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राजनीति

‘Vote Chori’ पर राहुल गांधी का नया हमला: Express रिपोर्ट के बाद BJP, RSS और चुनाव आयोग पर लगाए ‘देशद्रोह’ के आरोप

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर कथित ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाते हुए BJP, RSS और Election Commission पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनकी प्रतिक्रिया The Indian Express की उस जांच रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर चुनावी प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने कहा है कि SIR समेत आयोग के सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

‘Vote Chori’ पर राहुल गांधी का नया हमला: Express रिपोर्ट के बाद BJP, RSS और चुनाव आयोग पर लगाए ‘देशद्रोह’ के आरोप
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: The Indian Express

नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपने ‘Vote Chori’ आरोपों को फिर दोहराया है। उन्होंने BJP, RSS और Election Commission (EC) पर निशाना साधते हुए इसे भारतीय नागरिकों और संविधान के खिलाफ गंभीर मामला बताया।

राहुल गांधी की यह प्रतिक्रिया The Indian Express की एक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद आई। रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) और उससे जुड़े कई फैसलों को लेकर मतभेद और लिखित आपत्तियां होने का दावा किया गया है।

राहुल गांधी ने X पर लिखा:

“Vote chori is a crime against the Indian people and a direct attack on our constitution.”

इसके बाद उन्होंने BJP, RSS और EC पर इसे संगठित करने का आरोप लगाते हुए इसे “act of treason” कहा और लिखा, “Justice will be served.”

यह राहुल गांधी का आरोप है; रिपोर्टिंग के आधार पर यह स्थापित तथ्य नहीं है कि BJP, RSS या Election Commission ने ‘vote chori’ आयोजित की। चुनाव आयोग ने इसके विपरीत कहा है कि SIR सहित उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

Express की जांच में क्या सामने आया?

The Indian Express की जांच के मुताबिक, Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi ने पिछले लगभग 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के विभिन्न कदमों और फैसलों पर औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज की।

रिपोर्ट के अनुसार, ये आपत्तियां सामान्य प्रशासनिक मामलों तक सीमित नहीं थीं। इनमें नए मतदाताओं का पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाना और बहाल करना, SIR से जुड़े आदेशों के खिलाफ अपील तथा मतदाता डेटाबेस की पहुंच और सुरक्षा जैसे विषय शामिल थे।

जांच में यह भी कहा गया कि कुछ मामलों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने ऐसे फैसलों पर सवाल उठाए जिनके बारे में उनका कहना था कि उन्हें पहले जानकारी या मंजूरी नहीं दी गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, एक मौके पर संधू ने आयोग के एक कदम को दोनों चुनाव आयुक्तों की लिखित सलाह के विपरीत बताते हुए उसे “unauthorised and illegal” कहा था।

Form 6 में बदलाव पर भी उठे सवाल

विवाद का एक अहम हिस्सा Form 6 से जुड़ा है, जिसका इस्तेमाल नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए किया जाता है।

The Indian Express के अनुसार, ECINet पोर्टल पर Form 6 में एक अतिरिक्त declaration जोड़ा गया था। जांच में सामने आए आंतरिक रिकॉर्ड के मुताबिक, आयोग के दो सदस्यों ने मई में यह राय दर्ज की थी कि Registration of Electors Rules, 1960 में आवश्यक बदलाव किए बिना ऐसा परिवर्तन नहीं किया जा सकता।

रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित सेक्शन को औपचारिक रूप से mandatory नहीं बताया गया था, लेकिन आवेदक उसका जवाब दिए बिना ऑनलाइन फॉर्म जमा नहीं कर पा रहे थे।

मतदाता डेटाबेस के ‘centralisation’ पर चिंता

Express की जांच का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा Election Commission के डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet से जुड़ा है।

रिपोर्ट के अनुसार, संधू और जोशी ने मतदाता सूची के डेटाबेस के धीरे-धीरे दिल्ली में केंद्रीकृत होने को लेकर चिंता जताई। उनका सवाल कथित तौर पर इस बात पर केंद्रित था कि कानून के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की जिम्मेदारी रखने वाले राज्य और स्थानीय स्तर के Electoral Registration Officers की सिस्टम तक पहुंच कहीं सीमित तो नहीं हो रही।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने IT सिस्टम और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़े बदलावों को लेकर Cabinet Secretary तक अपनी चिंताएं पहुंचाईं।

SIR के दौरान 13 करोड़ से अधिक नाम draft rolls से बाहर

इस विवाद की पृष्ठभूमि में Special Intensive Revision यानी SIR भी है।

The Indian Express के मुताबिक, जून 2025 में बिहार से शुरू हुए SIR के बाद 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की draft voter rolls से 13 करोड़ से अधिक नाम बाहर हुए

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है: draft electoral roll से किसी नाम का बाहर होना अपने-आप में अंतिम और स्थायी मताधिकार समाप्ति के बराबर नहीं होता। मतदाता सूची के revision में claims, objections और corrections जैसी प्रक्रियाएं भी होती हैं।

इसीलिए इन आंकड़ों को सीधे तौर पर ‘13 करोड़ वोट चोरी’ के रूप में प्रस्तुत करना उपलब्ध तथ्यों से समर्थित निष्कर्ष नहीं होगा।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

रिपोर्ट सामने आने के बाद Election Commission से जुड़े अधिकारियों/सूत्रों ने आयोग के भीतर अंतिम फैसलों को लेकर असहमति की व्याख्या को चुनौती दी।

उनके मुताबिक, Election Commissioners अपने व्यक्तिगत विचार या चिंताएं दर्ज कर सकते हैं, लेकिन SIR सहित Election Commission के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और उन्हें तीनों सदस्यों की मंजूरी थी।

इस प्रतिक्रिया का अर्थ यह है कि लिखित आपत्तियां दर्ज होने और अंतिम संस्थागत निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाने—दोनों बातें एक साथ संभव हो सकती हैं। हालांकि Express की जांच ने इस सवाल को प्रमुखता से उठाया है कि अंतिम फैसले तक पहुंचने से पहले प्रक्रिया में दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों और जानकारी को किस तरह संभाला गया।

पहले भी ‘Vote Chori’ के आरोप लगा चुके हैं राहुल गांधी

यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने Election Commission को लेकर ‘Vote Chori’ शब्द का इस्तेमाल किया है।

सितंबर की शुरुआत में महाराष्ट्र में SIR के draft rolls से 2.07 करोड़ नाम हटाए जाने के बाद भी उन्होंने BJP और चुनाव आयोग पर निशाना साधा था।

उस समय Election Commission ने स्पष्ट किया था कि 2.07 करोड़ के आंकड़े को उन मतदाताओं की निश्चित संख्या नहीं माना जाना चाहिए जिनके नाम अंतिम मतदाता सूची से हट जाएंगे।

18 सितंबर को पश्चिम बंगाल उपचुनावों से पहले Trinamool Congress के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े चुनाव आयोग के फैसले की आलोचना करते हुए भी राहुल गांधी ने ‘vote chori’, ‘government chori’ और ‘party chori’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था।

क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?

मौजूदा विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। Express की जांच में उठाए गए मुद्दे मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने या बहाल करने, Electoral Registration Officers की भूमिका और चुनावी डेटाबेस के तकनीकी नियंत्रण से जुड़े हैं।

दूसरी ओर, Election Commission का कहना है कि उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

इसलिए फिलहाल दो अलग-अलग स्तरों को अलग रखना जरूरी है: पहला, आयोग के भीतर दर्ज की गई कथित लिखित आपत्तियां, जिनका विवरण Express की जांच में सामने आया है; और दूसरा, राहुल गांधी द्वारा BJP, RSS और Election Commission पर लगाया गया ‘Vote Chori’ तथा ‘treason’ का आरोप, जो उनका राजनीतिक दावा है और जांच रिपोर्ट अपने-आप उस व्यापक आरोप को सिद्ध नहीं करती।

आने वाले समय में इस विवाद का महत्वपूर्ण प्रश्न यह होगा कि चुनाव आयोग इन आंतरिक आपत्तियों, ECINet के नियंत्रण और मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया पर सार्वजनिक रूप से और कितना विस्तृत स्पष्टीकरण देता है।


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