राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए मैदान में उतरने की तैयारी में SP
उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव का मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है। समाजवादी पार्टी तीन उम्मीदवार उतारकर अपनी मौजूदा विधानसभा ताकत से आगे एक अतिरिक्त सीट हासिल करने का प्रयास कर सकती है।
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर को निर्धारित है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर, जांच 7 अक्टूबर और नाम वापसी की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर है।
यदि मतदान जरूरी हुआ तो 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोट डाले जाएंगे और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी।
SP के लिए दो सीटें आसान, तीसरी के लिए चाहिए अतिरिक्त समर्थन
राज्यसभा चुनाव सीधे जनता के वोट से नहीं बल्कि विधायकों के मतदान से होता है। इसलिए विधानसभा में राजनीतिक दलों की संख्या इस मुकाबले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है।
हालिया रिपोर्टों में विधानसभा की प्रभावी संख्या और दलों के संख्याबल में कुछ अंतर दिखाई देता है, क्योंकि रिक्तियों और राजनीतिक बदलावों के कारण आंकड़े बदलते रहे हैं। एक हालिया गणना में 396 प्रभावी विधायकों के आधार पर एक उम्मीदवार की जीत के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता वोट आवश्यक बताए गए हैं।
इस गणना के अनुसार SP के पास 101 विधायक हैं और कांग्रेस के दो विधायकों को जोड़ने पर विपक्षी खेमे का आंकड़ा 103 तक पहुंचता है।
दो उम्मीदवारों के लिए आवश्यक वोट अलग रखने के बाद लगभग 29 वोट बच सकते हैं। ऐसे में तीसरे उम्मीदवार को जीताने के लिए करीब आठ अतिरिक्त प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत पड़ सकती है।
यही संख्या तीसरी सीट को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है।
BJP के पास क्या है गणित?
BJP के पास अपने 255 विधायक बताए जा रहे हैं। उसके सहयोगी दलों में अपना दल (सोनेलाल), राष्ट्रीय लोक दल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और निषाद पार्टी शामिल हैं।
इस संख्या के आधार पर BJP अपने दम पर सात उम्मीदवारों को मजबूत स्थिति में रख सकती है।
सहयोगी दलों के वोट जोड़ने के बाद NDA आठवीं सीट के लिए भी मुकाबले में आ सकता है। हालांकि अंतिम गणित उम्मीदवारों की संख्या, वैध वोटों और अन्य विधायकों के समर्थन पर निर्भर करेगा।
यही वजह है कि यदि SP तीन और BJP आठ उम्मीदवार उतारती है तो 10 उपलब्ध सीटों के मुकाबले 11 उम्मीदवार मैदान में होंगे और मतदान आवश्यक हो सकता है।
क्या तीसरी सीट पर Cross-Voting हो सकती है?
यही इस चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है, लेकिन फिलहाल इसका निश्चित उत्तर देना संभव नहीं है।
SP की तीसरी सीट के लिए मौजूदा गठबंधन से बाहर के विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। दूसरी ओर NDA को भी अपनी आठवीं सीट के लिए अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता पड़ सकती है।
इस परिस्थिति में दोनों खेमों के लिए छोटे दलों, निर्दलीय विधायकों और दूसरी राजनीतिक पार्टियों से आने वाले वोट महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
लेकिन चुनाव से पहले cross-voting को निश्चित घटना मानना सही नहीं होगा। अभी इसे संभावित चुनावी परिस्थिति के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
राज्यसभा चुनाव में Cross-Voting संभव कैसे होती है?
राज्यसभा चुनाव में मतदान की प्रक्रिया सामान्य विधानसभा वोटिंग से अलग होती है।
विधायक proportional representation और single transferable vote प्रणाली के तहत उम्मीदवारों को अपनी प्राथमिकता देते हैं।
राज्यसभा चुनाव में राजनीतिक दल अपने विधायकों को मतदान के लिए निर्देश दे सकते हैं, लेकिन किसी दूसरे उम्मीदवार को वोट देने पर विधायक की विधानसभा सदस्यता अपने आप समाप्त नहीं होती।
इसी व्यवस्था के कारण करीबी मुकाबले में पार्टी लाइन से अलग मतदान निर्णायक साबित हो सकता है।
2024 में SP को Cross-Voting से लगा था झटका
उत्तर प्रदेश में cross-voting केवल सैद्धांतिक संभावना नहीं है। फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में इसका महत्वपूर्ण असर देखने को मिला था।
उस चुनाव में BJP ने आठ और SP ने तीन उम्मीदवार उतारे थे।
कई SP विधायकों द्वारा BJP उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने के बाद BJP के आठों उम्मीदवार जीत गए, जबकि समाजवादी पार्टी अपने तीन उम्मीदवारों में से केवल दो को राज्यसभा भेज सकी।
SP प्रमुख अखिलेश यादव ने बाद में तीसरे उम्मीदवार को उतारने के फैसले को पार्टी के लिए एक तरह की “परीक्षा” बताया था, जिससे पार्टी लाइन से अलग जाने वाले विधायकों की पहचान हुई।
2026 का राजनीतिक और विधानसभा गणित अलग है, इसलिए 2024 के परिणाम को मौजूदा चुनाव की भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता। फिर भी वह चुनाव बताता है कि बेहद करीबी राज्यसभा मुकाबले में कुछ विधायकों के वोट परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
SP के संभावित उम्मीदवार कौन?
रिपोर्टों में वरिष्ठ SP नेता और मौजूदा राज्यसभा सदस्य राम गोपाल यादव का नाम प्रमुखता से सामने आया है।
पूर्व IAS अधिकारी और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में चर्चा में है।
तीसरे उम्मीदवार को लेकर अलग-अलग नाम सामने आए हैं और SP के PDA—पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक—राजनीतिक समीकरण को ध्यान में रखकर चयन किए जाने की अटकलें हैं।
जब तक पार्टी औपचारिक उम्मीदवार सूची जारी नहीं करती, इन नामों को संभावित उम्मीदवार के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले क्यों महत्वपूर्ण है मुकाबला?
यह राज्यसभा चुनाव केवल संसद के उच्च सदन की 10 सीटों तक सीमित नहीं है।
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राज्यसभा मतदान BJP और SP दोनों के लिए अपने विधायकों, सहयोगी दलों और व्यापक राजनीतिक समर्थन की परीक्षा भी बन सकता है।
विशेष रूप से अंतिम सीट का मुकाबला यह संकेत दे सकता है कि दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमे अपने औपचारिक संख्याबल के बाहर कितना समर्थन जुटा पाते हैं।
हालांकि राज्यसभा चुनाव में किसी विधायक का वोट भविष्य के विधानसभा चुनाव में मतदाताओं के व्यवहार का संकेत नहीं माना जा सकता।
अब आगे क्या?
सबसे पहले उम्मीदवारों की औपचारिक घोषणा और नामांकन पर नजर रहेगी।
यदि कुल उम्मीदवारों की संख्या उपलब्ध 10 सीटों से अधिक रहती है, तभी वास्तविक चुनावी मुकाबले और अतिरिक्त वोटों की अहमियत स्पष्ट होगी।
SP के लिए दो सीटों से आगे तीसरी सीट हासिल करने की कोशिश अतिरिक्त समर्थन जुटाने पर निर्भर करेगी। वहीं NDA की संभावित आठवीं सीट की रणनीति भी चुनावी गणित को प्रभावित करेगी।
इसलिए फिलहाल सबसे सटीक निष्कर्ष यही है कि तीसरी SP उम्मीदवारी cross-voting की संभावना पैदा कर सकती है, लेकिन cross-voting वास्तव में होगी या किसके पक्ष में होगी, यह मतदान से पहले स्थापित तथ्य नहीं है।
