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राजनीति

राहुल गांधी के ‘मनुस्मृति’ बयान पर भड़के CM योगी, महिला अधिकारों से भारतीय संस्कृति तक छिड़ी सियासी जंग

राहुल गांधी की मनुस्मृति, पितृसत्ता और महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर की गई टिप्पणी पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीखा पलटवार किया है। जानिए विवाद की शुरुआत कैसे हुई, दोनों नेताओं ने क्या पक्ष रखा और इसके पीछे की बड़ी राजनीतिक बहस क्या है।

राहुल गांधी के ‘मनुस्मृति’ बयान पर भड़के CM योगी, महिला अधिकारों से भारतीय संस्कृति तक छिड़ी सियासी जंग
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: The Economic Times

नई दिल्ली/लखनऊ, 26 अगस्त 2026: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मनुस्मृति और महिलाओं की स्थिति को लेकर की गई टिप्पणियों ने एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन पर भारत की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही यह विवाद महिला अधिकारों, पितृसत्ता, धर्मग्रंथों की व्याख्या और भारतीय संस्कृति को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच बड़े वैचारिक टकराव में बदल गया है।

क्या कहा राहुल गांधी ने?

हालिया विवाद की शुरुआत पुणे में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में राहुल गांधी की टिप्पणियों से हुई। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने महिलाओं की स्वतंत्रता और समाज में मौजूद पितृसत्तात्मक सोच पर बात की।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि महिलाओं को नियंत्रित करने और उन्हें स्वतंत्र व्यक्ति के बजाय पारंपरिक भूमिकाओं तक सीमित रखने वाली सोच की ऐतिहासिक जड़ें मनुस्मृति जैसी व्यवस्थाओं में देखी जा सकती हैं। उन्होंने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा को भी इस बहस से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि उनकी राजनीति महिलाओं को सामाजिक बंधनों में रखने वाली सोच को बढ़ावा देती है।

उनकी टिप्पणी का व्यापक संदेश महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और समानता पर केंद्रित था, लेकिन मनुस्मृति का संदर्भ आते ही मामला राजनीतिक और सांस्कृतिक विवाद में बदल गया।

योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी पर किया पलटवार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी की टिप्पणी पर कड़ा जवाब दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता भारतीय परंपराओं और विरासत को लगातार नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करते हैं।

योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी की मनुस्मृति संबंधी समझ पर भी सवाल उठाया और कहा कि किसी ऐतिहासिक या सांस्कृतिक विषय पर टिप्पणी करने से पहले उसका अध्ययन किया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि भारतीय समाज, संस्कृति और पारिवारिक व्यवस्था को केवल एक राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता।

योगी ने राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष के पद का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इतनी महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारी संभालने वाले नेता से अधिक जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा होती है। उन्होंने कांग्रेस पर भारतीय परंपराओं और विरासत को निशाना बनाने का आरोप भी लगाया।

महिला अधिकार बनाम सांस्कृतिक विरासत की बहस

इस विवाद में दोनों पक्ष अलग-अलग राजनीतिक और वैचारिक आधार पर अपनी बात रख रहे हैं।

राहुल गांधी का पक्ष महिलाओं की समानता, स्वतंत्रता और पितृसत्तात्मक सामाजिक ढांचे की आलोचना पर आधारित है। उनकी टिप्पणी का राजनीतिक निशाना भाजपा और RSS की विचारधारा है।

दूसरी ओर, योगी आदित्यनाथ इस मुद्दे को भारतीय सांस्कृतिक विरासत के सम्मान से जोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि ऐतिहासिक ग्रंथों या परंपराओं को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत करना उचित नहीं है।

इसी कारण यह विवाद केवल दो नेताओं के बीच बयानबाजी तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में यह बड़ा सवाल है कि आधुनिक भारत में प्राचीन सामाजिक और धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या कैसे की जाए और समानता तथा संवैधानिक मूल्यों की बहस में उनका स्थान क्या हो।

मनुस्मृति पर राजनीति क्यों संवेदनशील है?

मनुस्मृति लंबे समय से भारत में सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय रही है। इसकी व्याख्या को लेकर अलग-अलग विचार मौजूद हैं और जाति तथा महिलाओं से जुड़े इसके कुछ प्रावधानों की आलोचना भी ऐतिहासिक रूप से होती रही है।

यही वजह है कि जब कोई प्रमुख राजनीतिक नेता इस ग्रंथ का उल्लेख करता है, तो चर्चा केवल इतिहास तक सीमित नहीं रहती। यह जातीय समानता, महिला अधिकारों, हिंदू परंपरा, सामाजिक सुधार और संविधान जैसे विषयों तक पहुंच जाती है।

मौजूदा विवाद में भी यही देखने को मिल रहा है—कांग्रेस इसे सामाजिक समानता और महिला स्वतंत्रता के विमर्श से जोड़ रही है, जबकि भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया इसे भारतीय संस्कृति और विरासत के प्रति कांग्रेस के रवैये से जोड़ती है।

राहुल बनाम योगी की बहस का राजनीतिक महत्व

राहुल गांधी और योगी आदित्यनाथ दोनों राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख चेहरे हैं। ऐसे में उनके बीच यह वैचारिक टकराव आने वाले राजनीतिक अभियानों में भी दिखाई दे सकता है।

कांग्रेस हाल के वर्षों में सामाजिक न्याय, जातिगत प्रतिनिधित्व, संविधान की रक्षा और महिला अधिकारों जैसे विषयों को प्रमुखता देती रही है। वहीं भाजपा सांस्कृतिक पहचान, राष्ट्रवाद, विकास और भारतीय विरासत से जुड़े मुद्दों को अपनी राजनीतिक रणनीति में महत्वपूर्ण स्थान देती है।

मनुस्मृति विवाद इन दोनों राजनीतिक धाराओं को एक ही मुद्दे पर आमने-सामने ले आया है।

संतुलित विश्लेषण: विवाद का असली मुद्दा क्या है?

इस पूरे विवाद को केवल राहुल गांधी और योगी आदित्यनाथ के बीच व्यक्तिगत राजनीतिक संघर्ष के रूप में देखना अधूरा होगा।

राहुल गांधी की टिप्पणी एक महत्वपूर्ण सामाजिक प्रश्न उठाती है—क्या ऐतिहासिक रूप से चली आ रही व्यवस्थाओं और विचारों का आधुनिक समानता तथा महिला अधिकारों के संदर्भ में पुनर्मूल्यांकन होना चाहिए?

वहीं योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया दूसरा सवाल सामने रखती है—क्या प्राचीन ग्रंथों और भारतीय परंपराओं को वर्तमान राजनीतिक बहस में प्रस्तुत करते समय उनके ऐतिहासिक संदर्भ और विभिन्न व्याख्याओं को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है?

लोकतांत्रिक व्यवस्था में दोनों प्रश्नों पर चर्चा संभव है। चुनौती तब पैदा होती है जब जटिल ऐतिहासिक और सामाजिक विषय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित हो जाते हैं।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि मनुस्मृति पर राहुल गांधी की टिप्पणी ने भाजपा और कांग्रेस के बीच महिला अधिकार बनाम सांस्कृतिक विरासत की बहस को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श में ला दिया है।

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