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राजनीति

Xi Jinping से मुलाकात के बाद PM Modi पर Congress का बड़ा हमला, China Policy को बताया ‘Calibrated Capitulation’; पूछे 4 सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की BRICS Summit 2026 के दौरान हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार की China Policy पर तीखा हमला किया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सीमा विवाद, पूर्वी लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, Operation Sindoor और चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर प्रधानमंत्री से चार सवाल पूछे और उनके रुख को “calibrated capitulation” करार दिया। दूसरी ओर, आधिकारिक बयान में भारत ने साफ किया है कि सीमा पर शांति द्विपक्षीय संबंधों के विकास का आवश्यक आधार

Xi Jinping से मुलाकात के बाद PM Modi पर Congress का बड़ा हमला, China Policy को बताया ‘Calibrated Capitulation’; पूछे 4 सवाल
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Janta Scope

PM Modi-Xi Jinping Meeting के बाद गरमाई सियासत

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद भारत-चीन संबंध एक बार फिर घरेलू राजनीति के केंद्र में आ गए हैं।

दोनों नेताओं ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit के इतर द्विपक्षीय बातचीत की। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई पिछली मुलाकात के बाद भारत-चीन संबंधों में हुई “steady progress” का स्वागत किया।

बैठक के अगले दिन कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी की China Policy को लेकर चार सवाल उठाए। पार्टी के महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सरकार के दृष्टिकोण को “calibrated capitulation” यानी चीन के सामने सोची-समझी रियायत देने वाला रवैया बताया।

यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है। सरकार की आधिकारिक स्थिति इससे अलग है और वह सीमा पर शांति, मौजूदा समझौतों के पालन तथा पारस्परिक हितों के आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाने की बात कर रही है।

पहला सवाल: 2020 के Galwan संघर्ष के बाद PM के बयान पर फिर सवाल

जयराम रमेश ने अपने बयान में 15-16 जून 2020 की रात हुए Galwan Valley संघर्ष का मुद्दा उठाया, जिसमें 20 भारतीय सैनिकों की जान गई थी।

उन्होंने प्रधानमंत्री के 19 जून 2020 के सर्वदलीय बैठक में दिए गए बयान को लेकर सवाल किया कि क्या उससे भारत की बाद की बातचीत की स्थिति कमजोर हुई।

कांग्रेस लंबे समय से इस बयान को लेकर मोदी सरकार को घेरती रही है। यह पार्टी का राजनीतिक आकलन है; इसे सीमा की वास्तविक स्थिति के स्वतंत्र निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

दूसरा सवाल: Ladakh और Arunachal Pradesh को लेकर Congress ने क्या आरोप लगाए?

कांग्रेस ने दावा किया कि पूर्वी लद्दाख के कुछ हिस्सों में भारत के पारंपरिक patrolling और grazing rights प्रभावित हुए हैं। पार्टी ने अरुणाचल प्रदेश से जुड़े घटनाक्रमों पर भी सवाल उठाते हुए चीन द्वारा स्थानों के नाम बदलने और क्षेत्र पर अपने दावे दोहराने का मुद्दा उठाया।

जयराम रमेश ने चीन की प्रस्तावित 60,000-MW Medog mega-dam परियोजना का भी उल्लेख किया और इसे ब्रह्मपुत्र तथा पूर्वोत्तर भारत की water security से जोड़ते हुए चिंता जताई।

इनमें कई बातें कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोप और उसकी व्याख्या हैं। केंद्र सरकार का आधिकारिक रुख है कि भारत-चीन सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है।

तीसरा सवाल: Operation Sindoor और China-Pakistan संबंध

कांग्रेस का तीसरा सवाल Operation Sindoor के दौरान चीन की कथित भूमिका से जुड़ा है।

जयराम रमेश ने 4 जुलाई 2025 को तत्कालीन Deputy Chief of Army Staff Lt Gen Rahul Singh द्वारा चीन की भूमिका को लेकर की गई टिप्पणियों का हवाला दिया। इसके साथ उन्होंने 25 अगस्त 2026 को पूर्व Chief of Defence Staff General Anil Chauhan द्वारा VIF में दिए गए एक व्याख्यान का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि क्या भारत के सार्वजनिक रुख में बदलाव मोदी-Xi बैठक से पहले माहौल सुधारने की रणनीति का हिस्सा था।

यह सवाल कांग्रेस की ओर से उठाया गया है; पार्टी द्वारा दोनों बयानों के बीच निकाला गया राजनीतिक निष्कर्ष सरकार की आधिकारिक स्थिति नहीं है।

चौथा सवाल: China के साथ $112.6 Billion Trade Deficit

कांग्रेस ने आर्थिक संबंधों को भी अपने हमले का प्रमुख हिस्सा बनाया।

जयराम रमेश के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड $112.6 अरब तक पहुंच गया। उन्होंने दावा किया कि critical raw materials, manufacturing components और intermediates के मामले में चीन पर बढ़ती निर्भरता भारतीय उद्योग, खासकर MSMEs, के लिए चिंता का विषय है।

इसी संदर्भ में कांग्रेस ने सरकार की Make in India रणनीति और चीन से आयात के बीच विरोधाभास होने का आरोप लगाया तथा पूछा कि इस व्यापार असंतुलन को कम करने के लिए सरकार का roadmap क्या है।

Modi-Xi Meeting में वास्तव में क्या तय हुआ?

राजनीतिक आरोपों से अलग प्रधानमंत्री कार्यालय का आधिकारिक बयान भारत सरकार की स्थिति की महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करता है।

PMO के अनुसार, मोदी और शी ने माना कि दोनों देशों को अपने संबंधों को strategic और long-term perspective से देखना चाहिए और मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने तीन सिद्धांतों—mutual respect, mutual sensitivity और mutual interest—पर जोर दिया।

सबसे महत्वपूर्ण रूप से प्रधानमंत्री ने कहा कि सीमा क्षेत्रों में peace and tranquillity भारत-चीन संबंधों के निरंतर विकास का आवश्यक आधार है। उन्होंने सीमा से जुड़े मौजूदा agreements और understandings के पालन की जरूरत भी रेखांकित की।

दोनों नेताओं ने सीमा विवाद के fair, reasonable and mutually acceptable resolution के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की।

Trade Deficit पर भी हुई चर्चा

दिलचस्प बात यह है कि चीन के साथ व्यापार असंतुलन का मुद्दा केवल विपक्ष ने ही नहीं उठाया।

PMO के आधिकारिक बयान के मुताबिक, मोदी और शी ने आर्थिक एवं व्यापारिक संबंधों में एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने की जरूरत पर चर्चा की। इनमें structural trade imbalance, supply-chain issues और meaningful तथा predictable market access शामिल थे।

इसलिए trade deficit पर कांग्रेस की राजनीतिक आलोचना के बीच यह भी स्पष्ट है कि व्यापार असंतुलन भारत-चीन की आधिकारिक बातचीत के एजेंडे में मौजूद है।

India-China Relations में सुधार की कोशिश

2020 के Galwan संघर्ष के बाद भारत और चीन के संबंध गंभीर तनाव के दौर में चले गए थे।

इसके बाद कई वर्षों तक पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध द्विपक्षीय संबंधों पर हावी रहा। अक्टूबर 2024 में कज़ान में मोदी और शी की मुलाकात और अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई बातचीत के बाद दोनों देशों ने रिश्तों को धीरे-धीरे स्थिर करने की दिशा में कदम बढ़ाए।

सितंबर 2026 की नई दिल्ली बैठक उसी प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण चरण है। आधिकारिक स्तर पर दोनों देश संबंधों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सीमा विवाद और व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दे अब भी महत्वपूर्ण चुनौती बने हुए हैं।

Congress बनाम Government: असली राजनीतिक विवाद क्या है?

इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग narratives सामने आ रहे हैं।

कांग्रेस का तर्क है कि चीन के साथ normalization की कोशिश करते हुए सरकार सीमा, रणनीतिक सुरक्षा और आर्थिक निर्भरता से जुड़े सवालों पर पर्याप्त जवाब नहीं दे रही है। इसी आधार पर जयराम रमेश ने मोदी सरकार के दृष्टिकोण को “calibrated capitulation” कहा है।

सरकार की आधिकारिक स्थिति इसके उलट संबंधों को strategic और long-term perspective से संभालने की है। प्रधानमंत्री ने सीमा पर शांति को रिश्तों की प्रगति का आवश्यक आधार बताया है और दोनों देशों ने structural trade imbalance तथा सीमा विवाद जैसे मुद्दों को बातचीत के जरिए संबोधित करने की बात कही है।

आगे क्या?

Modi-Xi meeting ने यह संकेत दिया है कि नई दिल्ली और बीजिंग तनाव कम करते हुए संबंधों को अधिक स्थिर दिशा में ले जाना चाहते हैं। हालांकि राजनीतिक स्तर पर सरकार को चीन से जुड़े तीन बड़े सवालों—सीमा की स्थिति, रणनीतिक सुरक्षा और व्यापार असंतुलन—पर विपक्ष की चुनौती का सामना करते रहना पड़ सकता है।

आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि द्विपक्षीय बातचीत से सीमा विवाद के समाधान, भारतीय कंपनियों के लिए चीनी बाजार तक बेहतर पहुंच और चीन पर महत्वपूर्ण imports की निर्भरता कम करने की दिशा में कितनी ठोस प्रगति होती है।

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