सांसद के इस दावे के अगले ही दिन दिल्ली के कालिंदी कुंज इलाके में यमुना की सतह पर सफेद झाग की मोटी परत दिखाई दी। इससे नदी की सफाई को लेकर सरकार के दावों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर पर सवाल उठने लगे हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि एक स्थान पर डुबकी लगाने से पूरी यमुना के साफ होने का प्रमाण नहीं मिलता।
सोनिया विहार घाट पर मनोज तिवारी ने लगाई डुबकी
उत्तर-पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद मनोज तिवारी गुरुवार को सोनिया विहार घाट पहुंचे। उन्होंने यमुना में स्नान किया और धार्मिक परंपरा के अनुसार पानी का आचमन भी किया। इस दौरान उन्होंने अपना वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया।
मनोज तिवारी ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के प्रयासों की तारीफ करते हुए कहा कि यमुना की सफाई के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, नदी के आधे से अधिक हिस्से में सुधार हुआ है और बाकी हिस्से को भी आने वाले वर्षों में साफ करने का लक्ष्य है।
सांसद ने नदी के आसपास प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी को भी बेहतर पर्यावरण का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि अगर नदी की स्थिति में सुधार नहीं होता, तो वहां पक्षियों का आना मुश्किल होता। उन्होंने विपक्षी नेताओं अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी को भी यमुना में डुबकी लगाने की चुनौती दी।
AAP ने दी कालिंदी कुंज में पानी पीने की चुनौती
भाजपा सांसद के दावे पर आम आदमी पार्टी ने सवाल खड़े किए। दिल्ली में AAP के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पल्ला से वजीराबाद तक यमुना का लगभग 26 किलोमीटर का हिस्सा पहले से ही तुलनात्मक रूप से साफ रहा है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के आंकड़ों के अनुसार, इस हिस्से में आम आदमी पार्टी की सरकार के समय भी पानी की गुणवत्ता बेहतर थी।
भारद्वाज ने कहा कि यमुना की सफाई का आकलन केवल सोनिया विहार जैसे एक स्थान के आधार पर नहीं किया जा सकता। उन्होंने मनोज तिवारी और दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा को कालिंदी कुंज घाट पर पहुंचकर पानी पीने की चुनौती दी।
AAP का कहना है कि यमुना में सबसे अधिक प्रदूषण वजीराबाद के बाद बढ़ता है, जहां नालों का गंदा पानी नदी में मिलता है। पार्टी ने भाजपा से सवाल किया कि अगर नदी पूरी तरह साफ हो चुकी है, तो प्रदूषित हिस्सों की स्थिति में सुधार क्यों नहीं दिखाई दे रहा?
डुबकी के अगले दिन कालिंदी कुंज में दिखी सफेद झाग की परत
मनोज तिवारी के बयान के बाद 30 अक्टूबर को कालिंदी कुंज इलाके से यमुना की तस्वीरें और वीडियो सामने आए। इनमें नदी के पानी पर सफेद झाग की मोटी परत तैरती दिखाई दी। इंडियन एक्सप्रेस और अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, ये दृश्य सांसद के डुबकी लगाने के अगले दिन सामने आए।
यमुना में झाग बनने की समस्या नई नहीं है। नदी में अनुपचारित सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और डिटर्जेंट जैसे पदार्थ पहुंचने से पानी में झाग बन सकता है। हालांकि, केवल तस्वीर देखकर झाग में मौजूद रसायनों या उसकी विषाक्तता का स्तर तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी है।
कालिंदी कुंज में झाग की मौजूदगी ने छठ पूजा से पहले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ाई है। ऐसे में घाटों पर सफाई के साथ पानी की गुणवत्ता की जांच और उसके परिणाम सार्वजनिक करना जरूरी है।
DPCC के आंकड़े यमुना की स्थिति पर क्या बताते हैं?
यमुना की सफाई का सही आकलन करने के लिए पानी की गुणवत्ता से जुड़े वैज्ञानिक आंकड़े महत्वपूर्ण हैं। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति पानी में कई मानकों की जांच करती है। इनमें बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD), घुलित ऑक्सीजन और फीकल कोलीफॉर्म जैसे मानक शामिल हैं।
इंडिया टुडे की 28 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, DPCC के आंकड़ों में पल्ला में BOD का स्तर लगभग 2 मिलीग्राम प्रति लीटर था, जबकि ISBT ब्रिज के पास यह बढ़कर 30 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गया। फीकल कोलीफॉर्म का स्तर ISBT ब्रिज के पास 35,000 MPN प्रति 100 मिलीलीटर दर्ज किया गया।
फीकल कोलीफॉर्म की अधिक मात्रा पानी में मल-जनित प्रदूषण का संकेत हो सकती है। नहाने योग्य पानी के लिए इसका वांछनीय स्तर 2,500 MPN प्रति 100 मिलीलीटर तक माना जाता है। इस लिहाज से ISBT ब्रिज के पास दर्ज आंकड़ा काफी अधिक है।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट में भी DPCC के सितंबर के आंकड़ों के आधार पर बताया गया कि यमुना के तीन निगरानी स्थलों पर पानी की गुणवत्ता में गिरावट आई थी। ISBT ब्रिज पर BOD का स्तर 30 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया था। ये आंकड़े बताते हैं कि नदी के अलग-अलग हिस्सों की स्थिति अलग हो सकती है और सफाई के दावों की पुष्टि नियमित जांच से ही हो सकती है।
यमुना की सफाई के लिए 8,941 करोड़ रुपये की परियोजनाएं
यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में 8,941 करोड़ रुपये की लागत वाली 43 परियोजनाओं की शुरुआत की। सरकार ने मई 2029 तक दिल्ली में यमुना के हिस्से को साफ करने का लक्ष्य रखा है।
इन परियोजनाओं में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, गंदे नालों के पानी का उपचार और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कार्य शामिल हैं। दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा पहले कह चुके हैं कि यमुना को पूरी तरह साफ करने में लगभग ढाई से तीन साल का समय लग सकता है। उनके मुताबिक, पल्ला से वजीराबाद तक के हिस्से में सफाई का काम पूरा हुआ है, जबकि वजीराबाद से कालिंदी कुंज तक काम जारी है।
छठ पूजा से पहले यमुना की सफाई पर बढ़ी चिंता
छठ पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यमुना और अन्य जलाशयों के किनारे पहुंचते हैं। वे पानी में उतरकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। इसलिए नदी की स्वच्छता का सवाल केवल राजनीतिक या पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और धार्मिक आस्था से भी जुड़ा हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पानी में मौजूद हानिकारक सूक्ष्मजीव और रासायनिक प्रदूषक त्वचा, पेट और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। इसलिए किसी भी घाट पर स्नान की अनुमति देने से पहले पानी की गुणवत्ता की जांच और सुरक्षा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है।
यमुना की सफाई का फैसला आंकड़ों से होना चाहिए
मनोज तिवारी की डुबकी ने यमुना की सफाई को लेकर राजनीतिक बहस जरूर तेज कर दी है, लेकिन नदी की वास्तविक स्थिति का आकलन किसी एक दिन की गतिविधि से नहीं किया जा सकता। भाजपा सरकार सुधार का दावा कर रही है, जबकि AAP इन दावों पर सवाल उठा रही है। इस बीच DPCC के आंकड़े और कालिंदी कुंज में दिखाई दिया झाग बताते हैं कि प्रदूषण की चुनौती अभी बनी हुई है।
दिल्ली के लोगों को राजनीतिक बयानबाजी से अधिक ऐसी यमुना की जरूरत है, जिसका पानी सुरक्षित हो और जिसमें श्रद्धालु बिना स्वास्थ्य जोखिम के धार्मिक गतिविधियां कर सकें। नदी की सफाई की असली सफलता तभी मानी जाएगी, जब उसके सभी प्रमुख हिस्सों में प्रदूषण लगातार कम हो, सीवेज का उपचार हो और पानी की गुणवत्ता के आंकड़े पारदर्शी तरीके से जनता के सामने रखे जाएं।
