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9 साल 5 महीने बाद दीप्ति शर्मा का ऐतिहासिक शतक, जिम्बाब्वे के खिलाफ 106 रन बनाकर भारत को दिलाई शानदार जीत

जिम्बाब्वे के खिलाफ 25 अक्टूबर 2026 को वडोदरा में खेले गए दूसरे वनडे मुकाबले में दीप्ति ने 86 गेंदों पर नाबाद 106 रन की शानदार पारी खेली। यह उनके वनडे करियर का दूसरा शतक है, जो लगभग नौ साल पांच महीने के अंतराल के बाद आया। इससे पहले उन्होंने मई 2017 में आयरलैंड के खिलाफ 188 रन बनाए थे। दीप्ति के इस प्रदर्शन और हरमनप्रीत कौर के 126 रनों की बदौलत भारत ने जिम्बाब्वे को 121 रन से हराकर तीन मैचों की वनडे सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली।

9 साल 5 महीने बाद दीप्ति शर्मा का ऐतिहासिक शतक, जिम्बाब्वे के खिलाफ 106 रन बनाकर भारत को दिलाई शानदार जीत
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: आईसीसी, बीसीसीआई, PTI , reddit

वडोदरा में भारतीय बल्लेबाजों ने दिखाया दम

वडोदरा के कोटांबी स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में भारतीय कप्तान स्मृति मंधाना ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। हालांकि भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। स्मृति मंधाना खाता खोले बिना आउट हो गईं, जबकि शेफाली वर्मा केवल आठ रन बना सकीं। भारत ने शुरुआती तीन ओवरों के भीतर दो महत्वपूर्ण विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद प्रतीका रावल और हरमनप्रीत कौर ने पारी संभाली। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 124 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी हुई। प्रतीका ने 67 गेंदों में 61 रन बनाए। उनके आउट होने के बाद तेजल हसबनिस भी जल्द पवेलियन लौट गईं और भारत का स्कोर 148 रन पर चार विकेट हो गया। इसी समय दीप्ति शर्मा बल्लेबाजी के लिए उतरीं।

दीप्ति और हरमनप्रीत की 153 रन की साझेदारी

चार विकेट गिरने के बाद भारतीय टीम को एक मजबूत साझेदारी की जरूरत थी। दीप्ति शर्मा और हरमनप्रीत कौर ने इसी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। दोनों अनुभवी खिलाड़ियों ने पांचवें विकेट के लिए 153 रन जोड़े। इस दौरान हरमनप्रीत ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखी, जबकि दीप्ति ने समझदारी से पारी को आगे बढ़ाया। दीप्ति ने कमजोर गेंदों को बाउंड्री तक पहुंचाया और लगातार स्ट्राइक रोटेट करके रन गति बनाए रखी। इस साझेदारी के कारण भारत ने अंतिम ओवरों तक बड़े स्कोर की मजबूत नींव तैयार कर ली।

3450 दिन बाद आया वनडे करियर का दूसरा शतक

दीप्ति शर्मा के लिए यह शतक विशेष महत्व रखता है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के अनुसार, उनके पहले और दूसरे वनडे शतक के बीच 3450 दिनों का अंतर रहा। दीप्ति ने 15 मई 2017 को दक्षिण अफ्रीका के पोटचेफस्ट्रूम में आयरलैंड के खिलाफ 160 गेंदों में 188 रन बनाए थे। उस मुकाबले में उन्होंने पूनम राउत के साथ पहले विकेट के लिए 320 रन की ऐतिहासिक साझेदारी भी की थी। इसके बाद दीप्ति लगातार भारतीय टीम का हिस्सा रहीं, लेकिन वनडे में दूसरा शतक नहीं बना सकीं। आखिरकार 25 अक्टूबर 2026 को उन्होंने 86 गेंदों में 15 चौकों की मदद से नाबाद 106 रन बनाकर लगभग साढ़े नौ साल का इंतजार समाप्त किया।

शतक से ज्यादा टीम की साझेदारी थी महत्वपूर्ण

मैच के बाद दीप्ति शर्मा ने अपनी इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की। उन्होंने स्वीकार किया कि दूसरा शतक बनाने के लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा। हालांकि उनका कहना था कि जब वह बल्लेबाजी करने उतरी थीं, तब व्यक्तिगत उपलब्धि से ज्यादा महत्वपूर्ण टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाना था। दीप्ति के अनुसार, हरमनप्रीत के साथ साझेदारी बनाना और आखिरी ओवर तक बल्लेबाजी करना उनकी प्राथमिकता थी। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय नियमित अभ्यास, कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास को दिया। दीप्ति ने यह भी बताया कि भगवान हनुमान के प्रति उनकी आस्था उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में शांत और एकाग्र रहने में मदद करती है।

हरमनप्रीत कौर ने भी लगाया शानदार शतक

दीप्ति शर्मा के अलावा हरमनप्रीत कौर ने भी मुकाबले में जबरदस्त प्रदर्शन किया। पूर्व भारतीय कप्तान ने 121 गेंदों पर 126 रन बनाए, जिसमें 15 चौके शामिल रहे। यह उनके वनडे करियर का आठवां शतक था। हरमनप्रीत ने शुरुआत में संभलकर बल्लेबाजी की और क्रीज पर जमने के बाद तेजी से रन बनाए। दीप्ति के साथ उनकी साझेदारी के कारण भारत निर्धारित 50 ओवरों में छह विकेट पर 328 रन बनाने में सफल रहा। हरमनप्रीत को शानदार बल्लेबाजी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

जिम्बाब्वे की टीम 207 रन पर सिमटी

329 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम ने संघर्ष जरूर किया, लेकिन भारतीय गेंदबाजों के सामने बड़ी साझेदारी बनाने में सफल नहीं हो सकी। जिम्बाब्वे की ओर से मोडेस्टर मुपाचिक्वा ने 49 और चिपो मुगेरी-तिरिपानो ने 46 रन बनाए। बेलव्ड बिजा ने भी 34 रन का योगदान दिया। हालांकि भारतीय गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट हासिल किए। वैष्णवी शर्मा ने 39 रन देकर चार विकेट लिए, जबकि दीप्ति शर्मा ने बल्लेबाजी के बाद गेंद से भी कमाल करते हुए 32 रन देकर तीन विकेट झटके। जिम्बाब्वे की पूरी टीम 48.5 ओवर में 207 रन पर आउट हो गई और भारत ने मुकाबला 121 रन से जीत लिया।

बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में भी दीप्ति का योगदान

दीप्ति शर्मा की पहचान भारतीय महिला क्रिकेट की भरोसेमंद ऑलराउंडर के रूप में रही है। वह बल्लेबाजी के अलावा ऑफ स्पिन गेंदबाजी से भी टीम को महत्वपूर्ण सफलताएं दिलाती हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे वनडे में उनका योगदान दोनों विभागों में देखने को मिला। उन्होंने पहले नाबाद शतक बनाकर बड़ा स्कोर खड़ा करने में मदद की और फिर तीन विकेट लेकर विपक्षी टीम की चुनौती कमजोर की। यह प्रदर्शन बताता है कि दीप्ति भारतीय टीम के लिए केवल विशेषज्ञ गेंदबाज नहीं, बल्कि मैच की परिस्थिति के अनुसार बल्लेबाजी की जिम्मेदारी संभालने वाली महत्वपूर्ण खिलाड़ी भी हैं।

स्मृति मंधाना की कप्तानी में सीरीज पर कब्जा

भारतीय महिला टीम ने इस जीत के साथ तीन मैचों की वनडे सीरीज अपने नाम कर ली। इससे पहले 23 अक्टूबर को खेले गए पहले मुकाबले में भारत ने जिम्बाब्वे को नौ विकेट से हराया था। अब 28 अक्टूबर को वडोदरा में होने वाले तीसरे और अंतिम वनडे में भारत की नजर सीरीज में 3-0 की जीत हासिल करने पर होगी। यह स्मृति मंधाना के लिए पूर्णकालिक वनडे कप्तान के रूप में पहली सीरीज जीत भी है।

भारतीय महिला क्रिकेट के लिए क्यों खास है यह शतक?

दीप्ति शर्मा का यह शतक केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि धैर्य और निरंतर मेहनत की एक महत्वपूर्ण मिसाल है। नौ वर्षों से अधिक समय तक दूसरे वनडे शतक का इंतजार करने के बावजूद उन्होंने टीम के लिए अपना योगदान जारी रखा। इस प्रदर्शन ने यह भी साबित किया कि अनुभवी खिलाड़ियों की भूमिका कठिन परिस्थितियों में कितनी महत्वपूर्ण होती है। वडोदरा में खेली गई 106 रन की नाबाद पारी ने दीप्ति शर्मा के करियर में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। 3450 दिनों के लंबे इंतजार के बाद आया यह शतक भारतीय महिला क्रिकेट की यादगार उपलब्धियों में शामिल हो गया है।

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