीफे की मांग को लेके इंडिया ब्लॉक और चुनाव आयोग आमने सामने

विपक्षीय दलों ने मतदाता सूची विवाद पर चुप न रहने का फैसला किया है। मामला सुप्रीम कोर्ट मे दायर है। इंडिया ब्लॉक SIR का लगातार विरोध कर रहे है। विपक्षीय दलों का आरोप है की, SIR की प्रक्रिया के दौरान चुनावी सूची से बड़ी संख्या मे मतदाताओं के नाम हटाए गए है। जिस कारण मतदाता अपने वोट देने के अधिकार से वंचित हो गए है। वही चुनाव आयोग का कहना है की , SIR की प्रक्रिया का उद्देश्य केवल दोहरे और अपात्र नामों को हटाना है।

मुख्य चुनाव आयुक्त  ज्ञानेशकुमार की इस्तीफे की मांग को लेके इंडिया ब्लॉक और चुनाव आयोग आमने सामने
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: the indian express india news, abp news.

नई दिल्ली: कोक्करोंच जनता पार्टी और इंडिया ब्लॉक द्वारा बीते कई दिनों से राजधानी दिल्ली मे चुनाव आयोग के खिलाफ विद्रोह जारी है। जहा मुख्य चुनाव आयुकत ज्ञानेशकुमार के ऊपर वोट चोरी , SIR मे कथित तौर पर किए गए बदलाव और चुनावी प्रक्रिया पर छेड़छाड़ के आरोप लगाए गए है। इसके साथ ही कोक्करोंच जनता पार्टी और विपक्षीय दलों का कहना है की, ज्ञानेशकुमार इसका सीधा फायदा बीजेपी को पहुचाना चाहते है। इस विरोध प्रदर्शन को हफ्ते से ज्यादा का समय हो चुका है। जहा राजधानी दिल्ली मे कोक्करोंच जनता पार्टी और वियपक्षीय दलो के नेता प्रदर्शनकारी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रहे है।

मतदाता सूची से गायब 13 करोड़ लोगों के नाम : विपक्ष का आरोप।

चुनाव आयोग के खिलाफ यह विवाद मतदाता सूची से 13 करोड़ मतदाताओ के नाम हटाने को लेके हुआ है। इसके बारे मे आलोचकों का कहना है की, मतदाता सुची से मतदाताओ के नाम हटाने का सीधा फायदा हालही में हुए राज्य चुनाओ मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी को हुआ है। हालांकि चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।

वही प्रदर्शनकारियों का यह कहना है की, 30 राज्यों से कुल 13 करोड़ मतदाताओ के नाम गायब किए गए है। यानि की जापान की जनसंख्या से भी ज्यादा लोगों का नाम वोटिंग लिस्ट से हटाने का दावा किया जा रहा है। चुनाव आयोग ने इस दावे को झूठ कहते हुए ज्ञानेशकुमार के पक्ष मे कहा है की, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेशकुमार ने मतदाता सूची से केवल उन्ही लोगों के नाम हटाए है जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है, या वे लोग शामिल है जो एक जगह से कहीं दूसरी जगह सिफ्ट हो चुके है, और उन नामों को हटाया गया है जिनका मतदाता सूची मे दोहराव है।

विपक्षीय दलों द्वारा दायर याचिका मे क्या लिखा है?

वोट चोरी , और SIR के मामले मे विपक्षीय दल और कोक्करोंच जनता पार्टी काफी ज्यादा भड़की हुई है। जिस कारण बीते दिन इंडिया ब्लॉक ने काँग्रेस नेता की अगुआई मे सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया था, और सुप्रीम कोर्ट मे इंडिया ब्लॉक के 11 बड़े नेताओ ने SIR के खिलाफ एक साथ याचिका दायर की है। दायर याचिका मे इंडिया ब्लॉक के नेताओ ने यह मांग की है की, चुनाव आयोग के फैसलों की पुनः जांच की जाए और SIR के तहत हटाए गए नामों को ऑडिट किया जाए। वही दायर याचिका मे लागू नियमों मे संशोधन किए बिना वैधानिक प्रपत्र 6 का गैरकानूनी संशोधन ,इसीआईएनटी और इआरओनेत मतदाता सूची डेटाबेस का केन्द्रीकृत और अपारदर्शित कामकाज , पर्याप्त जानकारी, सुनवाई और चुनावी लिस्ट मे सुधार के लिए प्रभावी तंत्र के बिना बड़े पैमाने पर मतदाताओं का बहिष्कार शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट ने किया याचिका को खारिज।

इंडिया ब्लॉक के याचिका दायर करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दायर याचिका मे काफी कमियाँ बताई है, इसमे काँग्रेस नेता मलिकार्जुन खरगे के पहचान पत्र की अस्पष्ट फोटोकॉपी और 11 याचिका कर्ताओ मे से 9 के वकालतनामा का न शामिल होना है। इसके साथ ही पूरी याचिका मे सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह की 14 कमिया बताई है, साथ मे कोर्ट को 220 रुपए कोर्ट फीस की भी कमी मिलि है । वही याचिका कर्ताओ की कानूनी टीम ने अनुरोध किया है की, याचिका मे जो भी खामिया है इसे दूर करके मामले को बुधवार को फिर से सुप्रीम कोर्ट मे पेश किया जाएगा। कोर्ट का कहना है की याचिका मे सुधार के बाद ही इसे सूचीबद्ध किया जाएगा।

14 ऑक्टोबर को पुनः चुनाव आयोग के खिलाफ हुआ प्रदर्शन। वही विरोधी दल के कार्यकर्ताओ की हिरासत से बड़ा विवाद।

सूत्रों के अनुसार, एनएसयू आई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के अगुआई मे 14 ऑक्टोबर को सैकड़ों की तादाद मे कार्यकर्ता राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 7 पर पहुचे। जहा सभी मिलकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेशकुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले थे। लोगों के जमावड़े के बीच दिल्ली पुलिस वहाँ पहुंची और जाखड़ सहित कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत मे ले लिया। कुछ समय बाद एनएसयूआई ने कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन के बाहर धरना प्रदर्शन करने का आह्वान किया और पुलिस पर आरोप लगाया की पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को अलग करते समय महिला सदस्यों के साथ मारपीट की, वही संगठन का कहना है की कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत मे लेके पुलिस स्टेशन ले जाया गया, और कुछ लोगों को अभी तक रिहा भी नहीं किया गया है। इसी तरह हर रोज देश की राजधानी मे चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच दिन ब दिन तनाव बढ़ता ही जा रहा है। और लोगों मे एक सियासी चिंता बनी हुई है।

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