17 साल के इंतजार से जुड़ी वापसी
अंतरराष्ट्रीय हॉकी की इस वापसी को 17 साल के इंतजार से जोड़ा जा रहा है। इसका संदर्भ 2009 का पंजाब गोल्ड कप है, जो चंडीगढ़ में खेला गया था। मौजूदा प्रतियोगिता पंजाब के जालंधर और मोहाली में हो रही है। भारतीय हॉकी को लगातार खिलाड़ी देने वाले इस क्षेत्र में राष्ट्रीय टीम को करीब से देखने का अवसर नई पीढ़ी के लिए विशेष होगा।
जालंधर में लीग मुकाबले, मोहाली में खिताबी फैसला
टूर्नामेंट का पहला पड़ाव जालंधर का ओलंपियन सुरजीत सिंह हॉकी स्टेडियम होगा। यहां उद्घाटन समारोह और 27 अक्टूबर से 2 नवंबर तक लीग मुकाबले खेले जाएंगे। इसके बाद प्रतियोगिता मोहाली के ओलंपियन बलबीर सिंह सीनियर अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम पहुंचेगी। सेमीफाइनल 4 नवंबर को होंगे, जबकि कांस्य पदक मुकाबला और फाइनल 5 नवंबर को खेला जाएगा।
छह टीमों के बीच टक्कर, जानिए भारत का कार्यक्रम
भारत के अलावा बांग्लादेश, चीन, जापान, मलेशिया और दक्षिण कोरिया प्रतियोगिता में उतरेंगे। प्रत्येक टीम लीग चरण में बाकी पांच टीमों से एक बार भिड़ेगी और शीर्ष चार सेमीफाइनल में पहुंचेंगी। भारत 27 अक्टूबर को बांग्लादेश, 29 अक्टूबर को चीन, 30 अक्टूबर को जापान, 1 नवंबर को मलेशिया और 2 नवंबर को दक्षिण कोरिया से खेलेगा। घोषित कार्यक्रम के अनुसार, भारत के लीग मैच शाम सात बजे शुरू होने हैं।
छठे खिताब के साथ जीत की हैट्रिक का अवसर
भारतीय टीम का रिकॉर्ड उसे प्रमुख दावेदार बनाता है। भारत 2011, 2016, 2018, 2023 और 2024 में यह ट्रॉफी जीत चुका है। इनमें 2018 का खिताब पाकिस्तान के साथ साझा था। पिछले दो संस्करण जीतने के बाद अब लगातार तीसरी बार चैंपियन बनने का अवसर है। हालांकि, पुरानी सफलताएं केवल पृष्ठभूमि तैयार करती हैं; नई प्रतियोगिता में हर मुकाबले के लिए प्रदर्शन दोहराना होगा।
हालिया एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक भी भारतीय अभियान को मजबूत आधार देता है। हॉकी इंडिया के अनुसार, टीम ने आइची-नागोया में अपना खिताब सफलतापूर्वक बचाया था। अब घरेलू मैदान पर उस सफलता को आगे बढ़ाने की चुनौती है। प्रतियोगिता के इतिहास और हालिया उपलब्धि को देखते हुए भारत की दावेदारी मजबूत दिखती है, लेकिन खिताब तक पहुंचने के लिए लीग और नॉकआउट, दोनों चरणों में निरंतरता जरूरी होगी।
हरमनप्रीत और साथी खिलाड़ियों के लिए भावनात्मक वापसी
कप्तान हरमनप्रीत के लिए यह टूर्नामेंट निजी तौर पर भी यादगार हो सकता है। हॉकी इंडिया से बातचीत में उन्होंने बताया था कि उनका परिवार पहली बार एक साथ स्टेडियम में उन्हें अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेलते देख सकता है। उनके पिता भी पहली बार स्टेडियम में बैठकर उन्हें देश का प्रतिनिधित्व करते देखेंगे। दूर देशों में पदक जीतने वाले खिलाड़ी के लिए अपने लोगों के सामने भारतीय जर्सी पहनना अलग अनुभव होगा।
जालंधर का मैदान कई खिलाड़ियों की शुरुआती यात्रा से जुड़ा है। हरमनप्रीत, मंदीप सिंह, जरमनप्रीत सिंह, दिलप्रीत सिंह और कृष्ण बहादुर पाठक जैसे खिलाड़ियों का सुरजीत हॉकी अकादमी से संबंध रहा है। जिस जगह उन्होंने खेल सीखा, वहीं राष्ट्रीय टीम के साथ उतरने का अवसर मिलेगा। पाठक ने भी इस मैदान से अपने जुड़ाव को महत्वपूर्ण बताया है। ऐसे अनुभव आयोजन को स्थानीय दर्शकों के लिए अधिक आत्मीय बनाते हैं।
मनप्रीत की चोट से झटका, विवेक सागर को मौका
हालांकि, शुरुआत से पहले भारत को चोट का झटका लगा है। अनुभवी मिडफील्डर मनप्रीत सिंह अभ्यास के दौरान पिंडली में चोट लगने से टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं। उनकी जगह विवेक सागर प्रसाद को शामिल किया गया है। यह बदलाव अहम है, क्योंकि मनप्रीत अपने अनुभव और खेल संचालन के लिए जाने जाते हैं। अब मिडफील्ड में तालमेल बनाए रखना भारतीय तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
गोलकीपिंग में कृष्ण बहादुर पाठक और सूरज करकेरा उपलब्ध हैं। टीम में हरमनप्रीत, अमित रोहिदास, जरमनप्रीत, हार्दिक सिंह, नीलकांत शर्मा, अभिषेक और सुखजीत सिंह जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं। इस समूह के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव है। साथ ही अमनदीप लाकड़ा और आदित्य अर्जुन लालगे जैसे खिलाड़ियों के लिए अपनी भूमिका मजबूत करने का अवसर होगा।
जीत के लिए संयम और सटीकता होगी जरूरी
प्रतियोगिता का प्रारूप देखते हुए भारत की पहली प्राथमिकता सेमीफाइनल की जगह सुनिश्चित करना होगी। पांच लीग मुकाबले टीम को संयोजन परखने का अवसर देंगे, लेकिन कमजोर शुरुआत अनावश्यक दबाव भी बढ़ा सकती है। खेल के लिहाज से पेनल्टी कॉर्नर का उपयोग, गेंद खोने के बाद रक्षात्मक संगठन और गोल के सामने सटीकता निर्णायक हो सकती है। घरेलू समर्थन उत्साह देगा, जबकि खिलाड़ियों को मैदान पर अपने फैसले संयम से लेने होंगे।
पंजाब की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का मंच
पंजाब के लिए इस आयोजन की अहमियत अंतिम परिणाम से आगे भी जाती है। अकादमियों में अभ्यास करने वाले बच्चे अपने आदर्शों को सामने खेलते देख सकेंगे। इससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय हॉकी की गति, अनुशासन और तैयारी को समझने का मौका मिलेगा। भारत की नजर छठी ट्रॉफी पर रहेगी, जबकि स्थानीय दर्शकों के लिए अपने खिलाड़ियों का स्वागत करने और खेल से रिश्ता मजबूत करने का यह यादगार अवसर होगा।
