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राजनीति

वोट चोरी के आरोपों पर अमित शाह का पलटवार, राहुल गांधी को संसद में खुली बहस की चुनौती; SIR और EVM पर बढ़ा सियासी घमासान।

नई दिल्ली: देश में चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची को लेकर चल रही राजनीतिक बहस अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और INDIA गठबंधन की ओर से उठाए जा रहे 'वोट चोरी' के आरोपों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को हैदराबाद से राहुल गांधी को खुली चुनौती दे दी। शाह ने कहा कि सरकार SIR, EVM और अवैध घुसपैठ जैसे मुद्दों पर संसद का विशेष सत्र बुलाकर चर्चा करने के लिए तैयार है। उन्होंने राहुल गांधी को सदन में आकर इन मुद्दों पर बहस करने की चुनौती भी दी।

वोट चोरी के आरोपों पर अमित शाह का पलटवार, राहुल गांधी को संसद में खुली बहस की चुनौती; SIR और EVM पर बढ़ा सियासी घमासान।
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: The Economic Times, Hindustan Times, The Indian Express, ThePrint, PTI.

अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 'वोट बचाओ' रैली आयोजित की थी। विपक्ष लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होता दिखाई दे रहा है।

अमित शाह ने राहुल गांधी को क्यों दी चुनौती?

हैदराबाद में भारतीय जनता पार्टी की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा का नेतृत्व करते हुए अमित शाह ने कांग्रेस और INDIA गठबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष SIR की प्रक्रिया का विरोध करके मतदाता सूची को साफ करने की कोशिशों में बाधा डाल रहा है।

शाह ने कहा कि राहुल गांधी संविधान हाथ में लेकर चलते हैं, लेकिन उसका सम्मान नहीं करते और संसद की कार्यवाही भी बाधित करते हैं। उन्होंने SIR, EVM और घुसपैठ के मुद्दों पर विशेष संसद सत्र बुलाने की बात कही और राहुल गांधी को चर्चा के लिए सामने आने की चुनौती दी।

गृह मंत्री ने विपक्ष की दिल्ली रैली पर भी निशाना साधते हुए उसे 'घुसपैठिया बचाओ रैली' करार दिया। उनका आरोप था कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल अवैध घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। हालांकि, ये शाह के राजनीतिक आरोप हैं, जिन्हें विपक्ष स्वीकार नहीं करता।

क्या है SIR, जिस पर छिड़ी है राजनीतिक जंग?

SIR यानी Special Intensive Revision, जिसे हिंदी में विशेष गहन पुनरीक्षण कहा जाता है। यह चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की व्यापक जांच और संशोधन की प्रक्रिया है।

इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना, मृत मतदाताओं के नाम हटाना, एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों की पहचान करना और पात्र मतदाताओं का विवरण सही करना है।

सरकार और भाजपा का तर्क है कि चुनाव निष्पक्ष रखने के लिए मतदाता सूची में केवल पात्र भारतीय नागरिकों के नाम होने चाहिए। वहीं विपक्ष का कहना है कि इस प्रक्रिया के दौरान वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम भी सूची से हटने का खतरा है। विपक्ष विशेष रूप से गरीबों, प्रवासी मजदूरों और दस्तावेजी परेशानियों का सामना कर रहे लोगों को लेकर चिंता जता रहा है।

यही वजह है कि SIR अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि देश की राजनीति में एक बड़ा विवाद बन चुका है।

13 करोड़ वोट हटाने के आरोप पर अमित शाह का जवाब

इस पूरे विवाद में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का मुद्दा सबसे अहम है। राहुल गांधी की ओर से लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप उठाया गया है। इसके जवाब में अमित शाह ने इस आंकड़े को गलत बताते हुए अलग-अलग श्रेणियों का हवाला दिया।

शाह के मुताबिक, हटाए गए नामों में लगभग 6.15 करोड़ ऐसे मतदाता थे, जो अपना स्थान बदल चुके थे। करीब 2.8 से 3 करोड़ मृत मतदाता बताए गए और लगभग एक करोड़ नाम डुप्लीकेट प्रविष्टियों से संबंधित बताए गए। उन्होंने इसके अलावा लगभग तीन करोड़ ऐसे नामों का भी जिक्र किया, जिन्हें उन्होंने कथित घुसपैठियों से जोड़ा।

हालांकि, इन आंकड़ों और उनके वर्गीकरण को लेकर स्वतंत्र सत्यापन और पारदर्शिता जरूरी है। किसी मतदाता का नाम सूची से हटना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह व्यक्ति विदेशी नागरिक या घुसपैठिया है। ऐसे मामलों में संबंधित रिकॉर्ड और चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

EVM पर भी आमने-सामने होंगे BJP और कांग्रेस?

SIR के साथ-साथ EVM यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन भी इस राजनीतिक विवाद का बड़ा हिस्सा है। कांग्रेस सहित विपक्षी दल समय-समय पर चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और EVM की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।

अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर EVM में गड़बड़ी है, तो कांग्रेस तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में चुनाव कैसे जीतती है? उनका तर्क है कि विपक्ष अपनी हार के बाद EVM पर सवाल उठाता है, जबकि जीत मिलने पर इसी व्यवस्था को स्वीकार कर लेता है।

दूसरी ओर, विपक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का जवाब देना सरकार और चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। लोकतंत्र में मतदान की विश्वसनीयता केवल परिणामों से नहीं, बल्कि प्रक्रिया की पारदर्शिता और जनता के भरोसे से भी तय होती है।

INDIA गठबंधन की 'वोट बचाओ' रैली से बढ़ा विवाद

अमित शाह की चुनौती से पहले रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन के नेताओं ने एकजुट होकर चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। इस रैली में विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोपों को प्रमुखता से उठाया।

विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट सुरक्षित रहना चाहिए और मतदाता सूची में किसी भी तरह की मनमानी नहीं होनी चाहिए। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग से जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग की।

इसके जवाब में भाजपा ने विपक्ष पर चुनावी हार का ठीकरा संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ने का आरोप लगाया है। इस तरह SIR को लेकर शुरू हुआ विवाद अब BJP बनाम कांग्रेस की सीधी राजनीतिक लड़ाई में बदलता नजर आ रहा है।

क्या संसद में होगी SIR और EVM पर बड़ी बहस?

अमित शाह ने विशेष संसद सत्र बुलाने की बात जरूर कही है, लेकिन फिलहाल इसे विशेष सत्र की आधिकारिक घोषणा नहीं माना जा सकता। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार वास्तव में इन मुद्दों पर संसद में चर्चा कराने के लिए आगे बढ़ेगी और क्या राहुल गांधी इस चुनौती को स्वीकार करेंगे?

अगर संसद में इस मुद्दे पर चर्चा होती है, तो मतदाता सूची के पुनरीक्षण, वोट हटाने की प्रक्रिया, कथित घुसपैठ, EVM की विश्वसनीयता और चुनाव आयोग की जवाबदेही जैसे कई अहम सवाल उठ सकते हैं।

यह विवाद केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई नहीं है। इसका सीधा संबंध देश के करोड़ों मतदाताओं के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनके विश्वास से है।

फिलहाल अमित शाह की चुनौती ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। अब देखना होगा कि राहुल गांधी इस चुनौती का जवाब किस अंदाज में देते हैं और क्या SIR तथा EVM पर संसद में कोई बड़ी बहस देखने को मिलती है।

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