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राजनीति

संसद के मानसून सत्र में बढ़ा सियासी घमासान, धर्मेंद्र प्रधान के सम्मान पर कांग्रेस का NDA पर हमला

संसद के मानसून सत्र के दौरान पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद एनडीए सांसदों द्वारा उनका स्वागत और सम्मान किए जाने पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। विपक्ष ने इसे जवाबदेही से बचने का प्रयास बताया, जबकि सत्तापक्ष ने प्रधान के प्रति अपना समर्थन दोहराया। इस मुद्दे को लेकर संसद के दोनों सदनों में तीखी नोकझोंक और कई बार कार्यवाही बाधित हुई।

संसद के मानसून सत्र में बढ़ा सियासी घमासान, धर्मेंद्र प्रधान के सम्मान पर कांग्रेस का NDA पर हमला
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: जनता स्कोप

धर्मेंद्र प्रधान के सम्मान पर संसद में हंगामा, कांग्रेस बोली- NDA के पास कोई नैतिक मूल्य नहीं

परिचय

संसद के मानसून सत्र में सोमवार को राजनीतिक माहौल उस समय और गरमा गया जब पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद एनडीए सांसदों ने उनका स्वागत और सम्मान किया। इस घटनाक्रम पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ गठबंधन जवाबदेही की बजाय राजनीतिक संदेश देने में जुटा है।

इस मुद्दे ने संसद के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच एक नई बहस को जन्म दिया, जिसके चलते लोकसभा और राज्यसभा दोनों में कई बार तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला।


कांग्रेस ने NDA पर साधा निशाना

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किसी मंत्री के इस्तीफे के तुरंत बाद सार्वजनिक रूप से उनका सम्मान करना लोकतांत्रिक जवाबदेही की भावना के विपरीत है। विपक्ष का आरोप है कि यदि किसी मंत्री ने पद छोड़ा है, तो पहले उसके कारणों और उससे जुड़े सवालों पर चर्चा होनी चाहिए।

कांग्रेस ने यह भी कहा कि इस तरह का कदम जनता के बीच गलत संदेश देता है और सरकार की नैतिक जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करता है।


धर्मेंद्र प्रधान के समर्थन में उतरा NDA

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के नेताओं ने धर्मेंद्र प्रधान के समर्थन में एकजुटता दिखाई। संसद परिसर में कई सांसदों ने उनका स्वागत किया और उनके योगदान की सराहना की।

सत्तापक्ष का कहना है कि इस्तीफा किसी नेता के सार्वजनिक जीवन या उनके कार्यों का मूल्यांकन नहीं होता और पार्टी अपने वरिष्ठ नेताओं के साथ मजबूती से खड़ी है।


संसद की कार्यवाही रही बाधित

धर्मेंद्र प्रधान के मुद्दे को लेकर विपक्ष ने दोनों सदनों में जोरदार विरोध दर्ज कराया। विपक्षी सांसदों ने सरकार से जवाब मांगा और विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की मांग की।

लगातार नारेबाजी और विरोध के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। बाद में सदनों की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन राजनीतिक तनाव बना रहा।


सरकार ने विधायी एजेंडे पर भी रखा जोर

राजनीतिक विवादों के बीच सरकार ने अपने विधायी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की कोशिश की। लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया गया, जिसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में होने वाली गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसे मामलों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

सरकार ने इसे शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया, जबकि विपक्ष ने व्यापक जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया।


यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

धर्मेंद्र प्रधान के सम्मान को लेकर उठा विवाद केवल एक राजनीतिक घटना नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक जवाबदेही, राजनीतिक संदेश और संसदीय परंपराओं से जुड़े व्यापक सवाल भी उठाता है।

एक ओर विपक्ष सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ गठबंधन अपने नेताओं के प्रति समर्थन और एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहा है।


आगे क्या होगा?

मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित है। ऐसे में संभावना है कि आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती, तो संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित हो सकती है और कई अहम विधेयकों पर चर्चा प्रभावित हो सकती है।


निष्कर्ष

धर्मेंद्र प्रधान के सम्मान को लेकर संसद में शुरू हुआ विवाद एक बार फिर सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक खाई को सामने लेकर आया है। जहां कांग्रेस ने एनडीए पर नैतिक मूल्यों की अनदेखी का आरोप लगाया, वहीं सत्तापक्ष ने अपने नेता के प्रति समर्थन जताते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद की कार्यवाही और राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

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