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राजनीति

विपक्ष ने पांच विधेयक टलने को बताया बड़ी जीत, कहा—एकजुट दबाव के आगे पीछे हटी सरकार

संसद के मानसून सत्र के समापन के बाद विपक्ष ने दावा किया है कि उसकी एकजुट रणनीति के कारण केंद्र सरकार को पांच प्रस्तावित विधेयकों पर आगे बढ़ने की योजना टालनी पड़ी। विपक्ष इसे अपनी संसदीय रणनीति की बड़ी सफलता बता रहा है। दूसरी ओर, सरकार ने सत्र में हुए विधायी कामकाज को सफल बताया है, जिससे मानसून सत्र की उपलब्धियों को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग तस्वीर सामने आई है।

विपक्ष ने पांच विधेयक टलने को बताया बड़ी जीत, कहा—एकजुट दबाव के आगे पीछे हटी सरकार
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Mirror Now

पांच विधेयक टलने पर विपक्ष ने जताई खुशी

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र समाप्त होने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अब सत्र की उपलब्धियों को लेकर राजनीतिक लड़ाई तेज हो गई है। विपक्ष ने पांच प्रस्तावित विधेयकों के आगे नहीं बढ़ पाने को अपनी बड़ी संसदीय जीत के रूप में पेश किया है। उसका कहना है कि विभिन्न विपक्षी दलों की एकजुटता और लगातार बनाए गए दबाव के चलते सरकार को इन विधायी योजनाओं को फिलहाल टालना पड़ा।

कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को विपक्षी एकता की सफलता से जोड़ते हुए दावा किया कि सरकार अपनी पूरी विधायी योजना के अनुसार आगे नहीं बढ़ सकी। विपक्ष के मुताबिक, यह घटनाक्रम दिखाता है कि संसद में संख्या बल के साथ-साथ राजनीतिक समन्वय और रणनीति भी सरकार के एजेंडे को प्रभावित कर सकती है।

परिसीमन का मुद्दा रहा राजनीतिक रूप से संवेदनशील

विपक्ष के दावे में परिसीमन से जुड़ा प्रस्ताव खास तौर पर महत्वपूर्ण रहा। निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और प्रतिनिधित्व से जुड़ा परिसीमन पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषय है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ना चाहती थी, जबकि विपक्ष इसे व्यापक राजनीतिक सहमति से जोड़कर देखता रहा है।

मानसून सत्र शुरू होने से पहले सामने आए सरकार के संभावित विधायी एजेंडे में भी परिसीमन से जुड़ा विधेयक शामिल नहीं था, जबकि FCRA से संबंधित प्रस्ताव समेत अन्य नए विधेयकों की चर्चा थी। इससे यह संकेत पहले ही मिल चुका था कि कुछ विवादास्पद विषयों पर सरकार का रास्ता आसान नहीं होगा।

FCRA विधेयक भी बना टकराव का मुद्दा

Foreign Contribution Regulation Act यानी FCRA से जुड़े प्रस्ताव को लेकर भी सरकार और विपक्ष आमने-सामने रहे। कांग्रेस ने इस विधेयक को वापस लेने की मांग की थी। आखिरकार इसे सीधे पारित कराने के बजाय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजे जाने से विपक्ष को अपनी आपत्तियों को आगे रखने का अतिरिक्त अवसर मिला।

FCRA विदेशी चंदे और विदेशी वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले संगठनों से जुड़ा महत्वपूर्ण कानूनी ढांचा है। इसलिए इसमें किसी बड़े बदलाव का असर गैर-सरकारी संगठनों और अन्य पात्र संस्थाओं पर पड़ सकता है। यही कारण है कि इससे संबंधित संशोधनों पर राजनीतिक बहस तेज रही।

हंगामे और टकराव से प्रभावित रहा मानसून सत्र

मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर लगातार गतिरोध देखने को मिला। छात्र प्रदर्शन, NEET से जुड़े विवाद और दूसरे राजनीतिक मुद्दों के कारण दोनों सदनों में कई बार कार्यवाही बाधित हुई। सत्र के अंतिम चरण में विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी और जवाब की मांग को लेकर भी सरकार पर दबाव बनाए रखा।

इस टकराव का सीधा असर संसदीय कामकाज पर भी दिखाई दिया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार लोकसभा की उत्पादकता करीब 19 प्रतिशत और राज्यसभा की लगभग 39 प्रतिशत रही। इसके बावजूद कई विधेयकों को संसद से मंजूरी मिली।

सरकार का पक्ष: विधायी कामकाज के लिहाज से सत्र सफल

विपक्ष जहां पांच प्रस्तावों के टलने को अपनी सफलता बता रहा है, वहीं सरकार की तस्वीर अलग है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विधायी कामकाज के लिहाज से सत्र को सफल बताया। रिपोर्टों के मुताबिक, हंगामे और कम उत्पादकता के बावजूद सरकार कई विधेयकों को आगे बढ़ाने और पारित कराने में सफल रही।

इसलिए विपक्ष का “जीत” का दावा मुख्य रूप से उन प्रस्तावों पर आधारित राजनीतिक आकलन है जिन्हें वह रोकना या टालना चाहता था। इसे पूरे मानसून सत्र में सरकार के विधायी एजेंडे की विफलता के रूप में देखना सही नहीं होगा, क्योंकि इसी अवधि में कई अन्य विधेयक पारित भी हुए।

क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?

इस घटनाक्रम का महत्व सिर्फ पांच विधेयकों के आगे नहीं बढ़ने तक सीमित नहीं है। यह आने वाले संसदीय सत्रों में सरकार और विपक्ष के बीच रणनीतिक टकराव की दिशा भी तय कर सकता है।

यदि विपक्ष अपनी मौजूदा एकजुटता बनाए रखता है, तो विवादास्पद या संवैधानिक रूप से महत्वपूर्ण विधेयकों पर सरकार के लिए व्यापक राजनीतिक समर्थन जुटाने की आवश्यकता बढ़ सकती है। वहीं सरकार के पास अपने विधायी प्रस्तावों को दोबारा लाने, उनमें बदलाव करने या संसदीय समितियों के जरिए आगे बढ़ाने के विकल्प मौजूद रहेंगे।

संतुलित विश्लेषण

विपक्ष के नजरिए से पांच प्रस्तावित विधेयकों का टलना मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक बढ़त है। इससे वह यह संदेश देने की कोशिश कर सकता है कि संसद में संगठित रणनीति के जरिए सरकार पर दबाव बनाया जा सकता है।

लेकिन दूसरा पहलू यह है कि मानसून सत्र में सरकार कई विधेयकों को पारित कराने में सफल रही। ऐसे में सत्र को केवल सरकार की हार या विपक्ष की पूर्ण जीत के रूप में देखना तस्वीर को अधूरा कर देगा। अधिक सटीक निष्कर्ष यह है कि भारी राजनीतिक टकराव के बीच सरकार ने अपने विधायी एजेंडे का एक हिस्सा आगे बढ़ाया, जबकि विपक्ष कुछ संवेदनशील प्रस्तावों को फिलहाल रोकने या धीमा करने में सफल होने का दावा कर रहा है।

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