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राजनीति

"One Nation, One Election" को लेके छिड़ा बाद विवाद, संयुक्त संसदीय समिति की बैठक हुई रद्द।

वन नैशन वन इलेक्शन यानि देशभर मे लोकसभा और राज्य विधानसभा के election एक साथ करवाने के लिए संसद मे बिल को चुना जा रहा है, इसी विषय मे विधेयकों पर बनी संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर / 6 ऑक्टोबर से जुड़ी कारवाही के तहत एक बैठक तय की थी। लेकिन बाद मे यह बैठक रद्द कर दी गई। वन नैशन वन इलेक्शन को लेके अभी वैधायकी प्रक्रिया जारी है।

"One Nation, One Election"  को लेके छिड़ा बाद विवाद,  संयुक्त संसदीय समिति की बैठक हुई रद्द।
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: PRESS INFORMATION BUREAU, THE INDIAN EXPRESS, TOI

संयुक्त संसदीय समिति (jpc) की प्रास्ताविक बैठक रद्द क्यू हुई?

वन नैशन वन इलेक्शन यानि की देश भर मे लोकसभा और राज्यसभा के चुनाव को एकसाथ करवाने की योजना को लेके एक बार फिर से विवाद हो चुका है, इसमे राजनीतिक और संवैधानिक दोनों ही विवादित कारण सामने आए है। इस बार विवाद की वजह सरकार या कानून को लेके सुप्रीम कोर्ट का कोई फैसला नहीं है। बल्कि वन नैशन, वन इलेक्शन प्रस्ताव से जुड़े बिल की जांच कर रही समिति (JPC) और supreme court के बीच तय हुई बैठक का रद्द होना है। हालांकि यह कोई फॉर्मल बैठक नहीं थी, जांच के मामले से जुड़ी एक इनफ़ॉर्मल बैठक थी।

सूत्रों के मुताबिक, 1 ऑक्टोबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय के सेक्रेटरी जनरल के कार्यालय ने लोकसभा सचिवालय को मीटिंग रद्द करने की जानकारी दी थी। वरिस्थ न्यायधीशों के गहन चर्चा के बाद उनके मुताबिक, प्रस्ताव किया गया संवैधानिक संशोधन भविष्य मे सुप्रीम कोर्ट मे judiciary review का विषय बन सकता है, इसलिए इस बारे मे चर्चा करना प्रक्षाशनिक स्तर पर ठीक नहीं होगा। यानि कि सुप्रीम कोर्ट ने न ही "वन नैशन, वन इलेक्शन" के प्रस्ताव को खारिज किया है, और न ही मंजूरी दी है। उन्होंने इस प्रस्ताव को बस इस आधार पर रद्द किया की आगे चल कर कानूनी स्तर पर न्यायिक समीक्षा के लिए परेशानी न खड़ी हो। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ओफिशल लेटर मे पैनल को यह जानकारी दी थी।

विवाद की नीव ?

संयुक्त संसदीय समिति की के विधेयकों की जांच की प्रास्ताविक बैठक पर वरिस्थ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने गंभीर आपत्ति जताई थी, उन्होंने "वन नैशन, वन इलेक्शन" के प्रस्ताव को संविधान मे निहित sepration of power के लिहाज से अनुचित बताया। राज्यसभा सांसद सिब्बल के मुताबिक, संसद की समिति जिस कानून पर विचार कर रही है। उसकी संवैधानिक वैधता आगे चलकर सुप्रीम कोर्ट को ही चुनौती दे सकती है। ऐसे मे इस विषय पर मौजूद न्यायधीशों के साथ चर्चा करना ठीक नहीं होगा।

वही दूसरी तरफ , JPC के मेम्बर और DMK सांसद पी. विल्सन ने बैठक के प्रस्ताव का बचाव किया था, क्युकी उन्होंने ही बैठक का प्रस्ताव भी दिया था। पी . विल्सन ने अपने बयान मे बताया कि दुर्भाग्यवश , इस बैठक से जुड़े राजनीतिक आपत्तियों के कारण , निहित स्वार्थों के कारण उत्पन्न हुई अनावश्यक और बुरी परिस्थितियों को देखते हुए बैठक को कैन्सल करने का फैसला किया गया है।

आखिर "वन नैशन, वन इलेक्शन" के बिल मे क्या है कि, यह चर्चा के पहले ही विवाद का विषय बन गया।

"वन नैशन, वन इलेक्शन" बिल का एक ही उद्देश्य है , लोकसभा और राज्य विधानसभा के चुनाओ को एक कर दिया जाए। सत्ता धारी पार्टी का मानना है की इससे इलेक्शन मे होने वाले खर्च मे कमी आ जाएगी। इसी बिल के संदर्भ मे 2024 मे 2 विधेयक लोकसभा मे पेश किए गए थे।

  1. constitution (129th amendment ) bill,2024.

  2. union territories laws (amendment) bill, 2024

इसका मतलब, प्रोपोसेड कान्स्टिटूशन अमेंडमेंट बिल का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाओ को एक ही साइकिल मे लाना है। अगर किसी राज्य मे सत्ता को 5 साल पूरा होने के पहले हटाया जाएगा तो उसके बाद का इलेक्शन बस बचे हुए साल के लिए ही होगा। मतलब अगर लोकसभा को 2 साल के कार्यकाल के बाद हटा दिया जाता है तो आगे का इलेक्शन केवल बचे हुए 3 वर्षों के लिए ही होगा न की 5 वर्षों के लिए, ताकि आने वाला चुनाव फिर से एक साथ एक ही निर्धारित समय पर हो सके।

बिल मे यह प्रस्ताव भी दिया गया है की , अगर किसी राज्य मे एक ही समय पर चुनाव करवाना पॉसिबल नहीं है तो , उस particular राज्य का चुनाव एक तय तारीख के लिए खारिज किया जा सकता है।

विवाद का असली मुद्दा?

विवाद के 2 कारण है पहला , क्या संसद की किसी समिति को ऐसे कानून के बारे मे मौजूदा सुप्रीम कोर्ट के judges से विचार विमर्श करना चाहिए जिसकी संवैधानिक वैधता भविष्य मे अदालत के सामने आ सकती है और दूसरा कारण सुप्रीम कोर्ट की स्वतंत्रता का भी है, सुप्रीम कोर्ट ने बैठक रद्द करके पहले से ही यह संकेत दे दिया की, वह ऐसे मामले मे किसी भी तरह के विवाद राय या चर्चा से बचना चाहता है। जिससे आगे चलकर मुसीबत न खड़ी हो जाए, और न्यायिक समीक्षा का सामना न करना पड़ जाए।

हालांकि बैठक रद्द होने का मतलब यह नहीं है कि , "one nation ,one election" की संसदीय प्रक्रिया खतम हो जाएगी, संयुक्त संसदीय समिति अभी भी बिल की जांच कर रही है, और अभी भी विशेषज्ञों और बिल के हितकारियो की राय ली जा रही है। JPC के अनुसार, समिति तब अपनी रिपोर्ट पेश करेगी जब उन्हे यह एहसास हो जाएगा की जरूरी पक्षों को सुना जा चुका है।

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