विवाद के बीच पटना में खड़गे के खिलाफ लिखित शिकायत भी दी गई है। हालांकि, इस घटनाक्रम में शिकायत दिए जाने, प्राथमिकी दर्ज होने और आगे की पुलिस कार्रवाई को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्ट में लिखित शिकायत की जानकारी है। साथ ही, भाषण के दौरान बोलने वाले व्यक्ति की पहचान और उसके कथन को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं, जिससे मामले का संदर्भ और महत्वपूर्ण हो गया है।
पटना के कार्यक्रम में कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह घटना रविवार, 25 अक्टूबर को पटना के बापू सभागार में बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम की है। खड़गे अपने संबोधन में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण, यानी एसआईआर, और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से विपक्षी समर्थकों के नाम हटाए जा रहे हैं। ये कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक आरोप हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
इसी दौरान दर्शकों के बीच से एक व्यक्ति की आवाज आई कि मोदी कहीं नहीं जाएंगे। इसके जवाब में खड़गे ने कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।” इस टिप्पणी के बाद कार्यक्रम में हंगामा हुआ। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बीच में बोलने वाले व्यक्ति के साथ कथित तौर पर धक्कामुक्की हुई और उसे बाहर ले जाया गया। भाषण में उठाए गए चुनावी मुद्दों के साथ यह टिप्पणी भी राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का विषय बन गई।
भाजपा ने माफी की मांग क्यों उठाई?
भाजपा का कहना है कि राजनीतिक विरोध के दौरान प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता का उल्लेख अपमानजनक तरीके से करना स्वीकार्य नहीं है। पार्टी ने अपने विरोध को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाते हुए सभी राज्य मुख्यालयों पर प्रदर्शन की घोषणा की। उसकी मांग है कि कांग्रेस अध्यक्ष बिना शर्त माफी मांगें। भाजपा नेताओं ने इस मामले को सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा और राजनीतिक विरोध की सीमा से जोड़ा है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पहले भी प्रधानमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करती रही है। भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति से इस तरह की भाषा की अपेक्षा नहीं की जाती। कांग्रेस की चुनावी निराशा संबंधी भाजपा नेताओं के दावे भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हैं, स्वतंत्र निष्कर्ष नहीं।
कांग्रेस की सफाई में क्या कहा गया?
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने खड़गे का बचाव करते हुए दावा किया कि कार्यक्रम में पहले उनके प्रति अपमानजनक टिप्पणी की गई थी। खेड़ा के मुताबिक, खड़गे का जवाब प्रधानमंत्री के परिवार के बजाय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उनके वैचारिक आधार के संदर्भ में था। उन्होंने कार्यक्रम में व्यवधान पैदा करने वाले व्यक्ति को भाजपा से संबंधित बताया। हालांकि, उस व्यक्ति के अपने बयान से अलग जानकारी सामने आई है। इसलिए खेड़ा के विवरण को कांग्रेस का पक्ष मानकर पढ़ना जरूरी है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी खड़गे का बचाव किया। उन्होंने टिप्पणी को बोलचाल की अभिव्यक्ति बताते हुए कहा कि इसे अपमान के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। बघेल ने भाजपा और प्रधानमंत्री की पिछली राजनीतिक भाषा पर सवाल उठाकर पलटवार किया। इस तरह कांग्रेस की प्रतिक्रिया में बयान के अर्थ की सफाई और भाजपा पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप, दोनों शामिल रहे।
बीच में बोलने वाले व्यक्ति ने बताई गलतफहमी
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित व्यक्ति ने अपना नाम संतोष कुमार बताया और खुद को कांग्रेस कार्यकर्ता कहा। उसका कहना था कि वह वास्तव में यह कह रहा था कि व्यापक विरोध के बिना मोदी नहीं जाएंगे, लेकिन उसकी बात का केवल एक हिस्सा सुना गया। उसने दावा किया कि इसी अधूरे वाक्य से गलतफहमी पैदा हुई।
यह विवरण कांग्रेस की शुरुआती सफाई से अलग है, जिसमें व्यवधान डालने वाले व्यक्ति को भाजपा समर्थक बताया गया था। इस अंतर को नजरअंदाज करके किसी एक पहचान को अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं होगा। संतोष के बयान और नेताओं की प्रतिक्रियाओं को अलग-अलग दर्ज करना जरूरी है। किसी व्यक्ति के कथन की व्याख्या और उसकी राजनीतिक संबद्धता, दोनों की पुष्टि अलग प्रश्न हैं।
शिकायत और प्रदर्शन के बीच आगे क्या?
आजतक के अनुसार, भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य कृष्णा सिंह कल्लू ने पटना के कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दी है। उसमें प्रधानमंत्री और उनके पिता के लिए अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। फिलहाल सुबह तक उपलब्ध रिपोर्टों में भाजपा के देशव्यापी प्रदर्शन के आह्वान, माफी की मांग और कांग्रेस के बचाव की पुष्टि होती है। प्रदर्शनों के वास्तविक विस्तार तथा शिकायत पर अगली कार्रवाई की स्थिति बाद के पुष्ट अपडेट से ही स्पष्ट होगी।
