अखिलेश-योगी के AI वीडियो पर सियासत तेज, 2027 चुनाव से पहले BJP-SP की डिजिटल लड़ाई ने पकड़ा जोर
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक मुकाबला अब रैलियों, भाषणों और सोशल मीडिया पोस्ट से आगे बढ़कर AI-generated वीडियो तक पहुंच गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को निशाना बनाते हुए सामने आए AI वीडियो ने BJP और SP के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज कर दिए हैं। हाल के हफ्तों में कई AI-generated वीडियो सामने आए हैं, जिनमें दोनों नेताओं को व्यंग्यात्मक और काल्पनिक परिस्थितियों में दिखाया गया।
इस विवाद की खास बात यह है कि दोनों पार्टियों ने प्रतिद्वंद्वी नेता को निशाना बनाने वाले आपत्तिजनक AI वीडियो खुद बनाने से इनकार किया है। इसके बावजूद इन वीडियो को प्रेस कॉन्फ्रेंस या पार्टी से जुड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिखाए या साझा किए जाने को लेकर राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं।
‘UP बदनाम हुआ, टीपू तेरे मारे’ वीडियो से बढ़ा विवाद
सितंबर की शुरुआत में विवाद तब तेज हुआ जब BJP समर्थक बताए गए कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स पर अखिलेश यादव को निशाना बनाने वाला AI-generated वीडियो प्रसारित हुआ।
इसमें अखिलेश यादव के बचपन के उपनाम ‘टीपू’ का इस्तेमाल करते हुए एक व्यंग्यात्मक गाना शामिल था—“UP बदनाम हुआ, टीपू तेरे मारे।” वीडियो में अखिलेश यादव जैसी AI-generated छवि का इस्तेमाल किया गया था और उनकी पूर्व सरकार के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर आरोप लगाए गए थे।
अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस तरह के वीडियो पर आपत्ति जताई। उन्होंने उनकी पत्नी और मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव को लेकर बनाए गए कथित deepfake कंटेंट का मुद्दा भी उठाया और राजनीतिक मुकाबले में परिवार को निशाना बनाए जाने पर नाराजगी जताई।
इसके बाद सामने आया योगी आदित्यनाथ वाला AI वीडियो
इसके बाद एक AI-generated वीडियो सामने आया जिसमें योगी आदित्यनाथ जैसी छवि को व्यंग्यात्मक रूप से दिखाया गया।
अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में वीडियो दिखाते हुए कहा था कि यह समाजवादी पार्टी का वीडियो नहीं है बल्कि उन्हें किसी ने भेजा है। वीडियो में भगवा वस्त्र पहने AI-generated पात्रों को मंदिर की दानपेटी से धन लेते हुए दिखाया गया और योगी आदित्यनाथ जैसी छवि को धूम्रपान करते दिखाया गया। इसके साथ “UP बदनाम हुआ, बाबा तेरे मारे” पंक्ति वाला व्यंग्यात्मक गीत इस्तेमाल किया गया।
वीडियो में दिखाई गई गतिविधियां वास्तविक घटनाओं का प्रमाण नहीं हैं; वे AI-generated राजनीतिक व्यंग्य का हिस्सा थीं। वीडियो में शासन, कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और बेरोजगारी जैसे विषयों पर भी राजनीतिक आरोप लगाए गए।
BJP ने लगाया ‘सनातन के अपमान’ का आरोप
BJP ने वीडियो पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए SP पर साधु-संतों और सनातन परंपरा का अपमान करने का आरोप लगाया।
उत्तर प्रदेश BJP ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस तरह का वीडियो दिखाकर अखिलेश यादव ने अपनी राजनीतिक सोच उजागर की है। यह BJP का राजनीतिक आरोप है, स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं।
BJP सांसद जगदंबिका पाल ने भी वीडियो पर सवाल उठाते हुए कहा कि अखिलेश यादव स्वयं मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उन्हें राजनीतिक मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। वहीं UP BJP के महासचिव सुब्रत पाठक ने योगी आदित्यनाथ की धार्मिक पहचान का उल्लेख करते हुए SP के वीडियो की आलोचना की।
अखिलेश का जवाब—AI से हमला होगा तो जवाब भी मिलेगा
अखिलेश यादव ने इस विवाद के दौरान BJP पर AI का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।
हाल में उन्होंने कहा कि AI का उपयोग रचनात्मक उद्देश्यों के लिए होना चाहिए, गलत कामों के लिए नहीं। उन्होंने BJP पर इसका नकारात्मक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। यह आरोप BJP द्वारा स्वीकार किया गया तथ्य नहीं है।
इससे पहले AI वीडियो विवाद पर अखिलेश ने कहा था कि अगर BJP उन्हें निशाना बनाने के लिए AI से गाने बनाएगी, तो जवाब भी गानों के जरिए दिया जाएगा।
फिर आया ‘80s फिल्म’ स्टाइल AI वीडियो
विवाद यहीं नहीं रुका।
18 सितंबर को एक और AI-generated शॉर्ट फिल्म सामने आई, जिसे अखिलेश यादव की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाया गया। फिल्म को 1980 के दशक की बॉलीवुड शैली में तैयार किया गया था।
इसमें अखिलेश यादव जैसे AI किरदार को ‘Angry Young Man’ शैली में और योगी आदित्यनाथ जैसे किरदार को विरोधी पात्र के रूप में दिखाया गया। वीडियो में कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता, शिक्षा व्यवस्था और किसानों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को निशाना बनाया गया।
वीडियो में योगी जैसे AI किरदार के मुंह से कई कथित बयान भी कहलवाए गए। ये वास्तविक योगी आदित्यनाथ के बयान नहीं थे, बल्कि काल्पनिक AI-generated राजनीतिक सामग्री का हिस्सा थे।
गोरखपुर को लेकर भी इस्तेमाल हुआ AI वीडियो
AI वीडियो का इस्तेमाल दूसरे स्थानीय मुद्दों को उठाने में भी दिखाई दिया।
10 सितंबर को गोरखपुर की नागरिक सुविधाओं पर चर्चा करते समय अखिलेश यादव ने एक AI वीडियो दिखाया, जिसमें योगी आदित्यनाथ और गोरखपुर सांसद रवि किशन जैसे दिखाई देने वाले AI पात्र नाचते नजर आए। इसे नागरिक सुविधाओं की शिकायत करने वाले लोगों के वास्तविक वीडियो के साथ प्रस्तुत किया गया।
यह दिखाता है कि AI का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत राजनीतिक कटाक्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्थानीय शासन और चुनावी मुद्दों को पेश करने के तरीके में भी प्रवेश कर रहा है।
2027 चुनाव से पहले क्यों महत्वपूर्ण है यह AI जंग?
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले BJP और SP के बीच राजनीतिक संचार तेजी से डिजिटल होता दिखाई दे रहा है।
AI tools कम समय और अपेक्षाकृत कम लागत में ऐसे वीडियो, आवाज और दृश्य तैयार कर सकते हैं जो पहली नजर में वास्तविक लग सकते हैं। राजनीतिक व्यंग्य के लिए यही तकनीक प्रभावी हो सकती है, लेकिन जब AI-generated सामग्री स्पष्ट रूप से चिह्नित न हो तो दर्शकों के लिए वास्तविक फुटेज और कृत्रिम सामग्री के बीच अंतर करना कठिन हो सकता है।
मौजूदा विवाद में भी यही अंतर महत्वपूर्ण है: AI वीडियो में नेताओं के पात्रों द्वारा किए गए काम या बोले गए संवाद वास्तविक घटना या बयान का प्रमाण नहीं माने जा सकते।
BJP और SP दोनों ने वीडियो बनाने से किया इनकार
इस पूरे विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि BJP और SP दोनों ने प्रतिद्वंद्वी नेताओं को निशाना बनाने वाले आपत्तिजनक AI वीडियो खुद तैयार करने के दावे को खारिज किया है।
Indian Express की 24 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों पक्षों ने ऐसे “derogatory” वीडियो बनाने से इनकार किया, हालांकि BJP ने सवाल उठाया कि यदि SP ने वीडियो नहीं बनाया तो उसे पार्टी प्रमुख की प्रेस कॉन्फ्रेंस या पार्टी प्लेटफॉर्म के जरिए क्यों प्रदर्शित किया गया।
इसलिए वीडियो किसने मूल रूप से तैयार किए, और पार्टी संगठन तथा समर्थक सोशल मीडिया नेटवर्क के बीच इनका प्रसार किस तरह हुआ—इन दोनों बातों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
AI बन रहा चुनावी संचार का नया मोर्चा
उत्तर प्रदेश में चल रहा यह विवाद एक बड़े बदलाव की ओर संकेत करता है: चुनावी राजनीति में generative AI अब केवल तकनीकी प्रयोग नहीं रह गया है।
AI-generated satire, songs, synthetic images और short films राजनीतिक संदेशों को तेजी से सोशल मीडिया तक पहुंचाने में सक्षम हैं। साथ ही, यही तकनीक वास्तविक और कृत्रिम सामग्री के बीच की सीमा को धुंधला कर सकती है।
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ते हुए BJP और SP की यह AI-video लड़ाई बताती है कि आने वाले महीनों में राजनीतिक बहस सिर्फ यह नहीं होगी कि क्या कहा जा रहा है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि किसने बनाया, क्या वह वास्तविक है और उसे किस तरह प्रसारित किया गया।
