दिल्ली में यमुना नदी के पुनरुद्धार से जुड़ी 8,941 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास के दौरान अमित शाह ने राहुल गांधी को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव जीतने पर चुनाव आयोग और मतदाता सूची को सही मानती है, लेकिन हार मिलने पर इन्हीं संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगती है।
गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष अपनी राजनीतिक असफलताओं से ध्यान हटाने के लिए बार-बार चुनावी धांधली का मुद्दा उठाता है। उनके इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच चुनावी पारदर्शिता को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
‘जीतने पर चुनाव आयोग सही, हारने पर गलत’ — अमित शाह
राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए अमित शाह ने सवाल उठाया कि कांग्रेस का चुनाव आयोग के प्रति रवैया चुनाव परिणामों के अनुसार क्यों बदल जाता है।
उन्होंने तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की जीत का उदाहरण दिया। साथ ही तमिलनाडु में कांग्रेस समर्थित गठबंधन की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि जब विपक्ष को अनुकूल परिणाम मिलते हैं, तब चुनावी व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाए जाते।
शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव हारने के बाद कभी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) और कभी मतदाता सूची में गड़बड़ी का मुद्दा उठाती है। उन्होंने न्यायपालिका के प्रति विपक्ष के रवैये पर भी सवाल उठाए और दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
‘वोट चोरी के नाम पर घुसपैठियों के वोट बचाने की कोशिश’
अमित शाह ने राहुल गांधी और उनके सहयोगियों पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाते हुए कहा कि ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाने के पीछे घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में बनाए रखने की कोशिश है।
शाह का कहना था कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने विपक्ष पर इस प्रक्रिया का राजनीतिक विरोध करने का आरोप लगाया।
हालांकि, घुसपैठियों के वोट बचाने संबंधी बयान अमित शाह का आरोप है। इसे कांग्रेस के विरुद्ध प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। वहीं कांग्रेस लगातार दावा करती रही है कि उसकी आपत्ति पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से संबंधित है।
राहुल गांधी ने गोवा में लगाए थे गंभीर आरोप
इस विवाद की पृष्ठभूमि में राहुल गांधी का 18 अक्टूबर 2026 का गोवा दौरा भी महत्वपूर्ण है।
दक्षिण गोवा के मडगांव में कांग्रेस की ‘गोय राखण यात्रा’ के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनावी गड़बड़ियों से संबंधित गंभीर आरोप लगाए थे।
राहुल ने दावा किया था कि कथित ‘वोट चोरी’ की योजना प्रधानमंत्री के स्तर पर तैयार होती है, अमित शाह उसका संचालन करते हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त उसे लागू करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा था कि कथित चुनावी अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि इन समाचार रिपोर्टों में नहीं हुई है।
‘अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं आएगी कांग्रेस’
अमित शाह ने अपने भाषण में कांग्रेस की चुनावी स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से बाहर है और इनमें से अनेक चुनावी असफलताएं नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले की हैं।
उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से चुनावी हार के कारणों पर आत्ममंथन करने को कहा।
शाह ने तंज कसते हुए कहा कि जब वह भाजपा के लंबे समय तक सत्ता में बने रहने की बात करते हैं, तब विपक्ष उसे भी ‘वोट चोरी’ के आरोपों से जोड़ देता है।
उन्होंने राहुल गांधी के विदेश दौरे को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि वह देश की जनता के बीच रहकर राजनीतिक परिस्थितियों को समझते हैं।
हालांकि, अगले 30 वर्षों तक सत्ता में बने रहने का दावा एक राजनीतिक अनुमान है। किसी भी आगामी चुनाव का परिणाम पहले से निश्चित नहीं माना जा सकता।
SIR को लेकर क्यों बढ़ा राजनीतिक विवाद?
मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR भी इस राजनीतिक टकराव का महत्वपूर्ण मुद्दा है।
चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची की जाँच और अद्यतन करना है, ताकि पात्र नागरिकों के नाम दर्ज रहें और अपात्र या गलत प्रविष्टियों को नियमानुसार सुधारा जा सके।
भाजपा का तर्क है कि निष्पक्ष चुनावों के लिए मतदाता सूची का सही होना आवश्यक है।
दूसरी ओर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने प्रक्रिया की पारदर्शिता तथा वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका जताई है।
13 अक्टूबर को भी अमित शाह ने विपक्ष के इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा था कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए कानून के अनुसार तैयार मतदाता सूची जरूरी है।
यमुना सफाई की 8,941 करोड़ रुपये की परियोजनाएं भी चर्चा में
जिस कार्यक्रम में अमित शाह ने राहुल गांधी पर निशाना साधा, उसका मुख्य उद्देश्य दिल्ली में जल और सीवेज प्रबंधन से संबंधित परियोजनाओं की शुरुआत करना था।
इस अवसर पर दिल्ली जल बोर्ड की कुल 43 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। इनकी कुल लागत 8,941 करोड़ रुपये बताई गई।
अमित शाह ने दावा किया कि सरकार यमुना नदी को स्वच्छ बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने वर्ष 2029 तक यमुना की सफाई में महत्वपूर्ण सुधार लाने का वादा भी किया।
इसके अलावा उन्होंने आम आदमी पार्टी और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आलोचना की। शाह ने पिछली सरकारों पर यमुना प्रदूषण और नागरिक सुविधाओं की उपेक्षा करने के आरोप लगाए।
चुनावी पारदर्शिता पर राजनीतिक बहस जारी
अमित शाह और राहुल गांधी के बीच बढ़ती बयानबाजी ने चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है।
एक तरफ कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जाँच की मांग कर रही है, जबकि दूसरी तरफ भाजपा आरोपों को चुनावी हार से ध्यान हटाने की कोशिश बता रही है।
इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि राजनीतिक आरोपों की जाँच ठोस साक्ष्यों, कानूनी प्रक्रियाओं और पारदर्शी संस्थागत व्यवस्था के आधार पर कैसे सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल दोनों प्रमुख दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। आने वाले समय में चुनाव आयोग की कार्रवाई, मतदाता सूची की पुनरीक्षण प्रक्रिया और राजनीतिक दलों द्वारा प्रस्तुत प्रमाण इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
