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राजनीति

UN में भारत की स्थायी Security Council सीट को रूस का समर्थन, Lavrov ने कहा—Asia, Africa और Latin America का प्रतिनिधित्व बढ़े

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में रूस ने भारत और ब्राजील को UN Security Council में स्थायी सदस्यता देने का समर्थन दोहराया है। रूसी विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने कहा कि Security Council में Asia, Africa और Latin America का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना चाहिए। इसी UNGA सत्र के दौरान Portugal और Mauritius ने भी भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया है।

UN में भारत की स्थायी Security Council सीट को रूस का समर्थन, Lavrov ने कहा—Asia, Africa और Latin America का प्रतिनिधित्व बढ़े
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: United Nations, PMO India, Akashvani News और The Indian Express

नई दिल्ली/न्यूयॉर्क, 27 सितंबर 2026

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता हासिल करने की भारत की लंबे समय से चली आ रही कोशिश को रूस से एक बार फिर स्पष्ट समर्थन मिला है।

रूसी विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए Security Council में Asia, Africa और Latin America का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की वकालत की और भारत तथा ब्राजील की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया। संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार Lavrov ने 81वें General Assembly General Debate में रूस का प्रतिनिधित्व किया।

Lavrov ने कहा:

“We are in favour of broadening the representation of Asia, Africa, and Latin America. We support Brazil's and India's candidatures for a permanent seat.”

यानी रूस का रुख है कि UNSC में सुधार के दौरान एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की भागीदारी बढ़नी चाहिए और भारत तथा ब्राजील को स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए।

Germany और Japan पर रूस ने जताई आपत्ति

भारत और ब्राजील का समर्थन करने के साथ Lavrov ने Security Council में अतिरिक्त पश्चिमी प्रतिनिधित्व बढ़ाने का विरोध भी किया।

उन्होंने विशेष रूप से Germany और Japan को लेकर कहा कि UNSC reform के तहत पश्चिमी देशों को और स्थायी सीटें नहीं दी जानी चाहिए। Lavrov ने दोनों देशों को लेकर “militarism and revanchism” की ओर बढ़ने का आरोप लगाया। यह रूसी विदेश मंत्री का राजनीतिक आकलन और आरोप है, इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

यह पहलू महत्वपूर्ण है क्योंकि India और Japan दोनों G4 grouping का हिस्सा हैं। G4 में India, Brazil, Germany और Japan शामिल हैं और ये देश लंबे समय से Security Council reform तथा स्थायी सदस्यता के विस्तार की मांग करते रहे हैं।

इसलिए रूस का मौजूदा रुख भारत की दावेदारी के समर्थन के साथ-साथ सभी G4 देशों के लिए समान समर्थन नहीं दर्शाता।

रूस का समर्थन नया नहीं, पहले भी दोहरा चुका है रुख

Lavrov का ताजा बयान भारत को लेकर रूस की नीति में अचानक आए बदलाव का संकेत नहीं है। Moscow पहले भी कई अवसरों पर भारत की स्थायी UNSC सदस्यता का समर्थन कर चुका है।

दिसंबर 2025 में 23वें India-Russia Annual Summit के बाद जारी आधिकारिक संयुक्त वक्तव्य में दोनों देशों ने Security Council में व्यापक सुधार की जरूरत पर जोर दिया था।

उस वक्त रूस ने “reformed and expanded UN Security Council” में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपने दृढ़ समर्थन को दोहराया था।

भारत सरकार के आधिकारिक दस्तावेज भी बताते हैं कि रूस लंबे समय से UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन करता आया है।

Portugal और Mauritius से भी भारत को समर्थन

मौजूदा UN General Assembly सत्र में भारत की दावेदारी को केवल रूस से समर्थन नहीं मिला है।

Portugal के प्रधानमंत्री Luis Montenegro ने Security Council को अधिक प्रतिनिधित्व वाला बनाने की बात करते हुए Africa के साथ Brazil और India के लिए स्थायी प्रतिनिधित्व का समर्थन किया।

वहीं Mauritius के विदेश मंत्री Dhananjay Ramful ने भी भारत की उम्मीदवारी का स्पष्ट समर्थन किया। Mauritius ने वैश्विक मामलों में भारत की भूमिका का उल्लेख करते हुए उसकी स्थायी सदस्यता की दावेदारी के प्रति अपना समर्थन दोहराया।

Marshall Islands की राष्ट्रपति Hilda Heine ने Japan और उसके G4 partners की स्थायी सदस्यता का समर्थन दोहराया, जिससे India को G4 के माध्यम से भी समर्थन मिला।

अभी UNSC की संरचना क्या है?

United Nations Security Council में वर्तमान में 15 सदस्य होते हैं।

इनमें पांच स्थायी सदस्य हैं:

China, France, Russia, United Kingdom और United States.

इन पांचों के पास veto power है।

इसके अलावा 10 non-permanent members होते हैं, जिन्हें दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है।

यही संरचना Security Council reform की बहस के केंद्र में है। भारत का तर्क रहा है कि मौजूदा व्यवस्था आज की वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं करती।

भारत ने UN में यह भी कहा है कि Security Council का विस्तार permanent और non-permanent दोनों categories में होना चाहिए।

रूस के समर्थन का मतलब भारत को तुरंत स्थायी सीट मिलना नहीं

रूस जैसे मौजूदा permanent member का समर्थन भारत के लिए कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे भारत को स्वतः स्थायी सदस्यता नहीं मिल जाती।

Security Council की सदस्यता संरचना बदलने के लिए UN Charter में संशोधन की आवश्यकता होगी। इसके लिए General Assembly में दो-तिहाई समर्थन के साथ UN सदस्य देशों के दो-तिहाई हिस्से द्वारा ratification जरूरी है। इसमें मौजूदा पांचों permanent members की ratification भी शामिल है।

यही कारण है कि विभिन्न देशों द्वारा भारत को दिया जा रहा समर्थन महत्वपूर्ण होने के बावजूद UNSC reform एक व्यापक और जटिल बहुपक्षीय प्रक्रिया बनी हुई है।

भारत के लिए ताजा समर्थन क्यों महत्वपूर्ण है?

इस UNGA सत्र में Russia, Portugal और Mauritius जैसे देशों की ओर से आए समर्थन Security Council की मौजूदा संरचना को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय बहस को फिर सामने लाते हैं।

भारत की दावेदारी का मुख्य आधार केवल एक अतिरिक्त सीट हासिल करना नहीं है। New Delhi लंबे समय से व्यापक UNSC reform की मांग कर रहा है, जिसमें विकासशील देशों और वर्तमान वैश्विक शक्ति-संतुलन को अधिक प्रतिनिधित्व देने की बात शामिल है।

हालांकि अलग-अलग देशों में इस बात पर मतभेद बने हुए हैं कि Security Council का विस्तार किस रूप में किया जाए, किन देशों या क्षेत्रों को नई स्थायी सीटें मिलें और नए permanent members को veto अधिकार मिलना चाहिए या नहीं।

इसलिए रूस का ताजा समर्थन भारत की दावेदारी के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक समर्थन है, लेकिन Security Council reform की अंतिम दिशा UN के सदस्य देशों के बीच व्यापक सहमति और औपचारिक Charter amendment प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

डिस्क्लेमर: यह लेख United Nations के उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड, भारत सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों और विश्वसनीय समाचार स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में विभिन्न देशों या नेताओं द्वारा व्यक्त राजनीतिक विचार और आरोप संबंधित वक्ताओं के हैं; उन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

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