SIR को लेकर तेलंगाना में बढ़ा राजनीतिक टकराव
तेलंगाना में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि कांग्रेस समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाकर राज्य में सत्ता हासिल करने की कोशिश की जा रही है।
रेवंत रेड्डी ने शनिवार को अपने कोडंगल विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए ये आरोप लगाए। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से मतदाता सूची के संशोधन पर करीबी नजर रखने और पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की स्थिति में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करने को कहा।
मुख्यमंत्री के आरोपों को फिलहाल राजनीतिक दावे के रूप में देखा जाना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टिंग में ऐसा कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है जिससे यह स्थापित हो कि BJP ने कांग्रेस समर्थकों के नाम हटाने का निर्देश दिया है या मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया राजनीतिक आधार पर चलाई जा रही है।
रेवंत रेड्डी का आरोप- कांग्रेस समर्थकों को बनाया जा रहा निशाना
रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि BJP तेलंगाना के अगले विधानसभा चुनाव में फायदा हासिल करने के लिए कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम हटवाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि SIR के दौरान विशेष रूप से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अल्पसंख्यक मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “We will not sit idle and are ready to counter the BJP’s move to delete the names of the Congress supporters. The party workers will not tolerate any such attempt.”
रेड्डी ने यह भी आरोप लगाया कि छोटी-मोटी गलतियों और विसंगतियों को आधार बनाकर गरीब मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं। उन्होंने कांग्रेस संगठन को इस प्रक्रिया पर बूथ स्तर तक नजर रखने का निर्देश दिया।
महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल को लेकर भी किया दावा
रेवंत रेड्डी ने अपने आरोपों को तेलंगाना तक सीमित नहीं रखा।
उन्होंने दावा किया कि BJP ने महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल में भी मतदाता सूची से नाम हटाने की इसी रणनीति का इस्तेमाल किया और अब तेलंगाना में इसे दोहराने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि BJP ने इन राज्यों में वोट हटाकर चुनाव जीते।
हालांकि मुख्यमंत्री का यह दावा गंभीर है, उपलब्ध रिपोर्टिंग में इसे प्रमाणित तथ्य के रूप में स्थापित करने वाली स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है। इसलिए इसे रेवंत रेड्डी और कांग्रेस के राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
73.39 लाख नाम ASDD श्रेणी में बाहर, 92.88 लाख मामलों में विसंगतियां
इस राजनीतिक विवाद की पृष्ठभूमि में तेलंगाना की मतदाता सूची के संशोधन से जुड़े आंकड़े महत्वपूर्ण हैं।
17 अगस्त को प्रकाशित तेलंगाना की ड्राफ्ट मतदाता सूची में 73.39 लाख नाम Absent, Shifted, Dead or Duplicate (ASDD) श्रेणी के तहत शामिल नहीं किए गए। इसके अलावा 92.88 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां चिह्नित की गईं।
मतदाताओं के लिए claims और objections दाखिल करने की समयसीमा 16 सितंबर तक है।
अंतिम मतदाता सूची 19 अक्टूबर को प्रकाशित किए जाने का कार्यक्रम है।
इन आंकड़ों का मतलब अपने आप यह नहीं है कि राजनीतिक आधार पर मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यही वह बिंदु है जहां प्रशासनिक electoral-roll revision और कांग्रेस के राजनीतिक आरोपों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
कांग्रेस के Booth Level Agents को मिला निर्देश
रेवंत रेड्डी ने इस मुद्दे पर कांग्रेस संगठन को बूथ स्तर पर सक्रिय होने का निर्देश दिया है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के Booth Level Agents (BLAs) गांवों में समन्वय करें और यह सुनिश्चित करने का प्रयास करें कि पात्र मतदाताओं, विशेष रूप से गरीब लोगों के नाम मतदाता सूची से न हटें।
मुख्यमंत्री ने मंडल स्तर के नेताओं को भी जिम्मेदारी लेने के लिए कहा। प्रत्येक नेता को चार गांवों की निगरानी करने और संबंधित बूथों की मतदाता सूची पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है।
रेड्डी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वोट देने के अधिकार की रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है।
ED-CBI को लेकर भी BJP पर हमला
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में केंद्रीय जांच एजेंसियों का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चुनावों में राजनीतिक विरोधियों को कमजोर करने के लिए Enforcement Directorate (ED) और Central Bureau of Investigation (CBI) का इस्तेमाल किया गया और अब मतदाता सूची से नाम हटाने का रास्ता अपनाया जा रहा है।
यह भी मुख्यमंत्री का राजनीतिक आरोप है। उनके बयान से यह साबित नहीं होता कि जांच एजेंसियों या निर्वाचन प्रक्रिया का राजनीतिक रूप से दुरुपयोग हुआ है।
BRS पर भी लगाया BJP का साथ देने का आरोप
रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना की प्रमुख विपक्षी पार्टी Bharat Rashtra Samithi (BRS) को भी निशाने पर लिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि BRS कथित तौर पर BJP का साथ दे रही है और कांग्रेस को हराने के लिए वोट हटाने की इस कथित कोशिश का समर्थन कर रही है।
इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
रेड्डी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से BJP और BRS दोनों की कथित रणनीति के प्रति सतर्क रहने को कहा।
असली लड़ाई अब वोटर लिस्ट की जांच पर
इस विवाद का अगला महत्वपूर्ण चरण राजनीतिक बयानबाजी से अधिक मतदाता सूची की वास्तविक जांच होगी।
ड्राफ्ट रोल जारी होने के बाद claims और objections की प्रक्रिया यह तय करने में अहम होगी कि जिन मतदाताओं के नाम शामिल नहीं हैं या जिनके रिकॉर्ड में विसंगतियां हैं, उनमें से कितने मामलों का समाधान होता है।
कांग्रेस के लिए यह मुद्दा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि रेवंत रेड्डी इसे केवल प्रशासनिक revision नहीं, बल्कि अपने समर्थक मतदाताओं के अधिकार से जोड़ रहे हैं। दूसरी ओर, इतनी बड़ी संख्या में मतदाता रिकॉर्ड की समीक्षा के बीच यह अंतर बनाए रखना जरूरी होगा कि कौन-से नाम वैध कारणों से बदले या हटाए गए और किन मामलों में वास्तविक त्रुटियां हुईं।
19 अक्टूबर को निर्धारित अंतिम मतदाता सूची इस विवाद का अगला बड़ा पड़ाव होगी। तब ड्राफ्ट रोल, claims और objections के बाद हुए बदलावों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि तेलंगाना में SIR अब केवल मतदाता सूची संशोधन की प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गई है। यह 2028 के विधानसभा चुनाव से काफी पहले कांग्रेस, BJP और BRS के बीच एक बड़े राजनीतिक टकराव का मुद्दा बन चुकी है।
