पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री व्यापार पर बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ नई दिल्ली में महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता की।
11 सितंबर को BRICS Summit से जुड़ी बैठकों के दौरान हुई बातचीत में दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंधों के साथ पश्चिम एशिया की बदलती स्थिति पर विचार साझा किए। मोदी ने भारत की उस पुरानी नीति को दोहराया जिसके तहत नई दिल्ली संघर्षों को बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए हल करने की वकालत करती रही है।
पश्चिम एशिया की स्थिति पर हुई चर्चा
बैठक ऐसे समय हुई जब पश्चिम एशिया में संघर्ष और अमेरिका-ईरान तनाव ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा की हैं।
Reuters के अनुसार, मोदी ने वैश्विक संघर्षों को dialogue and diplomacy के जरिए हल करने के भारत के रुख को दोहराया। बातचीत में शांति और स्थिरता के साथ समुद्री आवाजाही की सुरक्षा भी प्रमुख मुद्दा रही।
दोनों नेताओं ने क्षेत्र में चल रहे घटनाक्रम पर अपने विचार साझा किए और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की।
समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा पर मोदी का जोर
बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा समुद्री सुरक्षा से जुड़ा रहा।
मोदी ने freedom of navigation, समुद्री व्यापार की सुरक्षा और seafarers की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारत के लिए यह मुद्दा केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक और मानवीय महत्व भी रखता है। हाल के समुद्री हमलों में भारतीय नागरिकों की मौत ने shipping routes पर सुरक्षा को नई दिल्ली के लिए और महत्वपूर्ण बना दिया है। Reuters के अनुसार, हालिया maritime attacks में 10 भारतीय नागरिकों की जान गई है।
वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से गुजरता है। पश्चिम एशिया से जुड़े shipping corridors में अस्थिरता ऊर्जा आपूर्ति, freight costs और international commerce पर व्यापक असर डाल सकती है।
दो सप्ताह से भी कम समय में दूसरी मुलाकात
मोदी और पेजेशकियन की यह कम समय के भीतर दूसरी मुलाकात थी।
दोनों नेताओं ने इससे पहले 31 अगस्त 2026 को Bishkek में Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit के दौरान बातचीत की थी।
उस बैठक में भी मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए बातचीत और कूटनीति से समाधान की आवश्यकता बताई थी। दोनों नेताओं ने भारत-ईरान के लंबे संबंधों को मजबूत करने और व्यापार को विस्तार देने पर भी चर्चा की थी।
नई दिल्ली में हुई ताजा मुलाकात इसलिए उस कूटनीतिक बातचीत की निरंतरता भी है।
Pezeshkian की राष्ट्रपति के रूप में पहली भारत यात्रा
AP के मुताबिक, यह मसूद पेजेशकियन की ईरान के राष्ट्रपति के रूप में पहली भारत यात्रा है। वह भारत की मेजबानी में आयोजित BRICS Summit में हिस्सा लेने नई दिल्ली पहुंचे हैं।
भारत और ईरान के संबंध लंबे समय से ऊर्जा, connectivity, trade और regional security जैसे मुद्दों से जुड़े रहे हैं।
अमेरिकी प्रतिबंधों और पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने आर्थिक संबंधों को प्रभावित किया है, लेकिन नई दिल्ली और तेहरान ने राजनीतिक संपर्क बनाए रखा है।
भारत के लिए Iran क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत-ईरान संबंधों में रणनीतिक connectivity एक महत्वपूर्ण पहलू है।
ईरान की भौगोलिक स्थिति भारत को मध्य एशिया और उससे आगे के बाजारों से जोड़ने की क्षमता रखती है। दोनों देशों के संबंधों में Chabahar Port भी लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है।
इसके साथ ही पश्चिम एशिया में भारत के व्यापक हित भी हैं। नई दिल्ली के ईरान के साथ संबंध हैं, जबकि वह Israel और Gulf Arab देशों के साथ भी महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी बनाए हुए है।
इसी वजह से क्षेत्रीय संघर्षों के दौरान भारत आम तौर पर ऐसा कूटनीतिक रास्ता अपनाने की कोशिश करता है जिसमें अपने अलग-अलग साझेदारों के साथ संपर्क बनाए रखते हुए तनाव कम करने की अपील की जा सके।
BRICS Summit के बीच अहम कूटनीतिक बैठक
नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit इस बार ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है।
BRICS अब 11 देशों का समूह है और इसके सदस्य मिलकर दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। भारत 2026 में समूह की अध्यक्षता कर रहा है।
इस मंच पर आर्थिक सहयोग के अलावा international trade, regional conflicts, energy security और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे विषय भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
ईरानी राष्ट्रपति ने BRICS के संदर्भ में यह भी कहा कि आर्थिक दबावों को legitimate trade में बाधा नहीं बनना चाहिए।
Dialogue and Diplomacy पर भारत का लगातार जोर
मोदी-पेजेशकियन वार्ता को भारत की व्यापक diplomatic positioning के संदर्भ में देखना महत्वपूर्ण है।
नई दिल्ली ने हाल के विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर बार-बार बातचीत और कूटनीति को समाधान का रास्ता बताया है। ईरानी राष्ट्रपति के साथ बैठक में भी यही संदेश दोहराया गया।
लेकिन इस बैठक को किसी औपचारिक peace initiative या mediation की शुरुआत कहना फिलहाल सही नहीं होगा। उपलब्ध आधिकारिक और विश्वसनीय रिपोर्टें इसे मुख्य रूप से द्विपक्षीय वार्ता के रूप में प्रस्तुत करती हैं जिसमें पश्चिम एशिया की स्थिति, समुद्री सुरक्षा, भारत-ईरान संबंध और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा हुई।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण संकेत यह है कि बढ़ते तनाव के बीच भारत कूटनीतिक संपर्क जारी रखने, सुरक्षित समुद्री व्यापार सुनिश्चित करने और संघर्षों को बातचीत के जरिए हल करने की अपनी नीति पर कायम है।
