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राजनीति

Rajasthan Civic Polls: वोटिंग से पहले BJP के खाते में 44 सीटें, 77 उम्मीदवार निर्विरोध जीते

राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों में मतदान से पहले 77 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। भाजपा ने इनमें 44 सीटें हासिल की हैं, जबकि कांग्रेस के 16 और 17 निर्दलीय उम्मीदवार बिना मुकाबले जीत गए। 37 महिलाएं भी निर्विरोध विजेताओं में शामिल हैं। अब बाकी 232 सीटों पर 9 और 11 सितंबर को मतदान होगा।

Rajasthan Civic Polls: वोटिंग से पहले BJP के खाते में 44 सीटें, 77 उम्मीदवार निर्विरोध जीते
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Janta Scope

राजस्थान निकाय चुनाव में मतदान से पहले 77 सीटों का फैसला, BJP को 44 और कांग्रेस को 16 सीटें

राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों में वोटिंग शुरू होने से पहले ही 77 वार्डों के नतीजे तय हो गए हैं। इन सीटों पर केवल एक-एक उम्मीदवार मैदान में रहने के कारण उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया है।

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी इस शुरुआती तस्वीर में सबसे आगे है। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, 77 निर्विरोध विजेताओं में भाजपा के 44 उम्मीदवार हैं। कांग्रेस के 16 उम्मीदवार बिना मुकाबले जीते हैं, जबकि 17 सीटें निर्दलीय प्रत्याशियों के खाते में गई हैं।

इन नतीजों की एक और महत्वपूर्ण तस्वीर महिला प्रतिनिधित्व की है। कुल 77 निर्विरोध विजेताओं में 37 महिलाएं हैं।

हालांकि इन आंकड़ों को पूरे राजस्थान निकाय चुनाव का जनादेश नहीं माना जा सकता। ये केवल उन वार्डों के परिणाम हैं जहां मतदान की जरूरत नहीं पड़ी। चुनाव की असली प्रतिस्पर्धा बाकी 232 सीटों पर होगी।

77 सीटों में BJP की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा

निर्विरोध घोषित सीटों में भाजपा की संख्या स्पष्ट रूप से सबसे अधिक है।

पार्टी ने 44 सीटें हासिल की हैं, जो कुल 77 निर्विरोध सीटों का करीब 56.4% है।

कांग्रेस के खाते में 16 सीटें आई हैं, यानी लगभग 20.5%। वहीं 17 निर्दलीय उम्मीदवारों की हिस्सेदारी करीब 23.1% है।

पार्टीवार तस्वीर इस प्रकार है:

  • BJP — 44 सीटें

  • Congress — 16 सीटें

  • निर्दलीय — 17 सीटें

  • कुल — 77 सीटें

भाजपा के लिए यह चुनावी मुकाबले से पहले संख्या के लिहाज से बढ़त है, लेकिन इसे बाकी सीटों पर मतदाताओं के रुझान का सीधा संकेत मानना जल्दबाजी होगी। निर्विरोध जीत कई बार स्थानीय राजनीतिक समीकरण, उम्मीदवारों की वापसी और किसी वार्ड में प्रभावी मुकाबला न बचने का परिणाम होती है।

77 विजेताओं में 37 महिलाएं

निर्विरोध परिणामों में महिला उम्मीदवारों की मौजूदगी उल्लेखनीय है।

77 विजेताओं में 37 महिलाएं हैं, यानी लगभग आधे निर्विरोध पार्षद महिला उम्मीदवार हैं।

युवा उम्मीदवार भी इस सूची में शामिल हैं।

सीकर जिले की रामगढ़ शेखावाटी नगर पालिका से कांग्रेस की सोफिया, 22, सबसे कम उम्र की निर्विरोध विजेताओं में हैं।

नागौर जिले की बसानी नगर पालिका से कांग्रेस की मोना बानो, 23, और डीग जिले की पहाड़ी नगर पालिका से भाजपा की पिंकी कुमारी, 24, भी कम उम्र में निर्विरोध निर्वाचित होने वाली उम्मीदवारों में शामिल हैं।

इन आंकड़ों से स्थानीय निकाय स्तर पर महिला और युवा प्रतिनिधित्व की एक महत्वपूर्ण तस्वीर सामने आती है, हालांकि इसका व्यापक आकलन बाकी सीटों के नतीजे आने के बाद ही किया जा सकेगा।

डीग में सबसे ज्यादा 10 उम्मीदवार निर्विरोध

जिलावार आंकड़ों में डीग सबसे आगे है।

यहां 10 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। दिलचस्प रूप से इनमें सात निर्दलीय हैं।

इसके बाद चित्तौड़गढ़ में छह और सीकर में पांच उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं।

अलवर, झुंझुनू, जोधपुर और खैरथल-तिजारा में चार-चार उम्मीदवार बिना मुकाबले जीते हैं। भरतपुर, बीकानेर, जयपुर ग्रामीण, धौलपुर और जालौर में तीन-तीन उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।

चित्तौड़गढ़ का परिणाम भाजपा के लिए खास है। यहां निर्विरोध तय हुई सभी छह सीटें पार्टी के उम्मीदवारों के खाते में गई हैं।

जोधपुर जिले की बिलाड़ा नगर पालिका में भी भाजपा के चार उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।

जयपुर के 150 वार्डों में कोई निर्विरोध जीत नहीं

राज्य के बाकी हिस्सों के मुकाबले राजधानी जयपुर की तस्वीर अलग है।

जयपुर के 150 वार्डों में एक भी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित नहीं हुआ है।

इसका मतलब है कि राजधानी के सभी वार्डों में चुनावी मुकाबला बना हुआ है और वहां मतदाताओं को अपना प्रतिनिधि चुनने के लिए मतदान करना होगा।

यह अंतर भी बताता है कि राज्यभर के 77 निर्विरोध नतीजों को एक समान राजनीतिक परिस्थिति का परिणाम नहीं माना जा सकता। स्थानीय उम्मीदवार, सामाजिक समीकरण और संगठनात्मक ताकत हर नगर निकाय में अलग भूमिका निभा सकते हैं।

कांग्रेस के 16 उम्मीदवार बिना मुकाबले जीते

भाजपा की 44 सीटों के मुकाबले कांग्रेस के 16 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं।

कांग्रेस को बूंदी, दौसा, धौलपुर, श्रीगंगानगर, जैसलमेर, झालावाड़, झुंझुनू और कोटा समेत अलग-अलग क्षेत्रों में निर्विरोध सफलता मिली है।

संख्या के लिहाज से कांग्रेस भाजपा से काफी पीछे है, लेकिन पार्टी के लिए बड़ी परीक्षा बाकी 232 सीटों पर होने वाली सीधी चुनावी लड़ाई होगी।

इसी तरह 17 निर्दलीय उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत स्थानीय निकाय चुनावों में गैर-दलीय और स्थानीय प्रभाव वाले उम्मीदवारों की भूमिका को भी रेखांकित करती है।

क्या 44 निर्विरोध सीटें BJP की बड़ी चुनावी बढ़त हैं?

राजनीतिक तौर पर भाजपा के लिए 44 निर्विरोध जीत सकारात्मक शुरुआत है। पार्टी को इन वार्डों में मतदान और अंतिम चुनावी मुकाबले का सामना किए बिना सीटें मिल गई हैं।

लेकिन इस आंकड़े को पूरे राज्य में भाजपा की चुनावी बढ़त या संभावित अंतिम परिणाम का प्रमाण मानना सही नहीं होगा।

कारण यह है कि निर्विरोध निर्वाचन और मतदान के जरिए मिली जीत दो अलग परिस्थितियां हैं।

किसी उम्मीदवार के निर्विरोध जीतने का मतलब है कि अंतिम रूप से उसके खिलाफ कोई दूसरा प्रत्याशी मैदान में नहीं रहा। यह स्थिति नामांकन रद्द होने, उम्मीदवारों के नाम वापस लेने या दूसरे स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के कारण बन सकती है।

बाकी 232 सीटों पर मतदाता सीधे उम्मीदवारों के बीच फैसला करेंगे। इसलिए चुनाव का व्यापक राजनीतिक संदेश उन नतीजों के बाद अधिक स्पष्ट होगा।

अब 232 सीटों पर मतदान

निर्विरोध घोषित 77 सीटों के बाद अब ध्यान बाकी 232 सीटों पर है।

इन सीटों के लिए मतदान दो चरणों में 9 सितंबर और 11 सितंबर को होना है।

मतगणना 14 सितंबर को निर्धारित है।

इन नतीजों के बाद ही यह साफ होगा कि भाजपा की शुरुआती निर्विरोध बढ़त मतदान वाली सीटों पर भी कायम रहती है या कांग्रेस, निर्दलीय और दूसरे उम्मीदवार तस्वीर बदलते हैं।

फिलहाल इतना निश्चित है कि मतदान शुरू होने से पहले ही राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव में 77 पार्षद तय हो चुके हैं—और उनमें से आधे से अधिक सीटें भाजपा के खाते में गई हैं।

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