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राजनीति

Tripura में बड़ा राजनीतिक समझौता: BJP ने Tripartite Accord पर बढ़ाया कदम, TIPRA Motha के साथ मिलकर लड़ेगी चुनाव

त्रिपुरा में BJP और TIPRA Motha के बीच चली आ रही खींचतान के बाद दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक से नया राजनीतिक रास्ता निकला है। मुख्यमंत्री Manik Saha के मुताबिक, 2024 के Tripartite Agreement को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है और BJP, TIPRA Motha तथा IPFT आगामी Village Committee चुनाव साथ मिलकर लड़ेंगे।

Tripura में बड़ा राजनीतिक समझौता: BJP ने Tripartite Accord पर बढ़ाया कदम, TIPRA Motha के साथ मिलकर लड़ेगी चुनाव
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Janta Scope

परिचय

त्रिपुरा की आदिवासी राजनीति और आगामी Village Committee चुनाव से पहले BJP और TIPRA Motha के बीच लंबे समय से अटका राजनीतिक समझौता आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah की मौजूदगी में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद त्रिपुरा के मुख्यमंत्री Manik Saha ने कहा कि 2024 में हुए Tripartite Agreement को लागू करने से जुड़े मुद्दों पर आगे बढ़ने पर सहमति बनी है।

इसके साथ ही BJP, TIPRA Motha और Indigenous People's Front of Tripura (IPFT) ने 28 सितंबर को होने वाले Tripura Tribal Areas Autonomous District Council (TTAADC) के Village Committee चुनाव संयुक्त रूप से लड़ने का फैसला किया है।

यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि TIPRA Motha ने चुनावी तालमेल को Tripartite Agreement के क्रियान्वयन से जोड़ रखा था।

दिल्ली में करीब 90 मिनट चली हाई-लेवल बैठक

दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के आधिकारिक आवास पर हुई बैठक में मुख्यमंत्री Manik Saha और TIPRA Motha के प्रमुख Pradyot Kishore Manikya Debbarma शामिल हुए।

BJP के Northeast coordinator Sambit Patra भी बैठक में मौजूद थे।

Manik Saha के मुताबिक, चर्चा करीब 90 मिनट चली और इसमें दो प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई—Tripartite Agreement का क्रियान्वयन और आगामी Village Committee चुनाव के लिए राजनीतिक तालमेल।

बैठक के बाद Saha ने बातचीत को सकारात्मक बताया और कहा कि संबंधित पक्ष मुद्दों को आपसी सहमति से सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

BJP, TIPRA Motha और IPFT साथ लड़ेंगे चुनाव

दिल्ली वार्ता का तत्काल राजनीतिक परिणाम Village Committee चुनावों में दिखाई देगा।

Manik Saha के अनुसार, BJP, TIPRA Motha और IPFT मिलकर चुनाव लड़ेंगे। सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप देने के लिए टीमों का गठन किया गया है।

Village Committee चुनाव 28 सितंबर को होने हैं, जबकि मतगणना 5 अक्टूबर को निर्धारित है।

ये चुनाव TTAADC के तहत होने वाले हैं और आदिवासी क्षेत्रों में तीनों दलों के बीच राजनीतिक तालमेल की पहली बड़ी परीक्षा बनेंगे।

क्या है 2024 का Tripartite Agreement?

Tripartite Agreement पर 2 मार्च 2024 को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah की मौजूदगी में हस्ताक्षर हुए थे।

समझौते में भारत सरकार, त्रिपुरा सरकार और The Indigenous Progressive Regional Alliance यानी TIPRA के साथ अन्य हितधारक शामिल थे।

केंद्र सरकार की ओर से उस समय जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, समझौते का उद्देश्य त्रिपुरा के मूल निवासियों से जुड़े कई पुराने मुद्दों का स्वीकार्य समाधान तलाशना था।

इनमें प्रमुख रूप से:

  • इतिहास से जुड़े मुद्दे

  • भूमि और राजनीतिक अधिकार

  • आर्थिक विकास

  • पहचान

  • संस्कृति

  • भाषा

शामिल थे।

इसलिए मौजूदा राजनीतिक बातचीत को केवल सीट-बंटवारे तक सीमित करके देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। TIPRA Motha के लिए इस समझौते का क्रियान्वयन लंबे समय से उसकी राजनीतिक मांगों का केंद्रीय हिस्सा रहा है।

TIPRA Motha ने क्यों बनाया था Accord को Alliance की शर्त?

Village Committee चुनाव से पहले BJP और TIPRA Motha के बीच गठबंधन को लेकर कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन Tripartite Agreement का क्रियान्वयन सबसे बड़ा विवाद बना रहा।

TIPRA Motha नेता Ranjit Debbarma ने दिल्ली बैठक से पहले साफ कहा था कि पार्टी समझौते पर कायम है और जब तक सरकार Tripartite Agreement से जुड़ी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करती, तब तक चुनावी गठबंधन पर आगे बढ़ना मुश्किल होगा।

इससे पहले Pradyot Kishore Debbarma भी समझौते पर ठोस प्रगति की मांग करते रहे थे।

इस पृष्ठभूमि में दिल्ली की नई बैठक महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब दोनों पक्ष चुनावी सहयोग की दिशा में आगे बढ़ गए हैं।

Land Rights पर क्या स्थिति है?

आदिवासी भूमि अधिकार TIPRA Motha की प्रमुख मांगों में शामिल रहे हैं।

दिल्ली बैठक के बाद सामने आई रिपोर्टों में Tripartite Agreement के तहत indigenous land rights पर आगे बढ़ने की बात कही गई है।

हालांकि इस बिंदु पर सावधानी जरूरी है।

Manik Saha ने सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों की औपचारिक पुष्टि नहीं की जिनमें कहा जा रहा था कि TIPRA Motha की land-rights संबंधी मांग पूरी तरह स्वीकार कर ली गई है।

इसलिए फिलहाल यह कहना अधिक सटीक होगा कि भूमि अधिकार Tripartite Agreement के क्रियान्वयन से जुड़े प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं, लेकिन अंतिम व्यवस्था और उसके विस्तृत प्रावधानों की तस्वीर अभी स्पष्ट होना बाकी है।

चुनाव के बाद शुरू हो सकती है Accord लागू करने की प्रक्रिया

Manik Saha के मुताबिक, Tripartite Agreement से जुड़े मुद्दों के क्रियान्वयन पर Village Committee चुनाव के बाद आगे बढ़ा जाएगा और इसकी प्रक्रिया अगले महीने शुरू होने की उम्मीद है।

उन्होंने यह भी कहा कि समझौते का क्रियान्वयन इस तरह किया जाएगा जिससे सभी समुदायों के हित सुरक्षित रहें और किसी समुदाय के साथ भेदभाव न हो।

यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि Tripura की राजनीति में आदिवासी अधिकारों से जुड़े प्रश्न के साथ अलग-अलग समुदायों के बीच राजनीतिक संतुलन भी संवेदनशील मुद्दा रहा है।

TTAADC में TIPRA Motha की मजबूत स्थिति

इस समझौते के चुनावी महत्व को TTAADC के मौजूदा राजनीतिक समीकरण से भी समझा जा सकता है।

2026 के TTAADC चुनाव में TIPRA Motha ने अकेले चुनाव लड़ते हुए 28 में से 24 सीटें जीती थीं, जबकि BJP को चार सीटें मिली थीं।

यानी आदिवासी क्षेत्रों में TIPRA Motha एक महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत के रूप में मौजूद है।

ऐसे में Village Committee चुनाव से पहले BJP और TIPRA Motha का दोबारा चुनावी तालमेल दोनों दलों के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

587 Village Committees के लिए होगा मतदान

आगामी चुनाव 587 Village Committees के लिए होने हैं। इन समितियों में कुल 4,597 सीटें हैं।

28 सितंबर को मतदान और 5 अक्टूबर को मतगणना होगी।

यह चुनाव लगभग एक दशक के अंतराल के बाद हो रहा है, जिससे इसका राजनीतिक महत्व और बढ़ जाता है।

अब निगाहें सीट-बंटवारे पर होंगी और उससे भी आगे इस बात पर कि चुनाव के बाद 2024 के Tripartite Agreement को लागू करने की प्रक्रिया किस रूप में सामने आती है।

चुनावी समझौते से आगे है असली परीक्षा

दिल्ली बैठक ने BJP, TIPRA Motha और IPFT के बीच तत्काल चुनावी गतिरोध को काफी हद तक दूर कर दिया है। तीनों दलों का साथ चुनाव लड़ने का फैसला इसका सबसे स्पष्ट परिणाम है।

लेकिन Tripartite Agreement का मामला इससे कहीं व्यापक है।

2024 के समझौते में भूमि और राजनीतिक अधिकारों से लेकर पहचान, संस्कृति, भाषा तथा आर्थिक विकास तक कई विषय शामिल किए गए थे। इसलिए इसके क्रियान्वयन की वास्तविक परीक्षा चुनावी गठबंधन बनने से नहीं, बल्कि इन मुद्दों पर उठाए जाने वाले ठोस कदमों से होगी।

फिलहाल मुख्यमंत्री Manik Saha ने चुनाव के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही है। आगे आने वाले महीनों में इसकी समयसीमा, प्रशासनिक प्रक्रिया और भूमि अधिकारों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर लिए जाने वाले फैसले इस समझौते की दिशा तय करेंगे।


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