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राजनीति

ऑपरेशन सिंदूर के बाद फिर चर्चा में ट्रंप की भूमिका, शहबाज शरीफ ने UNGA में दिया धन्यवाद

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव के दौरान कथित “समय पर हस्तक्षेप” के लिए धन्यवाद दिया। शरीफ ने सिंधु जल संधि का मुद्दा भी उठाया और पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, बाधित करने या मोड़ने के किसी भी प्रयास को लेकर चेतावनी दी। भारत लगातार अमेरिकी मध्यस्थता के दावे को खारिज करता रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद फिर चर्चा में ट्रंप की भूमिका, शहबाज शरीफ ने UNGA में दिया धन्यवादAI-generated illustration | JantaScope
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: UNGA संबोधन, भारत सरकार, पाकिस्तान विदेश मंत्रालय और Reuters

शहबाज शरीफ ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ट्रंप के ‘समय पर हस्तक्षेप’ को सराहा, सिंधु जल पर भारत को चेतावनी

न्यूयॉर्क, 26 सितंबर 2026: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका की एक बार फिर प्रशंसा की है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए शरीफ ने ट्रंप को धन्यवाद देने के साथ-साथ सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान का रुख भी दोहराया।

शरीफ ने कहा कि जब दोनों परमाणु-सशस्त्र पड़ोसी व्यापक संघर्ष की ओर बढ़ रहे थे, उस समय ट्रंप का हस्तक्षेप महत्वपूर्ण था। हालांकि, पाकिस्तान के इस दावे को भारत स्वीकार नहीं करता। नई दिल्ली का कहना है कि सैन्य कार्रवाई रोकने को लेकर सहमति दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधे स्थापित संपर्क के जरिए बनी थी और इसमें अमेरिका ने मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभाई थी।

ट्रंप के ‘समय पर हस्तक्षेप’ के लिए शरीफ ने जताया आभार

संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान शरीफ ने मई 2025 में चार दिनों तक चले भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव के संदर्भ में ट्रंप की भूमिका की प्रशंसा की।

शरीफ ने इसे ट्रंप का “timely intervention” यानी “समय पर हस्तक्षेप” बताया और कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के नेतृत्व ने स्थिति को बड़े संघर्ष में बदलने से रोकने में भूमिका निभाई।

पाकिस्तान इससे पहले भी अमेरिका और विशेष रूप से ट्रंप को तनाव कम कराने का श्रेय देता रहा है। ट्रंप भी कई मौकों पर भारत-पाकिस्तान टकराव को रुकवाने में अपनी भूमिका का दावा कर चुके हैं।

लेकिन भारत इस घटनाक्रम का अलग विवरण देता है।

भारत ने अमेरिकी मध्यस्थता का दावा किया खारिज

भारत का आधिकारिक रुख है कि सैन्य कार्रवाई रोकने की व्यवस्था भारत और पाकिस्तान के बीच स्थापित सैन्य संचार माध्यमों के जरिए सीधे तय हुई थी।

जून 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई टेलीफोन बातचीत के बाद भारत के विदेश सचिव ने कहा था कि भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए अमेरिकी मध्यस्थता पर कोई चर्चा नहीं हुई थी।

भारत सरकार के आधिकारिक बयान में कहा गया था:

“सैन्य कार्रवाई रोकने पर चर्चा भारत और पाकिस्तान के बीच दोनों सेनाओं के मौजूदा संचार माध्यमों के जरिए सीधे हुई थी।”

भारत ने यह भी कहा कि यह पहल पाकिस्तान की ओर से की गई थी और प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप से स्पष्ट किया था कि भारत तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करता।

इसलिए दोनों पक्षों के बयानों में अंतर स्पष्ट है—पाकिस्तान ट्रंप को तनाव कम कराने का श्रेय देता है, जबकि भारत अमेरिकी मध्यस्थता के दावे को खारिज करता है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान क्या हुआ था?

भारत ने 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी।

इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक सैन्य टकराव चला, जिसके बाद दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई।

भारत का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया गया था। भारत और पाकिस्तान ने सैन्य अभियान के विभिन्न पहलुओं को लेकर अलग-अलग दावे किए हैं।

इसी कारण दोनों देशों की ओर से किए गए विवादित सैन्य दावों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य मानने के बजाय संबंधित पक्ष के दावे के रूप में प्रस्तुत करना जरूरी है।

सिंधु जल को लेकर शरीफ की नई चेतावनी

शरीफ के UNGA भाषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर था।

उन्होंने कहा:

“पानी को कभी हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। नदियों को देशों का पोषण करना चाहिए, उन्हें बांटना नहीं चाहिए।”

इसके बाद शरीफ ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को “रोकने, बाधित करने या मोड़ने” के किसी भी प्रयास को इस्लामाबाद “युद्ध की कार्रवाई” के रूप में देखेगा।

यह पाकिस्तान सरकार का घोषित रुख और चेतावनी है। इसे भारत की ओर से घोषित किसी सैन्य कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

सिंधु जल संधि को लेकर विवाद क्यों है?

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि 1960 में हुई थी। इसे स्थापित करने में विश्व बैंक की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।

अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले के बाद भारत ने इस संधि को स्थगित अवस्था (abeyance) में रखने की घोषणा की। इसके बाद जल बंटवारे का मुद्दा दोनों देशों के बीच तनाव का एक प्रमुख विषय बन गया।

पाकिस्तान का कहना है कि भारत एकतरफा तरीके से संधि को निलंबित नहीं कर सकता और यह समझौता अब भी कानूनी रूप से बाध्यकारी है।

विवाद अब केवल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनी कार्यवाही का भी हिस्सा बन चुका है।

हेग के मध्यस्थता पैनल का फैसला

अगस्त 2026 में विवाद में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया, जब हेग स्थित एक मध्यस्थता अदालत ने कहा कि भारत को सिंधु जल संधि के तहत अपने दायित्वों का पालन जारी रखना चाहिए।

पैनल का निष्कर्ष था कि भारत द्वारा संधि को स्थगित रखने की घोषणा के बावजूद यह लागू है। रैटल जलविद्युत परियोजना से संबंधित कुछ निर्माण गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए, जब तक विश्व बैंक द्वारा नियुक्त तटस्थ विशेषज्ञ इस मामले पर विचार नहीं कर लेता।

पाकिस्तान ने फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे उसका यह रुख मजबूत होता है कि संधि बाध्यकारी बनी हुई है।

हालांकि, भारत ने मध्यस्थता पैनल के अधिकार क्षेत्र और उसके फैसले दोनों को खारिज किया है। नई दिल्ली का कहना है कि वह इस न्यायाधिकरण की वैधता को मान्यता नहीं देती।

यह अंतर महत्वपूर्ण है: मध्यस्थता पैनल का फैसला पाकिस्तान के कानूनी रुख का समर्थन करता है, लेकिन भारत उस पैनल के अधिकार क्षेत्र को ही स्वीकार नहीं करता।

UNGA में कश्मीर का मुद्दा भी उठाया

शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने करीब 23 मिनट के संबोधन में कश्मीर का मुद्दा भी उठाया।

उन्होंने तर्क दिया कि कश्मीर विवाद का समाधान दक्षिण एशिया में भविष्य में 2025 जैसे सैन्य टकराव को रोकने के लिए जरूरी है।

भारत और पाकिस्तान के कश्मीर को लेकर लंबे समय से अलग-अलग रुख रहे हैं। भारत जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों को अपना आंतरिक विषय मानता है और लंबित द्विपक्षीय मुद्दों में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का विरोध करता रहा है।

शहबाज शरीफ के भाषण का क्या महत्व है?

शरीफ के UNGA संबोधन ने मौजूदा भारत-पाकिस्तान संबंधों के तीन बड़े विवादों को एक साथ सामने रखा—मई 2025 का सैन्य टकराव, कश्मीर और सिंधु जल संधि।

2025 के सैन्य टकराव को लेकर पाकिस्तान ट्रंप को तनाव कम कराने का श्रेय दे रहा है, जबकि भारत का कहना है कि सैन्य कार्रवाई रोकने की सहमति दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य संपर्क के जरिए बनी थी।

दूसरी ओर, सिंधु जल संधि विवाद में अब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक मतभेद के साथ कानूनी विवाद भी जुड़ गया है। मध्यस्थता पैनल संधि को लागू मानता है, पाकिस्तान इस फैसले को स्वीकार करता है, जबकि भारत पैनल के अधिकार क्षेत्र को खारिज करता है।

इसलिए इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए पुष्ट घटनाओं, पाकिस्तान के दावों और भारत के आधिकारिक जवाब को अलग-अलग देखना जरूरी है।


स्रोत

प्राथमिक/आधिकारिक स्रोत: शहबाज शरीफ का संयुक्त राष्ट्र महासभा संबोधन, पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के सिंधु जल संधि संबंधी बयान और भारत सरकार का आधिकारिक बयान जिसमें अमेरिकी मध्यस्थता के दावे को खारिज किया गया है।

स्वतंत्र सत्यापन: सिंधु जल संधि पर 2026 के मध्यस्थता फैसले और भारत की प्रतिक्रिया से संबंधित Reuters की रिपोर्टिंग।

अतिरिक्त रिपोर्टिंग: शहबाज शरीफ के 25 सितंबर 2026 के UNGA भाषण पर Hindustan Times और The New Indian Express की रिपोर्टिंग।

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