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राजनीति

Telangana Assembly में बड़ा हंगामा: KTR और Harish Rao समेत BRS विधायक सस्पेंड, जानिए क्यों हुआ टकराव

तेलंगाना विधानसभा में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारत राष्ट्र समिति के बीच टकराव तेज हो गया है। सदन में नारेबाजी और लगातार व्यवधान के बाद स्पीकर गद्दाम प्रसाद कुमार ने K.T. Rama Rao (KTR), T. Harish Rao समेत BRS विधायकों को मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया। विभिन्न रिपोर्टों में निलंबित सदस्यों की संख्या 21 और 22 बताई गई है।

Telangana Assembly में बड़ा हंगामा: KTR और Harish Rao समेत BRS विधायक सस्पेंड, जानिए क्यों हुआ टकराव
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Janta Scope

तेलंगाना विधानसभा में KTR, Harish Rao समेत BRS विधायक निलंबित, मानसून सत्र के बाकी हिस्से से बाहर

Introduction

तेलंगाना विधानसभा का मानसून सत्र बुधवार, 9 सितंबर को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के विधायक नारे लगाते हुए सदन के वेल में पहुंच गए और तत्काल चर्चा की मांग करने लगे। लगातार व्यवधान के बाद स्पीकर गद्दाम प्रसाद कुमार ने BRS विधायकों को सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया।

निलंबित नेताओं में BRS के कार्यकारी अध्यक्ष K.T. Rama Rao (KTR) और विधानसभा में पार्टी के उपनेता एवं पूर्व मंत्री T. Harish Rao भी शामिल हैं।

निलंबित विधायकों की संख्या पर प्रकाशित रिपोर्टों में अंतर है। PTI पर आधारित कई प्रमुख रिपोर्टों में कुल संख्या 22 बताई गई है, जबकि कुछ रिपोर्टों के मुताबिक उस समय सदन में मौजूद 21 BRS सदस्यों को निलंबित किया गया। इसलिए संख्या से जुड़ी इस विसंगति को ध्यान में रखना जरूरी है।

क्यों हुआ विधानसभा में हंगामा?

विवाद की पृष्ठभूमि कई दिनों से बन रही थी।

BRS विधायकों ने महिला विधायकों के साथ पुलिस की कथित सख्ती और पार्टी प्रमुख तथा पूर्व मुख्यमंत्री K. Chandrasekhar Rao (KCR) को लेकर सत्तारूढ़ दल के कुछ सदस्यों की कथित टिप्पणियों पर चर्चा की मांग की।

KTR ने इन मुद्दों को लेकर स्थगन प्रस्ताव दिया था।

सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद BRS विधायकों ने “We want justice” के नारे लगाए और वेल में पहुंचकर प्रदर्शन किया।

स्पीकर और सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेताओं ने प्रदर्शनकारी सदस्यों से अपनी सीटों पर वापस जाने की अपील की, लेकिन गतिरोध जारी रहा।

कैसे लिया गया निलंबन का फैसला?

लगातार हंगामे के बीच तेलंगाना के विधायी कार्य मंत्री D. Sridhar Babu ने BRS विधायकों को निलंबित करने का प्रस्ताव पेश किया।

इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष Gaddam Prasad Kumar ने सदस्यों को मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित करने की घोषणा की।

स्पीकर ने यह भी कहा कि वह इस बात की जांच करेंगे कि BRS सदस्यों ने अपनी मांगें लिखित रूप में उनके समक्ष रखी थीं या नहीं।

21 या 22 विधायक? रिपोर्टों में क्यों है अंतर

इस घटनाक्रम की रिपोर्टिंग में संख्या को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतर सामने आया है।

PTI आधारित रिपोर्टों और कई राष्ट्रीय समाचार संस्थानों ने KTR और Harish Rao समेत 22 BRS विधायकों के निलंबन की सूचना दी।

वहीं कुछ रिपोर्टों के अनुसार निलंबन के समय 21 BRS सदस्य सदन में मौजूद थे और उन सभी को निलंबित किया गया।

इसी वजह से घटना को रिपोर्ट करते समय “21” या “22” में से किसी एक आंकड़े को बिना संदर्भ के प्रस्तुत करना भ्रामक हो सकता है।

महिला विधायकों से कथित पुलिस व्यवहार भी विवाद के केंद्र में

BRS की प्रमुख मांगों में से एक पार्टी की महिला विधायकों के साथ पुलिस के कथित व्यवहार पर चर्चा थी।

इससे पहले BRS नेताओं ने विधानसभा परिसर में प्रवेश करने का प्रयास किया था। पार्टी नेताओं ने काली टी-शर्ट पहनकर कांग्रेस सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया था।

BRS का आरोप था कि इस दौरान पुलिस ने उसके नेताओं, खास तौर पर महिला सदस्यों के साथ अनुचित व्यवहार किया।

ये BRS के आरोप हैं और इन्हें उसी रूप में देखा जाना चाहिए; पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक पक्षों के दावे अलग-अलग रहे हैं।

KCR को लेकर कथित टिप्पणियों पर भी BRS नाराज

BRS नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री K. Chandrasekhar Rao को लेकर कांग्रेस के कुछ नेताओं की कथित टिप्पणियों का मुद्दा भी सदन में उठाया।

उपमुख्यमंत्री Mallu Bhatti Vikramarka ने सदन में कहा कि वह और कांग्रेस के अन्य नेता KCR के स्वस्थ और लंबे जीवन तथा सार्वजनिक जीवन में लंबे करियर की कामना करते हैं।

उन्होंने विपक्षी विधायकों से अपनी बात सीटों से रखने और सदन की कार्यवाही में व्यवधान नहीं डालने की अपील की।

‘Purification’ विवाद ने और बढ़ाया राजनीतिक तनाव

इस टकराव में एक दूसरा विवाद भी जुड़ गया।

सिद्धिपेट के एर्रावेली में KCR के फार्महाउस के पास कांग्रेस कार्यकर्ताओं और दलित समूहों के प्रदर्शन के बाद कथित तौर पर हल्दी वाला पानी छिड़ककर जगह को “शुद्ध” करने का मामला सामने आया।

कांग्रेस नेताओं ने इस कथित कार्रवाई को दलित समुदाय का अपमान बताया।

दूसरी तरफ BRS ने इस मुद्दे पर सामने लाई गई कुछ तस्वीरों को लेकर सवाल उठाए और उनके AI-generated होने का दावा किया।

इसलिए कथित “purification” घटना से जुड़े राजनीतिक आरोपों और दावों को स्थापित तथ्य से अलग करके देखना जरूरी है।

तीन दिनों से जारी था सत्ता-विपक्ष का टकराव

विधानसभा में हुआ यह घटनाक्रम अचानक पैदा हुआ विवाद नहीं था।

BRS और कांग्रेस के बीच लगातार कई दिनों से तनाव बना हुआ था। विपक्ष सरकार की नीतियों, कथित अधूरे चुनावी वादों, पुलिस कार्रवाई और KCR से जुड़ी टिप्पणियों को लेकर विरोध कर रहा था।

7 सितंबर को KTR, Harish Rao और दूसरे BRS नेताओं को विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए पुलिस ने हिरासत में भी लिया था।

इसके बाद विधानसभा के भीतर टकराव और तेज हो गया।

निलंबन का राजनीतिक महत्व

तेलंगाना में कांग्रेस सरकार और मुख्य विपक्षी दल BRS के बीच पहले से तीखा राजनीतिक मुकाबला चल रहा है। ऐसे में पार्टी के प्रमुख नेताओं का मानसून सत्र के बाकी हिस्से से बाहर होना महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है।

निलंबन का सीधा प्रभाव यह है कि संबंधित विधायक सत्र के बाकी हिस्से में सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।

इससे BRS की ओर से विधानसभा के भीतर सरकार को घेरने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, जबकि पार्टी अपने मुद्दों को सदन के बाहर राजनीतिक अभियान के रूप में आगे बढ़ा सकती है।

BRS ने निलंबन को बताया अलोकतांत्रिक

निलंबन के बाद BRS ने फैसले का विरोध किया।

Harish Rao ने कार्रवाई को “undemocratic” बताते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है।

BRS नेताओं ने राज्यपाल Shiv Pratap Shukla के समक्ष भी मामला उठाने की पहल की और विधानसभा में हुए घटनाक्रम तथा पार्टी द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग की।

इस बीच कांग्रेस का रुख है कि विधानसभा में व्यवस्था और स्पीकर के पद की गरिमा बनाए रखना जरूरी है।

अब राजनीतिक लड़ाई सदन के बाहर भी

KTR और Harish Rao जैसे वरिष्ठ नेताओं के निलंबन के बाद तेलंगाना की राजनीतिक लड़ाई अब केवल विधानसभा तक सीमित रहने की संभावना नहीं है।

BRS इस कार्रवाई को विपक्ष की आवाज दबाने के मुद्दे के रूप में पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस लगातार सदन में अनुशासन और दलित सम्मान से जुड़े विवाद को उठा रही है।

इस पूरे घटनाक्रम में कई आरोप दोनों राजनीतिक पक्षों की ओर से लगाए गए हैं। इसलिए पुलिस व्यवहार, कथित टिप्पणियों और “purification” विवाद से जुड़े दावों को जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से अलग करके देखना महत्वपूर्ण है।

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