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राजनीति

‘नशे की लड़ाई पंजाब से नहीं, मुंद्रा पोर्ट से शुरू करें’: केजरीवाल ने BJP की यात्रा पर उठाए सवाल

AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने BJP की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ पर निशाना साधते हुए कहा कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई पंजाब के बजाय गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से शुरू होनी चाहिए। उनका बयान BJP अध्यक्ष नितिन नबीन द्वारा पंजाब में शुरू किए गए नशा विरोधी अभियान के बीच आया है। केजरीवाल ने ड्रग्स की सप्लाई को लेकर कई दावे किए हैं, जिन्हें BJP चुनौती देती रही है।

‘नशे की लड़ाई पंजाब से नहीं, मुंद्रा पोर्ट से शुरू करें’: केजरीवाल ने BJP की यात्रा पर उठाए सवाल
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: The Economic Times

पंजाब में नशे के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने BJP की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ पर पलटवार करते हुए कहा है कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत पंजाब से नहीं, बल्कि गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से होनी चाहिए।

केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “The fight against drugs should not begin from Punjab, but from Mundra Port. If you care even a tiny bit about Punjab, then stop the drugs coming from Gujarat.”

उनकी टिप्पणी BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की पंजाब में पार्टी के नशा विरोधी अभियान को लेकर की गई टिप्पणियों के जवाब में आई। BJP ने 18 सितंबर को पठानकोट से 13 दिन की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ शुरू की है।

क्या है BJP की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’?

BJP ने पंजाब में ड्रग्स के मुद्दे को लेकर 13 दिवसीय ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ शुरू की है।

यात्रा की शुरुआत 18 सितंबर को पठानकोट से हुई। पार्टी की चार समानांतर यात्राओं का कार्यक्रम लगभग 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करने और पंजाब के विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने का है। इन यात्राओं का समापन 30 सितंबर को जालंधर में होना है।

BJP के मुताबिक, अभियान का फोकस ड्रग तस्करी से निपटने, अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई नेटवर्क को बाधित करने, कथित अवैध ड्रग कारोबार से बनाई गई संपत्तियों को जब्त करने, नशे से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने पर है।

इसी अभियान ने पंजाब की सत्तारूढ़ AAP और BJP के बीच नशे को लेकर पहले से जारी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है।

केजरीवाल बोले- शुरुआत मुंद्रा पोर्ट से होनी चाहिए

BJP के अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए केजरीवाल ने गुजरात को लेकर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि अगर BJP को पंजाब की चिंता है तो उसे गुजरात से कथित तौर पर आने वाली ड्रग्स को रोकना चाहिए।

केजरीवाल इससे पहले भी आरोप लगा चुके हैं कि पंजाब में पहुंचने वाली ड्रग्स के स्रोत में बदलाव आया है। 15 सितंबर को उन्होंने दावा किया था कि 2022 में AAP सरकार बनने के समय पंजाब में आने वाली लगभग 80% ड्रग्स पाकिस्तान से आती थीं, लेकिन एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाने के बाद पाकिस्तान से आने वाली ड्रग्स का हिस्सा घटकर करीब 20% रह गया है।

इसके साथ उन्होंने दावा किया कि अब लगभग 80% ड्रग्स BJP शासित गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से आ रही हैं

इन प्रतिशतों को केजरीवाल और AAP के राजनीतिक दावों के रूप में देखना जरूरी है; उपलब्ध रिपोर्टिंग में इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि प्रस्तुत नहीं की गई है।

मुंद्रा पोर्ट को लेकर क्या कहा केजरीवाल ने?

केजरीवाल ने अपने पहले के बयान में आरोप लगाया था कि ड्रग्स गुजरात के मुंद्रा पोर्ट के जरिए भारत में प्रवेश करती हैं और ऐसी तस्करी रोकना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने BJP से पंजाब को निशाना बनाने के बजाय अपने शासन वाले राज्यों में ड्रग नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा।

मुंद्रा पोर्ट का मुद्दा भारतीय राजनीति में पहले भी उठ चुका है। केजरीवाल सहित AAP के नेता गुजरात के बंदरगाहों पर हुई बड़ी मादक पदार्थ बरामदगी का हवाला देते हुए केंद्र और BJP पर सवाल उठाते रहे हैं।

हालांकि, किसी बंदरगाह पर ड्रग्स की जब्ती होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उस बंदरगाह का प्रबंधन या राज्य सरकार तस्करी में शामिल है। ऐसी जब्तियां कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई को भी दर्शाती हैं।

इसलिए मुंद्रा पोर्ट को पंजाब में ड्रग्स का प्रमुख स्रोत बताने वाले राजनीतिक दावों और वहां हुई वास्तविक ड्रग बरामदगी के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है।

AAP ने एंटी-ड्रोन सिस्टम को बताया बड़ी उपलब्धि

AAP का कहना है कि पाकिस्तान सीमा से ड्रोन के जरिए होने वाली ड्रग तस्करी से निपटने के लिए पंजाब में एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए गए हैं।

केजरीवाल ने दावा किया कि इन उपायों से पाकिस्तान से आने वाली ड्रग्स की मात्रा में उल्लेखनीय कमी आई है। पंजाब सरकार भी अपने नशा विरोधी अभियान को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा बताती है।

हालांकि, केजरीवाल द्वारा बताए गए 80% और 20% के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं दी गई है।

पंजाब में नशे पर BJP और AAP आमने-सामने

नशे का मुद्दा अब पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बड़े राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है।

BJP ने AAP सरकार के ड्रग्स खत्म करने से जुड़े पुराने वादों और समयसीमाओं पर सवाल उठाए हैं। दूसरी तरफ AAP ने BJP और पिछली पंजाब सरकारों के रिकॉर्ड को लेकर पलटवार किया है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी BJP की यात्रा पर हमला करते हुए 2007 से 2017 के दौरान शिरोमणि अकाली दल-BJP गठबंधन सरकार के कार्यकाल को लेकर आरोप लगाए हैं। BJP ने इसके जवाब में मौजूदा AAP सरकार के रिकॉर्ड और नशे को खत्म करने के उसके दावों पर सवाल उठाए।

इससे स्पष्ट है कि ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ सिर्फ एक जन-जागरूकता अभियान नहीं रह गई है, बल्कि पंजाब में ड्रग संकट की जिम्मेदारी को लेकर राजनीतिक दलों के बीच व्यापक बहस का हिस्सा बन चुकी है।

पंजाब सरकार भी चला रही है नशा विरोधी अभियान

AAP सरकार भी राज्य में नशे के खिलाफ अपना अभियान चला रही है।

13 सितंबर को बठिंडा में आयोजित ‘Youth Run Punjab 2026’ में 20,000 से अधिक युवाओं और एथलीटों ने हिस्सा लिया था। यह कार्यक्रम पंजाब सरकार के नशा विरोधी अभियान और युवाओं में खेल तथा फिटनेस को बढ़ावा देने की कोशिशों का हिस्सा था।

केजरीवाल ने उस कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए इसे पंजाब के युवाओं में बदलाव और नशे के खिलाफ भागीदारी का संकेत बताया था।

असली सवाल: ड्रग्स की सप्लाई चेन कहां से और कैसे टूटेगी?

AAP और BJP के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग, मौजूदा बहस कई अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती है—सीमा पार तस्करी, अंतरराज्यीय नेटवर्क, समुद्री मार्ग, स्थानीय वितरण, कानून-प्रवर्तन और नशे की लत से प्रभावित लोगों का पुनर्वास।

BJP अपनी यात्रा के जरिए पंजाब में तस्करी नेटवर्क, पुनर्वास और सामुदायिक भागीदारी को मुद्दा बना रही है। दूसरी तरफ AAP का तर्क है कि पंजाब के भीतर कार्रवाई के साथ उन बाहरी सप्लाई रूट्स पर भी ध्यान देना जरूरी है, जिनके जरिए राज्य में नशीले पदार्थ पहुंचते हैं।

केजरीवाल का मुंद्रा पोर्ट वाला बयान इसी राजनीतिक बहस का हिस्सा है। फिलहाल उनके द्वारा ड्रग्स के स्रोत को लेकर दिए गए प्रतिशत और विभिन्न राज्यों पर लगाए गए आरोप AAP के दावे हैं, जिन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़ों के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

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