आखिर क्या था पूरा मामला ?
विपक्षीय नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बारे मे बात करते हुए उनपे एक कथित आरोप लगाया कि , उनके द्वारा वोट पंजीकरण फॉर्म नंबर 6 मे कथित बदलाव किए गए है।अवैध रूप से अपने मुताबिक फॉर्म मे संशोधन किया गया है । लेकिन सबसे पहले तो चुनाव आयोग ने इस बात को बेबुनियादी बताया और खारिज किया, जिसके बाद सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने फॉर्म 6 के बारे मे बात करते हुए उसपे लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए एक तर्क मे जवाब दिया, "सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 मे किए गए किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है।" मुख्य चुनाव आयुकत ज्ञानेशकुमार के खिलाफ दर्ज केस को देखते हुए 3 मुख्य न्यायधीशों वाली पीठ ने कहा की , सुप्रीम कोर्ट इस बात की तहकीकात करेगा की चुनाव आयोग से रिपोर्ट मिलने के बाद फ़ॉर्म से किसने छेड़छाड़ की है, उन्होंने कहा कि , इस याचिका मे अहम रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेशकुमार पर गलत आरोप लगाया गया है। जिसका उनके आधिकारिक काम से कोई उचित संबंध या कानूनी जुड़ाव नहीं है। । उन्होंने आगे कहा कि , इस तरह का काम करना एक आधिकारिक प्रतिरक्षा के दायरे से पूरी तरह बाहर है और यह एक अपराध है।
फ़ॉर्म 6 क्या है?
फॉर्म 6 एक ऐसा फॉर्म है जिसका इस्तेमाल लोग वोटर लिस्ट मे नाम चढ़वाने के लिये करते है । इसके तहत आपको भारत देश का नागरिक होने के नाते भारत देश मे वोट देने की मंजूरी दी जाती है। खास तौर पर अगर आप पहली बार वोट पंजीकरण कर रहे है तो इस फ़ॉर्म का इस्तेमाल अनिवार्य है। इसी फॉर्म मे किए गए कथित बदलाव का आरोप राहुल गांधी ज्ञानेशकुमार के सिर मंढ़ रहे है, इस बात मे कितनी सच्चाई है सुप्रीम कोर्ट इसका पता लगा रही है। लेकिन फिलहाल के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 5 ऑक्टोबर को इस मामले मे लगाए गए सारे आरोपों को गलत ठहरा दिया है और कहा यह सब बेबुनियादी आरोप है, लेकिन इसके लिए कदम बढ़ाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पुराने फॉर्म को नए बदले हुए फॉर्म से मेच किया है और अब मामले की जांच को आगे बढ़ाया है।
फॉर्म 6 मे किए गए बदलाव पर कानूनी सवाल उठने का कारण! आखिर किसने किया यह बदलाव?
फॉर्म 6 रेजिस्ट्रैशन ऑफ एलेकटोरस रूल, 1960 के तहत लागू किया गया है, इंडियन एक्स्प्रेस के रिपोर्ट के मुताबिक , Representation of the people act, 1950 के सेक्शन 28 के तहत electoral पंजीकण से जुड़े नियम बनाने के अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है , और नियमों मे तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 मे अनलाइन फॉर्म 6 मे दिखाई देने वाले अतरिक्त विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) declaration को लेके यह सवाल उठा की क्या यह नियम ऐसे ही तहकीकात के बिना जोड़ा जा सकता है। इसमे आवेदन करने वालों से पूछा गया की क्या उसका नाम उसके माता पिता और दादी का नाम पहले वाली SIR मे था? रिपोर्ट के मुताबिक जवाब देना जरूरी था भले ही इसे अन्नावश्यक बताया गया था। और बस यही से यह सवाल शुरू हुआ की फॉर्म 6 मे बदलाव किए गए है। अगर फॉर्म को बदलने की बात की जाए तो इसका अधिकार 2 इलेक्शन कमिशन के पास है, विवेक जोशी और सुखबीर सिंह सिंधु ने बताया कि , रेजिस्ट्रैशन ऑफ एलेकटोरस रूल, 1960 को बदले बिना statutory फॉर्म 6 को बदलना संभव नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात की पुष्टि की की कोर्ट ने फॉर्म मे किसी भी तरह के बदलाव की मंजूरी नहीं दी है साथ ही इलेक्शन कमिशन ऑफ इंडिया के रेकॉर्ड्स मांगते हुए यह जानना चाहा है कि ,आखिर फॉर्म मे बदलाव किसने किया और किस authority के तरह किया गया है।
इसी के बाद राहुल गांधी ने अपना मत रखते हुए कहा कि , यह बात साबित करती है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेशकुमार ने अपने पद का फायदा उठाते हुए पंजीकरण फॉर्म 6 को गैरकानूनी ढंग से बदला है, और इससे भाजपा को फायदा पहुचाने के लिए अपने पद का दूरउपयोग किया है।
इसके जवाब मे भाजपा का कहना है कि , सुप्रीम कोर्ट की तरफ से चुनाव आयोग और सेंट्रल government को notice जारी किया जाना चाहिए यह लोकतंत्र की real functioning है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसपे कथित तौर पर जांच करने का फैसला किया है।
वही सत्ताधारी पार्टी का कहना है कि , चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 मे एक नया वेरीफिकेशन जोड़ा है, जिसमे वोटर लिस्ट के SIR के संबंध मे वोटर के माता-पिता के बारे मे जानकारी मांगी गई है, हालांकि रियल फॉर्म मे स्वयं कोई बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन राहुल गांधी का अब भी यही कहना है की यह एक सोची समझी चाल है , जिससे ज्ञानेशकुमार ने भाजपा के मदत करने के लिए अपने पद का दूरउपयोग किया है।
