यमन में अचानक बदले सैन्य समीकरण के बीच एक ऐसी बैठक सामने आई है जो Red Sea की सुरक्षा से लेकर Saudi Arabia-US संबंधों तक कई सवाल खड़े करती है। Reuters के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने Oman की राजधानी Muscat में Yemen के Iran-aligned Houthi movement के वरिष्ठ प्रतिनिधियों से एक गोपनीय बैठक की। बैठक ऐसे समय हुई जब Houthis ने Yemen के Red Sea coast पर तेजी से बढ़त हासिल की और Saudi-backed forces को पीछे धकेला।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Houthis ने कथित तौर पर अमेरिकी अधिकारियों को आश्वासन दिया कि वे अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करना चाहते और 2025 में Washington के साथ हुए ceasefire को मानते हैं।
लेकिन इस assurance के साथ एक महत्वपूर्ण अपवाद भी बताया गया: Reuters के एक Yemeni source के अनुसार, Houthis ने Israeli और दूसरे commercial vessels को निशाना नहीं बनाने की बात कही, लेकिन Saudi vessels को इस आश्वासन से बाहर रखा।
यही अंतर इस बैठक को साधारण diplomatic contact से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बनाता है।
Muscat में वास्तव में क्या हुआ?
Reuters ने मामले की जानकारी रखने वाले पांच सूत्रों के आधार पर बताया कि US और Houthi representatives की बैठक 12-13 सितंबर के weekend में हुई। तीन सूत्रों के मुताबिक बातचीत Muscat स्थित US Embassy में हुई, जबकि दो सूत्रों ने कहा कि Oman ने बैठक आयोजित कराने में मदद की।
एक सूत्र के अनुसार बैठक रविवार, 13 सितंबर को हुई।
अमेरिकी पक्ष का प्रतिनिधित्व embassy personnel ने किया। Houthi delegation में Mohammad Abdulsalam और Abdelmalik al-Ajiri शामिल थे, Reuters के सूत्रों ने बताया।
यह विवरण एक और कारण से महत्वपूर्ण है। U.S. Treasury के आधिकारिक OFAC रिकॉर्ड के मुताबिक Mohammad Abdulsalam और Abdulmalek al-Ajiri दोनों को मार्च 2025 में sanctions list में जोड़ा गया था। Treasury records में दोनों का स्थान Muscat, Oman दर्ज है और उन्हें Ansarallah से linked बताया गया है।
इसका अर्थ है कि Washington एक तरफ Houthi leadership पर sanctions बनाए हुए है, लेकिन दूसरी तरफ escalation रोकने के लिए उसी movement के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ communication channel भी खुला रख रहा है।
Houthis ने अमेरिका से क्या कहा?
Reuters के दो सूत्रों के मुताबिक Houthi representatives ने अमेरिकी अधिकारियों से कहा कि उनका American vessels पर हमला करने का इरादा नहीं है और वे May 2025 में हुए US-Houthi ceasefire के प्रति प्रतिबद्ध हैं।
एक Yemeni source ने Reuters को बताया कि Houthis ने Israeli vessels या दूसरे commercial ships को भी निशाना नहीं बनाने की बात कही—लेकिन Saudi Arabia से संबंधित vessels को इस assurance में शामिल नहीं किया।
इस दावे को सावधानी से पढ़ना जरूरी है।
यह Houthi representatives द्वारा बैठक में दिया गया कथित assurance है; इसे किसी नए औपचारिक, सार्वजनिक ceasefire agreement के बराबर नहीं माना जा सकता। अमेरिकी State Department ने भी Reuters के सवाल पर specific meeting की पुष्टि करने से इनकार करते हुए कहा कि Red Sea में freedom of navigation की रक्षा और Middle East से terrorism के प्रसार को रोकना अमेरिका के मुख्य हितों में शामिल है।
2025 का ceasefire क्या था?
इस कहानी को समझने के लिए May 2025 के समझौते पर लौटना जरूरी है।
6 मई 2025 को Oman के Foreign Ministry ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की थी कि Muscat की mediation के बाद United States और Sana'a authorities के बीच ceasefire agreement हुआ है।
Oman के मुताबिक समझ यह थी कि दोनों पक्ष एक-दूसरे को निशाना नहीं बनाएंगे, जिसमें Red Sea और Bab al-Mandab Strait में American vessels भी शामिल थीं। उद्देश्य freedom of navigation और international commercial shipping को सुचारू रखना था।
इसलिए सितंबर 2026 की Muscat meeting में Houthi representatives का कथित संदेश वास्तव में एक बिल्कुल नए समझौते से अधिक पुराने US-Houthi understanding को जारी रखने का assurance दिखाई देता है।
लेकिन Saudi Arabia इस equation का हिस्सा नहीं है।
यहीं से वर्तमान संकट की सबसे महत्वपूर्ण strategic complication शुरू होती है।
Saudi Arabia ने Trump से क्यों मांगी मदद?
Houthis की हालिया territorial advance ने Riyadh की चिंता तेजी से बढ़ाई है।
Reuters ने 11 सितंबर को तीन सूत्रों के आधार पर बताया कि Saudi Crown Prince Mohammed bin Salman ने President Donald Trump से Houthi threat से निपटने के लिए अमेरिकी military assistance मांगी थी। दोनों नेताओं के बीच कम से कम दो phone conversations हुईं।
Trump ने अमेरिकी forces द्वारा Houthis पर सीधे strikes करने पर सहमति नहीं दी। हालांकि Washington ने Riyadh को intelligence-sharing और targeting assistance उपलब्ध कराने की बात कही।
इसके कुछ दिनों बाद Saudi Crown Prince ने Jeddah में U.S. Central Command के प्रमुख Admiral Brad Cooper से regional developments पर चर्चा की। Saudi state media ने बैठक की पुष्टि की थी।
यहां Washington की स्थिति बेहद दिलचस्प है: अमेरिका Saudi Arabia का लंबे समय से security partner है, लेकिन फिलहाल वह Houthis के खिलाफ एक और सीधे military campaign में उतरने से बचता दिखाई दे रहा है।
Bab al-Mandab ने संकट को इतना गंभीर क्यों बनाया?
Houthis की हालिया बढ़त केवल Yemen की जमीन पर नियंत्रण का मामला नहीं है।
Reuters के अनुसार समूह ने Yemen के Red Sea coastline पर व्यापक नियंत्रण हासिल किया, जिसमें historic port Mocha और Perim Island भी शामिल हैं। Perim Island Bab al-Mandab Strait में स्थित है—वही संकरा maritime chokepoint जो Red Sea को Gulf of Aden और आगे Arabian Sea से जोड़ता है।
इसलिए यहां territorial control का सीधा संबंध international shipping से जुड़ जाता है।
Reuters की अलग analysis में बताया गया कि इस क्षेत्र में Houthi foothold Saudi oil exports और Red Sea shipping पर दबाव बढ़ा सकता है। Saudi Arabia ने स्थिति संभालने के लिए Egypt से भी सहायता की संभावना पर बात की, हालांकि Cairo की ओर से तत्काल कोई commitment सामने नहीं आया।
यानी Riyadh की चिंता केवल Yemen में अपने allies की battlefield position नहीं, बल्कि Saudi economic और maritime interests की सुरक्षा भी है।
एक तरफ sanctions, दूसरी तरफ बातचीत—क्या यह विरोधाभास है?
पहली नजर में ऐसा लग सकता है।
Trump administration ने जनवरी 2025 में Ansar Allah को Foreign Terrorist Organization के रूप में फिर designate करने की प्रक्रिया शुरू की थी। White House ने उस समय Houthi attacks को American personnel, regional partners और Red Sea shipping के लिए खतरा बताया था।
मार्च 2025 में OFAC records में Ansarallah की designation FTO के रूप में update हुई और Mohammad Abdulsalam समेत कई Houthi officials पर sanctions लगाए गए।
इसके बावजूद diplomacy बंद नहीं हुई।
विश्लेषण: Muscat channel को Washington द्वारा Houthis को राजनीतिक मान्यता देने के बजाय risk-management mechanism के रूप में देखना अधिक सटीक होगा। अमेरिका का तत्काल उद्देश्य ऐसा arrangement बनाए रखना हो सकता है जिसमें उसकी forces और commercial maritime traffic नए Houthi-US confrontation में न फंसें।
लेकिन यह interpretation है; अमेरिकी सरकार ने बैठक के उद्देश्य को इस तरह आधिकारिक रूप से परिभाषित नहीं किया है।
Oman फिर क्यों बना mediator?
Oman लंबे समय से Yemen conflict में एक अलग diplomatic position रखता आया है और Houthi-US contacts में उसकी भूमिका पहले से documented है।
May 2025 का ceasefire भी Omani mediation से ही संभव हुआ था। Oman Foreign Ministry ने उस समय कहा था कि उसने United States और Sana'a authorities के साथ discussions और contacts के जरिए agreement तक पहुंचने में मदद की।
15 सितंबर 2026 को Oman के Foreign Minister Badr Albusaidi और U.S. Secretary of State Marco Rubio के बीच फोन पर regional developments, de-escalation और diplomatic efforts पर चर्चा भी हुई। हालांकि Omani statement ने इस call को Houthi meeting से सीधे नहीं जोड़ा।
इसलिए दोनों घटनाओं के बीच निश्चित संबंध बताना उचित नहीं होगा।
इस secret meeting का असली मतलब क्या है?
अभी उपलब्ध जानकारी से तीन अलग tracks दिखाई देते हैं।
पहला, US-Houthi track: दोनों पक्ष 2025 के ceasefire को टूटने से बचाना चाहते दिखाई देते हैं।
दूसरा, Saudi-Houthi track: यहां स्थिति बिल्कुल अलग है। Fighting तेज हुई है और Saudi shipping तथा territory पर खतरा बना हुआ है।
तीसरा, US-Saudi track: Washington Riyadh को intelligence और targeting support दे रहा है, लेकिन Reuters के मुताबिक फिलहाल सीधे Houthi targets पर अमेरिकी strikes के लिए तैयार नहीं है।
यही तीन-layer equation बताती है कि Oman meeting किसी comprehensive Yemen peace deal का संकेत नहीं है।
इसके बजाय यह एक सीमित tactical understanding हो सकती है—जिसमें Washington अपने जहाजों और Red Sea commerce को conflict से अलग रखना चाहता है, जबकि Saudi-Houthi confrontation अपने अलग रास्ते पर जारी रह सकता है।
और यही इस meeting की सबसे बड़ी सीमा भी है: America और Houthis के बीच de-escalation, Saudi Arabia के लिए शांति की गारंटी नहीं है।
