SIR विवाद के बीच CWC की अहम बैठक
मतदाता सूची के Special Intensive Revision को लेकर बढ़ते राजनीतिक टकराव के बीच कांग्रेस की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था, Congress Working Committee, मंगलवार को नई दिल्ली में बैठक कर रही है।
PTI के अनुसार, बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी चर्चा का हिस्सा हैं।
बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को लेकर पार्टी की आगे की राजनीतिक रणनीति तय करना है।
कांग्रेस के निशाने पर क्यों है चुनाव आयोग?
विवाद के केंद्र में देशभर में मतदाता सूचियों की जांच और संशोधन के लिए चलाया गया SIR अभियान है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटाए जाने और electoral-roll management को लेकर सवाल उठाए हैं।
Reuters के अनुसार, मतदाता सत्यापन अभियान शुरू होने के बाद से लगभग 13 करोड़ नाम प्रारंभिक सूचियों से बाहर रहने या हटाए जाने की रिपोर्टों ने विवाद को और बढ़ाया है। हालांकि, सभी ऐसे मामलों को गलत या अवैध deletion मानना सही नहीं होगा; चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के तहत किए जाते हैं।
इसलिए विपक्ष के आरोप और चुनाव आयोग का पक्ष अलग-अलग दावों के रूप में देखना जरूरी है।
चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों ने बढ़ाया विवाद
मामले ने उस समय और राजनीतिक महत्व हासिल किया जब चुनाव आयोग के भीतर कुछ फैसलों को लेकर असहमति की रिपोर्टें सामने आईं।
रिपोर्टों में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता पंजीकरण तथा डिजिटल सिस्टम सहित कई मामलों में आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
Reuters ने बताया कि पिछले दस महीनों में विभिन्न फैसलों से जुड़ी 14 औपचारिक आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई है।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इस घटनाक्रम को संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताया है और इस धारणा का विरोध किया है कि आंतरिक विचार-विमर्श अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण है।
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस की रणनीति
CWC बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका भी प्रमुख मुद्दा है।
कांग्रेस उनके हटाए जाने की मांग को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा कर रही है। पार्टी का आरोप है कि SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों का पर्याप्त समाधान नहीं हुआ है।
यह कांग्रेस का राजनीतिक और संस्थागत आरोप है, कोई स्थापित न्यायिक निष्कर्ष नहीं।
ज्ञानेश कुमार ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। चुनाव आयोग भी चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात और बड़े पैमाने पर हेरफेर के विपक्ष के आरोपों को खारिज करता रहा है।
चुनाव आयोग ने क्या कदम उठाए?
विवाद बढ़ने के बीच चुनाव आयोग ने SIR की कुछ प्रक्रियाओं में बदलाव किए हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, आयोग ने दस्तावेज जमा करने की समय-सीमा में कुछ जगह विस्तार किया और Booth Level Officers के माध्यम से घर जाकर दस्तावेज लेने जैसी प्रक्रियाओं पर जोर दिया है।
दिल्ली और महाराष्ट्र में SIR से जुड़ी कुछ deadlines को लगभग एक महीने तक बढ़ाया गया है।
इसके बावजूद विपक्ष का कहना है कि मूल सवाल केवल procedural सुधारों तक सीमित नहीं हैं और voter-roll revision की व्यापक प्रक्रिया की समीक्षा जरूरी है।
BJP और सरकार का पक्ष
भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के आरोपों को खारिज किया है।
BJP नेताओं का कहना है कि विपक्ष चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर अनुचित सवाल उठा रहा है और SIR को लेकर गलत धारणा पैदा की जा रही है।
BJP नेताओं ने यह भी तर्क दिया है कि मतदाता सूची से duplicate registrations, मृत मतदाताओं और स्थानांतरित हो चुके लोगों के नाम हटाना electoral-roll revision का सामान्य हिस्सा है।
इस तरह विवाद के दोनों पक्ष SIR को बिल्कुल अलग नजरिए से देख रहे हैं।
कांग्रेस इसे electoral transparency और voter rights से जुड़ा मुद्दा बता रही है, जबकि BJP और चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखने के लिए revision आवश्यक है।
SIR क्या है और यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
Special Intensive Revision का उद्देश्य electoral rolls की व्यापक जांच और उन्हें अपडेट करना है।
सैद्धांतिक रूप से ऐसी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि पात्र मतदाता सूची में शामिल रहें और duplicate, मृत या अन्य कारणों से अपात्र entries को हटाया जाए।
लेकिन किसी भी बड़े voter-roll revision में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होता है कि पात्र मतदाता गलती से सूची से बाहर न हो जाएं।
यही कारण है कि documentation requirements, notice procedure, appeals और नाम हटाने की प्रक्रिया इस विवाद के केंद्र में हैं।
INDIA Bloc की अगली बैठक पर भी नजर
CWC की बैठक विपक्ष की व्यापक रणनीति का पहला चरण हो सकती है।
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, INDIA गठबंधन के दलों की बैठक 30 सितंबर को नई दिल्ली में होने की संभावना है।
उस बैठक में चुनाव आयोग और SIR विवाद पर संयुक्त विपक्षी रणनीति पर चर्चा हो सकती है।
इससे यह मुद्दा केवल कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद तक सीमित न रहकर व्यापक विपक्षी अभियान का हिस्सा बन सकता है।
मामला राजनीतिक होने के साथ संस्थागत भी
SIR विवाद का महत्व केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है।
मतदाता सूची किसी भी चुनाव की बुनियादी संरचना होती है। इसलिए electoral rolls की accuracy, पात्र मतदाताओं का inclusion, गलत entries को हटाने की प्रक्रिया और शिकायतों के समाधान की व्यवस्था सीधे चुनावी विश्वसनीयता से जुड़ी होती है।
दूसरी ओर, केवल राजनीतिक आरोपों को अपने आप अनियमितता का प्रमाण भी नहीं माना जा सकता।
यही कारण है कि इस विवाद में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के आरोप, चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया और अदालतों या अन्य सक्षम संस्थाओं से आने वाले निष्कर्षों के बीच स्पष्ट अंतर रखना महत्वपूर्ण है।
Balanced Analysis
CWC की बैठक दिखाती है कि कांग्रेस SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे को अपनी राष्ट्रीय राजनीतिक रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में आगे बढ़ाना चाहती है।
आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्टों ने विपक्ष को अतिरिक्त राजनीतिक आधार दिया है। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि आंतरिक विचार-विमर्श संस्थागत प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है और इसे चुनावी गड़बड़ी के प्रमाण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
आने वाले दिनों में तीन घटनाक्रम महत्वपूर्ण होंगे—CWC द्वारा अपनाई जाने वाली औपचारिक रणनीति, INDIA Bloc की संयुक्त प्रतिक्रिया और चुनाव आयोग द्वारा SIR से जुड़ी शिकायतों तथा प्रक्रियात्मक सवालों पर उठाए जाने वाले अगले कदम।
निष्कर्ष
29 सितंबर की CWC बैठक ने संकेत दिया है कि चुनाव आयोग और SIR विवाद फिलहाल समाप्त होने वाला राजनीतिक मुद्दा नहीं है।
कांग्रेस CEC ज्ञानेश कुमार और SIR प्रक्रिया को लेकर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर विचार कर रही है, जबकि BJP और चुनाव आयोग आरोपों को खारिज कर रहे हैं।
मामले का अंतिम आकलन राजनीतिक दावों के बजाय सत्यापित electoral data, आधिकारिक रिकॉर्ड, आयोग की प्रक्रियाओं और जहां लागू हो वहां न्यायिक निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।
