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राजनीति

‘वंदे मातरम्’ विवाद तेज: दो अंतरे या पूरा गीत? BJP और कांग्रेस के बीच छिड़ी सियासी जंग

राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस ने अपने पार्टी कार्यक्रमों में पहले दो अंतरों को गाने की अपनी ऐतिहासिक परंपरा का समर्थन किया है, जबकि BJP इसे लेकर कांग्रेस पर राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति असम्मान और तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगा रही है। कांग्रेस इन आरोपों को खारिज करते हुए अपने रुख को समावेशिता और 1937 के ऐतिहासिक फैसले से जोड़ रही है।

‘वंदे मातरम्’ विवाद तेज: दो अंतरे या पूरा गीत? BJP और कांग्रेस के बीच छिड़ी सियासी जंग
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: TOI

‘वंदे मातरम्’ पर BJP-कांग्रेस आमने-सामने

नई दिल्ली: देश के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। स्वतंत्रता दिवस के आसपास शुरू हुआ विवाद अब BJP और कांग्रेस के बीच राष्ट्रवाद, इतिहास और राष्ट्रीय प्रतीकों की व्याख्या को लेकर बड़े राजनीतिक टकराव में बदल गया है।

ताजा विवाद का केंद्र कांग्रेस का वह रुख है, जिसमें पार्टी कार्यक्रमों के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के पहले दो अंतरों को गाने की परंपरा का समर्थन किया गया है। कांग्रेस कार्यसमिति ने इसके पीछे 1937 के अपने ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया है। दूसरी ओर BJP का कहना है कि राष्ट्रीय गीत को इस तरह सीमित करना उचित नहीं है।

स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम से बढ़ा विवाद

विवाद ने उस समय जोर पकड़ा जब 15 अगस्त को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के वीडियो सामने आए। BJP नेताओं ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान सोनिया गांधी ने कथित तौर पर ‘वंदे मातरम्’ के गायन को रोकने का संकेत दिया।

कांग्रेस ने इस आरोप को खारिज किया। पार्टी नेताओं के अनुसार कार्यक्रम में गीत के गायन को रोकने की कोशिश नहीं हुई और वायरल वीडियो की गलत व्याख्या की गई। बाद में BJP नेताओं ने इस मामले को लेकर कर्नाटक में सोनिया गांधी के खिलाफ पुलिस शिकायतें भी दर्ज कराईं।

इसलिए यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सोनिया गांधी द्वारा गीत रोकने की बात BJP का आरोप है, स्थापित तथ्य नहीं; कांग्रेस ने इसका स्पष्ट रूप से खंडन किया है।

कांग्रेस ने क्यों चुने पहले दो अंतरे?

कांग्रेस अपने मौजूदा रुख को करीब नौ दशक पुराने ऐतिहासिक निर्णय से जोड़ रही है। 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने सार्वजनिक और राष्ट्रीय अवसरों पर ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती दो अंतरों के इस्तेमाल का समर्थन किया था।

इस बहस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि गीत के बाद के हिस्सों में मौजूद धार्मिक प्रतीकों से जुड़ी है। शुरुआती दो अंतरे मातृभूमि और उसकी प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन करते हैं, जबकि बाद के हिस्सों में देवी-स्वरूपों के संदर्भ आते हैं। इन्हीं धार्मिक संदर्भों को लेकर स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में कुछ समुदायों की आपत्तियां सामने आई थीं।

कांग्रेस का तर्क है कि शुरुआती दो अंतरों तक सीमित रहने की नीति कोई नया राजनीतिक फैसला नहीं है, बल्कि एक ऐतिहासिक परंपरा की निरंतरता है।

अमित शाह का कांग्रेस पर तीखा हमला

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर कांग्रेस की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कांग्रेस के दो अंतरे गाने के रुख को राष्ट्रहित के खिलाफ बताते हुए इसे पार्टी की कथित तुष्टिकरण नीति से जोड़ा। BJP इस मुद्दे को राष्ट्रीय सम्मान और देशभक्ति से जोड़कर कांग्रेस को घेर रही है।

BJP के दूसरे नेताओं ने भी कांग्रेस के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि राष्ट्रीय गीत को उसकी संपूर्णता में सम्मान दिया जाना चाहिए।

कांग्रेस का पलटवार

कांग्रेस ने BJP के आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि BJP एक ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील मुद्दे को वर्तमान राजनीतिक ध्रुवीकरण के लिए इस्तेमाल कर रही है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश सहित कई नेताओं ने BJP की राष्ट्रवाद संबंधी आलोचना का जवाब देते हुए पार्टी के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े इतिहास का उल्लेख किया है। कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने भी पार्टी के रुख को तुष्टिकरण के बजाय समावेशिता से जुड़ा बताया।

‘वंदे मातरम्’ का ऐतिहासिक महत्व

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे प्रभावशाली प्रतीकों में से एक रहा है। 1905 के स्वदेशी आंदोलन के दौरान यह ब्रिटिश शासन के खिलाफ जनभावना और राष्ट्रीय चेतना का प्रमुख उद्घोष बना।

आजादी के बाद इसके शुरुआती हिस्से को राष्ट्रीय गीत के रूप में विशेष सम्मान मिला। हालांकि इसके कुछ बाद के अंतरों में धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर बहस का इतिहास भी काफी पुराना है। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण ‘वंदे मातरम्’ से जुड़ी बहस केवल गीत तक सीमित नहीं रहती, बल्कि राष्ट्रीय पहचान, धर्मनिरपेक्षता और सांस्कृतिक विरासत जैसे प्रश्नों तक पहुंच जाती है।

विवाद क्यों महत्वपूर्ण है?

यह विवाद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों प्रमुख राष्ट्रीय दल इसे अलग-अलग राजनीतिक और वैचारिक दृष्टिकोण से देख रहे हैं।

BJP के लिए मुद्दा राष्ट्रीय प्रतीकों के पूर्ण सम्मान और राष्ट्रवादी पहचान से जुड़ा है। पार्टी कांग्रेस के रुख को इसी कसौटी पर चुनौती दे रही है।

दूसरी ओर कांग्रेस अपने फैसले को ऐतिहासिक परंपरा, धार्मिक समावेशिता और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान विकसित सहमति से जोड़ती है।

यही कारण है कि बहस अब केवल इस प्रश्न तक सीमित नहीं है कि ‘वंदे मातरम्’ के कितने अंतरे गाए जाएं। इसके केंद्र में यह बड़ा सवाल भी है कि आधुनिक भारत में ऐतिहासिक राष्ट्रीय प्रतीकों की व्याख्या किस तरह की जानी चाहिए।

संतुलित विश्लेषण

‘वंदे मातरम्’ का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान निर्विवाद रूप से महत्वपूर्ण रहा है। इसलिए इससे जुड़ी कोई भी राजनीतिक बहस स्वाभाविक रूप से भावनात्मक और प्रतीकात्मक महत्व हासिल करती है।

BJP की दलील राष्ट्रीय गीत की संपूर्णता और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान पर केंद्रित है। वहीं कांग्रेस का तर्क यह है कि पहले दो अंतरों के इस्तेमाल की परंपरा ऐतिहासिक है और इसका उद्देश्य विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच समावेशी दृष्टिकोण बनाए रखना था।

दोनों पक्षों की बयानबाजी के बीच इतिहास और वर्तमान राजनीति को अलग-अलग समझना जरूरी है। 1930 के दशक में लिए गए निर्णय तत्कालीन सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित थे, जबकि 2026 की बहस आज की चुनावी राजनीति, राष्ट्रवाद और पहचान की राजनीति के संदर्भ में चल रही है।

आने वाले दिनों में यह विवाद केवल ‘वंदे मातरम्’ के अंतरों की संख्या पर नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद की राजनीतिक परिभाषा और राष्ट्रीय प्रतीकों की व्याख्या पर व्यापक बहस का हिस्सा बना रह सकता है।

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