हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी दमदार एक्टिंग के लिए जाने जाने वाले एक्टर नाना पाटेकर का सार्वजनिक जीवन राजनीति से भी करीब से जुड़ा रहा हैं। वो अलग-अलग पार्टी के नेताओं के संपर्क में रहे हैं जिनसे उनके अच्छे व्यवहार रहे थे। लेकिन नाना पाटेकर ने किसी एक पॉलिटिकल पार्टी के साथ अपनी पहचान सीमित नहीं रखी। महाराष्ट्र की राजनीति में होने वाले उतार-चढ़ाव से लेकर भ्रष्टाचार और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी पर, अभिनेता नाना पाटेकर हमेशा अपनी बेबाक राय रखते नजर आए हैं। ऐसे ही नाना पाटेकर के राजनीतिक जीवन से जुड़ा एक बेबाक किस्सा अक्टूबर 2022 में सामने आया था।
क्या हुआ था 2022 में? जब नाना पाटेकर ने उस समय के तत्कालीन मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से बेबाकी से पूछे सवाल?
October 2022 में आयोजित एक समारोह के दौरान अभिनेता नाना पाटेकर ने तब के तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से महाराष्ट्र की राजनीति और भ्रष्टाचार पर सरकार की जवाबदेही से जुड़े सवाल पूछे थे। उस कार्यक्रम मे उन्होंने जनप्रतिनिधियों की कुल संपत्ति और करप्शन से जुड़े सवालों का मुद्दा उठाया था। जो उस समय की हेडलाइन बना था। नाना पाटेकर ने उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री से सवाल किया था कि, जब आम आदमी को अपने करों और आर्थिक गतिविधियों के लिए जांच का सामना करना पड़ता है, तो करप्शन के आरोपों का सामना करने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाती है? क्यों हर बार आम जनता ही टारगेट बने?
इस संवाद पर चर्चा इसलिए भी हुई क्योंकि, उन्होंने इससे भी तीखा सवाल पूछा और कहा कि, राजनीतिक दल आपराधिक मामले में फंसे लोगों को चुनावी उम्मीदवार क्यों बनाते हैं? तब के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि, “यही लोग चुनाव जीतते हैं”। वहीं नाना पाटेकर ने कहा कि अगर मैं अच्छे बेदाग चरित्र वाला उम्मीदवार लाकर खड़ा कर दूं, तो उसकी जमानत जब्त हो जाती है, इसे सिर्फ राजनेता नहीं बदल सकते हैं, समाज को बदलना होगा।
वहीं नाना पाटेकर ने आज की राजनीति में अपमानजनक भाषा और गालियों के लगातार उपयोग पर भी टिप्पणी की थी, उन्होंने कहा कि मैं जिन शब्दों का उपयोग करता हूं, वे मेरी संस्कृति और मेरे पालन-पोषण को दर्शाते हैं, अगर सीमाएं न तय की जाएं तो, हम अपने बच्चों के सामने कैसा उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।
इसके जवाब में शिंदे साहब ने कहा कि, वे किसी को अपमानित नहीं करते हैं, गाली नहीं देते हैं, उन्होंने कहा कि मुझे अपनी लिमिटेशंस पता हैं, मैं सीमाओं को पार करके बात नहीं करता हूं।
2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में क्या बदला?
October 2022 में नाना पाटेकर के इन सवालों के पीछे के राज जानने के लिए हमें साल 2022 के महाराष्ट्र की राजनीति में होने वाली घटनाओं को समझना बहुत जरूरी है। June 2022 में एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के कई विधायकों के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी, जिसके बाद महाविकास अघाड़ी सरकार परेशानी में आ गई थी।
वहीं 29 June 2022 को उद्धव ठाकरे जी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से इस्तीफा दे दिया था। अगले दिन 30 June को एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री और देवेंद्र फडणवीस ने उपमुख्यमंत्री की शपथ ली थी। इस तरह महाराष्ट्र में भाजपा और शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना के गुट की सरकार बनी थी।
इस राजनीतिक घटनाक्रम ने शिवसेना पार्टी के अंदर गहरे बंटवारे को जन्म दिया। पार्टी का उद्देश्य, चुनाव चिह्न और राजनीतिक विरासत को लेकर दोनों पार्टी के बीच काफी विवाद भी सामने आए थे। महाराष्ट्र की राजनीति में हो रहे इसी उतार-चढ़ाव के कारण नाना पाटेकर का October 2022 का बयान चर्चा में आया था। नाना पाटेकर के सभी दल के नेताओं के साथ अच्छे संबंध थे, लेकिन अपनी बात कहने को लेकर वो काफी स्वतंत्र महसूस करते थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नाना पाटेकर के संबंध शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के साथ महाराष्ट्र के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ रहे हैं। वे नेताओं के साथ व्यक्तिगत संबंध बनाने के साथ उनके राजनीतिक बयानों पर टिप्पणी देने या असहमति जताने से पीछे नहीं हटते थे।
Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, शिवसेना के नेता “संजय राउत” ने बाल ठाकरे और नाना पाटेकर के बीच एक पुराने किस्से का जिक्र किया, संजय राउत के मुताबिक किसी एक बयान को लेकर दोनों के बीच नाराजगी हुई थी, लेकिन नाना पाटेकर ने बाद में बाल ठाकरे साहब से मिलकर अपनी बात को स्पष्ट किया था।
नाना पाटेकर ने कभी राजनीति में प्रवेश क्यों नहीं किया?
NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने 2015 में फिल्म ‘चप्पन’ के दौरान राजनीति में प्रवेश करने की उनकी अनिच्छा को जाहिर करते हुए कहा था कि, उनका मानना है कि, किसी राजनीतिक दल में शामिल होने के बाद व्यक्ति की स्वतंत्रता कई बार चली जाती है। पार्टी के दबाव और अनुशासन के भीतर रहकर काम करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि वो अभिनेता होने के नाते किसी भी राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे पर टिप्पणी दे सकते हैं। उनके इस बयान का साफ मतलब है कि, वो सार्वजनिक मुद्दों पर बेबाकी से बोलना पसंद करते हैं, लेकिन सार्वजनिक मुद्दों पर बोलना और चुनावी राजनीति का हिस्सा बनना उनके लिए दोनों ही अलग चीजें हैं।
