विज्ञापन - शीर्ष बैनर
Read in English —JantaScope English
राजनीति

Parliament Prorogation में देरी पर Congress का बड़ा आरोप, Delimitation Bill के लिए ‘Two-Third Majority’ जुटाने का दावा

Congress ने Parliament के Monsoon Session को औपचारिक रूप से prorogue करने में कथित देरी पर Centre को निशाने पर लिया है। पार्टी का आरोप है कि सरकार Delimitation से जुड़े विधेयकों के लिए जरूरी संख्या जुटाने की कोशिश कर रही है। Congress महासचिव Jairam Ramesh ने सरकार पर “super-tainted two-third majority” तैयार करने का आरोप लगाया। हालांकि सरकार की ओर से इस आरोप की पुष्टि नहीं हुई है।

Parliament Prorogation में देरी पर Congress का बड़ा आरोप, Delimitation Bill के लिए ‘Two-Third Majority’ जुटाने का दावा
विज्ञापन

द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Janta Scope

संसद के Monsoon Session के दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद भी राजनीतिक टकराव खत्म नहीं हुआ है।

Congress ने शुक्रवार, 11 सितंबर को Centre पर हमला तेज करते हुए सवाल उठाया कि Parliament को अभी तक औपचारिक रूप से prorogue क्यों नहीं किया गया। पार्टी ने इस देरी को Delimitation से जुड़े विधायी एजेंडे से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि सरकार Lok Sabha में आवश्यक समर्थन जुटाने के लिए समय ले रही है।

Congress महासचिव और संचार प्रभारी Jairam Ramesh ने दावा किया कि सरकार एक “super-tainted two-third majority” तैयार करने की कोशिश कर रही है।

यह Congress का राजनीतिक आरोप है। उपलब्ध रिपोर्टिंग में ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह स्थापित हो कि prorogation में देरी का उद्देश्य वास्तव में Delimitation legislation के लिए सांसदों का समर्थन जुटाना ही है।

Jairam Ramesh ने सरकार पर क्या आरोप लगाया?

Congress पिछले कुछ दिनों से Parliament के prorogation में देरी को लेकर लगातार सवाल उठा रही है।

Jairam Ramesh ने पहले भी आरोप लगाया था कि सरकार Monsoon Session को औपचारिक रूप से समाप्त करने के बजाय उसे “ventilator” पर रख रही है।

अब Congress ने इस आरोप को और आगे बढ़ाते हुए इसे Delimitation legislation से जोड़ दिया है।

पार्टी का दावा है कि सरकार Lok Sabha में पर्याप्त संख्या जुटाने की कोशिश कर रही है ताकि Delimitation से जुड़े संवैधानिक और विधायी प्रस्तावों को आगे बढ़ाया जा सके।

हालांकि Centre की ओर से Congress के इस दावे की पुष्टि नहीं की गई है।

Adjournment Sine Die और Prorogation में क्या अंतर है?

इस विवाद को समझने के लिए दोनों संसदीय प्रक्रियाओं का अंतर महत्वपूर्ण है।

जब Lok Sabha या Rajya Sabha को adjourned sine die किया जाता है, तो इसका अर्थ है कि सदन की बैठक को अगली तारीख तय किए बिना समाप्त कर दिया गया है।

इसके विपरीत prorogation किसी संसदीय session की औपचारिक समाप्ति है।

इसलिए सदन की बैठकें खत्म होने और पूरे session के औपचारिक रूप से समाप्त होने के बीच प्रक्रियात्मक अंतर होता है।

Congress का मौजूदा सवाल इसी अंतर पर केंद्रित है।

Delimitation को लेकर इतना बड़ा राजनीतिक विवाद क्यों?

Delimitation का अर्थ population और दूसरे संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर Lok Sabha तथा विधानसभा constituencies की सीमाओं और प्रतिनिधित्व का पुनर्समायोजन है।

यह विषय पहले से राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है, खासकर इस सवाल को लेकर कि भविष्य में राज्यों के बीच Lok Sabha seats का वितरण किस तरह प्रभावित होगा।

दक्षिणी राज्यों के कई राजनीतिक दल पहले आशंका जता चुके हैं कि population-based redistribution से उन राज्यों के relative representation पर असर पड़ सकता है जिन्होंने population control में बेहतर प्रदर्शन किया है।

इसी कारण Delimitation केवल constituency boundaries का technical exercise नहीं रह गया है; यह Centre-State representation और federal balance से जुड़ा बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।

अप्रैल में सरकार को लगा था झटका

मौजूदा विवाद का महत्वपूर्ण संदर्भ अप्रैल 2026 में हुई संसदीय कार्यवाही है।

सरकार ने उस समय Constitution (131st Amendment) Bill, 2026 सहित Delimitation से जुड़े प्रस्ताव Parliament में पेश किए थे।

131st Constitutional Amendment Bill को Lok Sabha में आवश्यक संवैधानिक बहुमत नहीं मिल सका।

Voting में प्रस्ताव को 298 votes पक्ष में और 230 votes विरोध में मिले। लेकिन constitutional amendment के लिए जरूरी two-thirds majority हासिल नहीं हो सकी।

इसके बाद Delimitation से जुड़े associated bills को आगे नहीं बढ़ाया गया।

यही पिछला घटनाक्रम Congress के मौजूदा आरोप का राजनीतिक आधार है।

Congress क्यों कर रही है Two-Third Majority की बात?

संविधान में संशोधन करने वाले विधेयकों के लिए सामान्य legislation की तुलना में अधिक कठोर voting requirement होती है।

ऐसे constitutional amendment को पारित करने के लिए सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों में कम से कम दो-तिहाई समर्थन आवश्यक होता है।

अप्रैल में संबंधित constitutional amendment इसी threshold को हासिल नहीं कर पाया था।

इसलिए Congress अब prorogation में कथित देरी को सरकार की संभावित number-gathering strategy से जोड़ रही है।

लेकिन यह संबंध फिलहाल Congress का दावा है, न कि स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य।

Women's Reservation से भी जुड़ा है Delimitation

Delimitation debate का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू महिलाओं के लिए Lok Sabha और State Assemblies में 33% reservation है।

2023 में पारित 106th Constitutional Amendment, जिसे Nari Shakti Vandan Adhiniyam के नाम से भी जाना जाता है, महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है।

इसके implementation को census के बाद होने वाली delimitation exercise से जोड़ा गया था।

इस कारण delimitation की timing केवल राज्यों की parliamentary representation ही नहीं बल्कि women's reservation लागू होने की समयसीमा के लिए भी महत्वपूर्ण हो गई है।

आरोप और सत्यापित तथ्य को अलग रखना जरूरी

मौजूदा विवाद में दो अलग बातें हैं।

यह तथ्य है कि Congress ने Parliament के prorogation में देरी पर सवाल उठाया है और इसे Delimitation legislation से जोड़ा है।

लेकिन यह Congress का आरोप है कि Centre जानबूझकर session को औपचारिक रूप से समाप्त नहीं कर रहा ताकि Delimitation proposals के लिए पर्याप्त MPs का समर्थन जुटाया जा सके।

जब तक सरकार ऐसा कोई उद्देश्य स्वीकार नहीं करती या इसके समर्थन में स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आते, इस दावे को राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

आगे क्या?

Parliament के prorogation को लेकर उठे सवाल ने Delimitation को एक बार फिर national political debate के केंद्र में ला दिया है।

Congress के हमले से यह भी साफ है कि अगर सरकार भविष्य में Delimitation से जुड़े constitutional या legislative proposals को फिर आगे बढ़ाती है, तो संख्या के साथ-साथ federal representation, census और women's reservation जैसे मुद्दों पर भी तीखी राजनीतिक बहस होने की संभावना है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि Parliament के मौजूदा session को औपचारिक रूप से कब prorogue किया जाता है और सरकार Congress के आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देती है।


साझा करें
विज्ञापन - मध्य लेख
विज्ञापन - नीचे