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राजनीति

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का कांग्रेस पर तेज हमला: एंटी सीईसी प्रदर्शन सत्ता हथियाने की साजिश, बांग्लादेश जैसा रिजीम चेंज चाहती है विपक्ष।

देश की राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ शुरू हुई लड़ाई अब मतदाता सूची तक सीमित नहीं है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कांग्रेस और इंडिया गठबंधन पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है। उन्होंने सीईसी के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन को “अराजकता फैलाकर सत्ता हथियाने की साजिश” कहा।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का कांग्रेस पर तेज हमला: एंटी सीईसी प्रदर्शन सत्ता हथियाने की साजिश, बांग्लादेश जैसा रिजीम चेंज चाहती है विपक्ष।
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: hindustan times, indian express, ndtv, the times of india

लखनऊ में हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि, विपक्ष देश के युवाओं को अराजकता की राजनीति का मोहरा बना रहा है, और बांग्लादेश के मॉडल पर भारत में रिजीम चेंज लाना चाहता है। राजनाथ सिंह का बयान आज उस समय आया जब दिल्ली में सीईसी के खिलाफ सीजेपी तिरंगा मार्च कर रही है।

क्या था रक्षामंत्री का पूरा बयान?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजनाथ सिंह ने दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से चल रहे प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि, दिल्ली में पिछले कुछ दिनों में जो भी घटनाएं हुई हैं, वो देश की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े करती हैं, ऐसा लगता है कि कांग्रेस और उसके राजनीतिक सहयोगी, प्रत्यक्ष रूप से और अपने सहयोगी संगठनों के माध्यम से, युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों और राष्ट्र निर्माण में नहीं बल्कि राजनीतिक टकराव और अराजकता फैलाने के साधन में बदल रहे हैं। रक्षामंत्री ने अपने बयान में आगे कहा कि, देश के युवाओं को अराजकता की राजनीति में मोहरा बनाने की कोशिश हो रही है, कुछ लोग बांग्लादेश की घटनाओं के मॉडल पर रिजीम चेंज चाहते हैं। और इसे खुले तौर पर स्वीकार करते हैं।

उन्होंने बांग्लादेश से प्रेरणा ली है और दूसरे बेबाकी से सरकार गिराने की बात करते हैं। इन बातों से यह साफ है कि उनका एकमात्र एजेंडा “लोकतांत्रिक संस्थानों को ध्वस्त करना और देश में आग लगाना है। उनका संघर्ष चुनावी सुधार के लिए नहीं है, न ही यह सिर्फ एसआईआर या ज्ञानेश कुमार के बारे में है, न ही यह देश के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए है। बल्कि यह देश में अराजकता फैलाकर सत्ता हथियाने की साजिश है।

इसके साथ ही रक्षामंत्री ने विपक्षी कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, “राहुल गांधी और उनके सहयोगियों को समझना होगा, कि लोकतंत्र अराजकता फैलाने, संवैधानिक संस्थानों की विश्वसनीयता को कमजोर करने या देश के विकास में बाधा डालने का लाइसेंस नहीं है।

वहीं इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, राजनाथ सिंह ने कहा कि, कांग्रेस political opportunism कर रही है, इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, राहुल गांधी से रक्षामंत्री ने कहा कि, वो लोकतंत्र का सम्मान करें, न कि लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर disruption की राजनीति करें, बल्कि जनमत का सम्मान करें।

राजनाथ सिंह के बयान में क्यों आया बांग्लादेश का जिक्र?

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, और सीजेपी के अभिजीत दीपके मौजूद थे। वहां प्रशांत भूषण ने कहा “यस वी वांट रिजीम चेंज” भूषण ने यह भी कहा कि सरकार के खिलाफ डिसअफेक्शन फैलाना लोकतंत्र में अपराध नहीं है। और अब यह लड़ाई सच में रिजीम चेंज के लिए है।

राजनाथ सिंह ने इस बयान पर जोर देते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों ने खुद अपना एजेंडा बता दिया है।

आखिर क्या है बांग्लादेश का रिजीम चेंज?

बांग्लादेश में जुलाई-अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस और विपक्ष इसी मॉडल को दोहराना चाहते हैं। इसी बात पर राजनाथ सिंह ने कहा कि, “कांग्रेस बांग्लादेश जैसा रिजीम चेंज चाहती है।”

कांग्रेस का पलटवार

रक्षामंत्री के बयान के कुछ समय बाद ही कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पलटवार किया, उन्होंने एक्स पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को कोट करते हुए कहा “लोकतंत्र में विपक्ष का काम है विरोध करना, पर्दाफाश करना और सरकार को सत्ता से बेदखल करना। कांग्रेस के अनुसार वो SIR और सीईसी के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं। इसमें कोई साजिश नहीं है।

वहीं विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा, “रिजीम चेंज का मतलब चुनाव के माध्यम से सरकार को बदलना होता है। न कि हिंसा के माध्यम से। वहीं प्रशांत भूषण का कहना है कि बीजेपी ने खुद कई बार रिजीम चेंज के लिए आंदोलन किए हैं, और लोकतंत्र में सरकार के खिलाफ असंतोष व्यक्त करना अपराध नहीं है।

बता दें, यह पूरे मामले की जड़ सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर से जुड़ी है। विपक्ष का आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के नाम पर मतदाता सूची में अनियमितताएं हो रही हैं, और योग्य मतदाताओं के नाम काटे जा सकते हैं, इसीलिए देश की राजधानी की शांति भंग हो चुकी है और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर पिछले कई दिनों से राजधानी में प्रदर्शन जारी है।

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