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राजनीति

यूपी MLC चुनाव 2026: 23 अक्टूबर को पश्चिमी यूपी की 5 सीटों पर मतदान, तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था; जानें जरूरी नियम

उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026 में 23 अक्टूबर को कुल 11 सीटों पर मतदान होगा। इनमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पांच सीटें शामिल हैं। चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है। मतदान केंद्रों पर मोबाइल और कैमरे ले जाने पर प्रतिबंध रहेगा। मतगणना 27 अक्टूबर को होगी।

यूपी MLC चुनाव 2026: 23 अक्टूबर को पश्चिमी यूपी की 5 सीटों पर मतदान, तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था; जानें जरूरी नियम
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: नवभारत, अमर उजाला, दैनिक जागरण

मेरठ/लखनऊ, 19 अक्टूबर 2026: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। आगामी शुक्रवार, 23 अक्टूबर को शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इनमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पांच महत्वपूर्ण सीटें भी शामिल हैं। मतदान से पहले चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

भारत निर्वाचन आयोग के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतदान सुबह 8 बजे शुरू होकर शाम 4 बजे तक चलेगा। प्रशासन की प्राथमिकता मतदान केंद्रों पर शांति बनाए रखने, मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने और मतदान की गोपनीयता की रक्षा करने की है।

पश्चिमी यूपी की किन पांच सीटों पर होगा चुनाव?

उत्तर प्रदेश की जिन 11 विधान परिषद सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, उनमें पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पांच सीटें हैं—मेरठ खंड स्नातक, आगरा खंड स्नातक, मेरठ खंड शिक्षक, आगरा खंड शिक्षक और बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक।

इनके अलावा प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में लखनऊ, वाराणसी और इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीटों के साथ लखनऊ, वाराणसी और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान कराया जाएगा।

इन सीटों से निर्वाचित मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को समाप्त होना है। इसी कारण निर्वाचन आयोग ने द्विवार्षिक चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया है।

मतदान केंद्रों पर तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था

चुनाव के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी न हो, इसके लिए पश्चिमी यूपी के संबंधित जिलों में सुरक्षा संबंधी तैयारियां की गई हैं।

नवभारत टाइम्स की 19 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित जिलों के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने मतदान केंद्रों पर तीन स्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया है।

मतदान केंद्रों में मोबाइल फोन, कैमरे और अन्य प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी। मतपत्र तथा मतपेटियों को नुकसान पहुंचाने वाली वस्तुओं को भी मतदान परिसर में ले जाने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासनिक तैयारियों के अनुसार 22 अक्टूबर को पोलिंग पार्टियां अपने निर्धारित मतदान केंद्रों के लिए रवाना होंगी। माइक्रो ऑब्जर्वर मतदान प्रक्रिया पर नजर रखेंगे।

मतदान वाले जिलों में 23 अक्टूबर को शराब की दुकानें बंद रखने की व्यवस्था की भी खबर है।

मतपत्र की फोटो खींचने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई

इस चुनाव में मतदान मतपत्र के माध्यम से कराया जाएगा। इसलिए मतदान की गोपनीयता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है।

निर्वाचन संबंधी निर्देशों के अनुसार मतपत्र की तस्वीर लेना या मतदान की गोपनीयता भंग करने का प्रयास करना नियमों का उल्लंघन होगा। ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

चुनाव अधिकारियों को मतदाताओं की पहचान और पात्रता का सावधानीपूर्वक सत्यापन करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसका उद्देश्य फर्जी मतदान की आशंका को कम करना और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखना है।

वोटर आईडी नहीं है तो कैसे डाल सकेंगे वोट?

मतदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी यह है कि मतदाता फोटो पहचान पत्र उपलब्ध न होने पर भी निर्धारित वैकल्पिक दस्तावेजों की सहायता से पहचान स्थापित की जा सकती है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा द्वारा जारी जानकारी के अनुसार आयोग ने 10 वैकल्पिक दस्तावेजों को मान्यता दी है।

इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और भारतीय पासपोर्ट शामिल हैं। सरकारी विभागों तथा मान्य संस्थानों द्वारा जारी सेवा पहचान पत्र, विश्वविद्यालय की डिग्री या डिप्लोमा का मूल प्रमाणपत्र और निर्धारित दिव्यांगता संबंधी पहचान दस्तावेज भी स्वीकार किए जा सकते हैं।

हालांकि, केवल पहचान पत्र होने से मतदान का अधिकार नहीं मिलता। संबंधित शिक्षक या स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम दर्ज होना आवश्यक है।

मतदाताओं को सलाह दी गई है कि मतदान केंद्र जाते समय अपना मतदाता फोटो पहचान पत्र या आयोग द्वारा निर्धारित वैकल्पिक मूल दस्तावेज साथ रखें।

14.18 लाख मतदाता, 152 प्रत्याशी चुनावी मैदान में

प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों पर कुल लगभग 14.18 लाख पंजीकृत मतदाता हैं। उपलब्ध चुनावी रिपोर्टों के अनुसार इन सीटों पर 152 उम्मीदवार मैदान में हैं।

मेरठ क्षेत्र की दोनों सीटों का मुकाबला भी दिलचस्प हो गया है। 17 अक्टूबर को प्रकाशित नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार मेरठ खंड स्नातक और मेरठ खंड शिक्षक सीटों पर कुल 18 उम्मीदवार हैं। इन दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में 1,82,720 मतदाता पंजीकृत बताए गए हैं।

मेरठ खंड स्नातक सीट पर भाजपा के दिनेश गोयल और समाजवादी पार्टी के प्रमेन्द्र सिंह मैदान में हैं। वहीं मेरठ खंड शिक्षक सीट पर भाजपा के श्रीचंद शर्मा और सपा के नितिन कुमार तोमर प्रमुख प्रत्याशियों में शामिल हैं। निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं।

राजनीतिक दृष्टि से ये चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में अलग मतदाता वर्ग राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को चुनता है।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की परीक्षा

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले इन विधान परिषद चुनावों को राजनीतिक दलों की संगठनात्मक तैयारियों के एक संकेतक के रूप में देखा जा रहा है।

भाजपा अपनी मौजूदा राजनीतिक स्थिति मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रही है, जबकि समाजवादी पार्टी इन निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी पकड़ बढ़ाना चाहती है।

हालांकि, स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता आधार सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होता है। ऐसे में इन चुनावों के नतीजों को सीधे आगामी विधानसभा चुनाव का अनुमान मानना सही नहीं होगा।

मतदान के लिए पात्र कर्मचारियों को विशेष अवकाश

मतदान में भागीदारी बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश शासन ने संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के पात्र मतदाता कर्मचारियों को 23 अक्टूबर को विशेष आकस्मिक अवकाश देने की व्यवस्था की है।

यह सुविधा उन कर्मचारियों के लिए है जो निर्धारित निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं और शासन के आदेश में बताई गई पात्रता पूरी करते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि प्रदेश के सभी कर्मचारियों के लिए सामान्य सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।

27 अक्टूबर को होगी मतगणना

निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक, 23 अक्टूबर को मतदान संपन्न होने के बाद 27 अक्टूबर 2026 को मतगणना की जाएगी। पूरी चुनाव प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक समाप्त करने का कार्यक्रम निर्धारित है।

फिलहाल चुनाव प्रशासन के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी मतदान को सुरक्षित, निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने की है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पांच सीटों पर मतदाताओं का रुख क्या रहेगा और शिक्षक-स्नातक वर्ग किसे अपना प्रतिनिधि चुनेगा, इसका फैसला मतगणना के बाद स्पष्ट होगा।

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