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खेल

आदित्य ने जीता विश्व अंडर-19 बॉक्सिंग का स्वर्ण, रूस के मुक्केबाज को 4-1 से हराया

भारत के युवा मुक्केबाज आदित्य ने मोंटेनेग्रो के बुडवा में विश्व बॉक्सिंग अंडर-19 चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीत लिया है। उन्होंने 27 अक्टूबर 2026 को पुरुषों के 55 किलोग्राम फाइनल में रूस के इस्लाम मागोमेदोव को जजों के 4-1 के फैसले से हराया। शुरुआती पिछड़ने के बाद हासिल यह जीत भारतीय अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि बनी। आदित्य ने अपने प्रदर्शन से युवा मुक्केबाजी के अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।

आदित्य ने जीता विश्व अंडर-19 बॉक्सिंग का स्वर्ण, रूस के मुक्केबाज को 4-1 से हराया
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: UNI, REDIFF, IANSLIVE , World Boxing,

पहला राउंड गंवाने के बाद की शानदार वापसी

फाइनल की शुरुआत आदित्य के पक्ष में नहीं रही। यूएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, वह पहला राउंड मामूली अंतर से हार गए थे। मुकाबले के बाद उन्होंने बताया कि शुरुआती राउंड में फैसला उनके खिलाफ 3-2 था, लेकिन अगले राउंड में उन्होंने प्रदर्शन बेहतर किया और उसे 4-1 से अपने नाम किया। इसी बदलाव से उन्हें जीत का भरोसा मिला।

यह वापसी उनकी उपलब्धि को खास बनाती है। निर्णायक मुकाबले में पिछड़ना किसी युवा खिलाड़ी के लिए कठिन स्थिति हो सकती है। आदित्य ने शुरुआती नुकसान के बावजूद मुकाबले में अपनी दावेदारी बनाए रखी और अंततः स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

सेमीफाइनल में सर्वसम्मत जीत से बने थे दावेदार

आदित्य का सफर फाइनल से पहले भी प्रभावशाली रहा। आईएएनएस के मुताबिक, उन्होंने सेमीफाइनल में अजरबैजान के निहात गासिमोव को 5-0 से हराया था। सभी जजों का फैसला भारतीय मुक्केबाज के पक्ष में रहा, जिससे उन्होंने स्वर्ण पदक के मुकाबले में प्रवेश किया।

इससे पहले क्वार्टरफाइनल में आदित्य ने इटली के तोमासो ओरलांडो को पराजित कर पदक सुनिश्चित किया था। विश्व बॉक्सिंग की रिपोर्ट इस जीत की पुष्टि करती है। लगातार आगे बढ़ते हुए उन्होंने पहले पदक पक्का किया, फिर फाइनल का टिकट हासिल किया और आखिर में उस अवसर को विश्व खिताब में बदल दिया।

एशियाई रजत पदक विजेता से विश्व चैंपियन तक

आदित्य पहले एशियाई अंडर-19 स्तर पर रजत पदक जीत चुके हैं। बुडवा में स्वर्ण हासिल करना उनके लिए उपलब्धि का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस बार खिताबी मुकाबले में उनके सामने ऐसा प्रतिद्वंद्वी था, जिसके पास भी अंतरराष्ट्रीय पदक का अनुभव था। विश्व बॉक्सिंग के अनुसार, मागोमेदोव यूरोपीय अंडर-19 रजत पदक विजेता हैं।

इस पृष्ठभूमि में भारतीय मुक्केबाज की जीत का महत्व बढ़ जाता है। यह परिणाम दिखाता है कि आदित्य ने महाद्वीपीय स्तर के अनुभव के बाद विश्व प्रतियोगिता में भी निर्णायक चुनौती पार की।

भारत का अभियान चार पदकों के साथ समाप्त

भारत ने प्रतियोगिता में एक स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदक जीते। आदित्य पुरुषों के 55 किलोग्राम वर्ग में चैंपियन बने, जबकि मेघा श्योकंद ने महिलाओं के 80 किलोग्राम वर्ग में रजत हासिल किया। मेघा को फाइनल में रूस की एकातेरिना फ्रोलोवा के खिलाफ 0-5 से हार मिली।

महिलाओं के 65 किलोग्राम वर्ग में हर्षिका और 80 किलोग्राम से अधिक भार वर्ग में प्राची टोकस ने कांस्य पदक जीते। इस तरह भारतीय दल के चारों पदक अलग भार वर्गों से आए। पुरुष वर्ग में आदित्य का स्वर्ण और महिला वर्ग में तीन पदक भारत के अभियान की प्रमुख उपलब्धियाँ रहीं।

महिला मुक्केबाजों ने भी दिखाया दम

मेघा ने सेमीफाइनल में किर्गिस्तान की मीरिम चिनिबेकोवा को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरे राउंड में रेफरी ने मुकाबला रोक दिया था और जीत मेघा को मिली।

हर्षिका को सेमीफाइनल में अमेरिका की लॉरिन एलमोर के खिलाफ 2-3 के करीबी फैसले से हार मिली। प्राची टोकस का सफर रूस की समीरा इतोनिएवा के खिलाफ 1-4 की हार के साथ थमा। इन नतीजों के बावजूद दोनों खिलाड़ियों के कांस्य ने भारत की कुल पदक संख्या बढ़ाई। महिला टीम के परिणामों ने अभियान को व्यापक योगदान दिया।

बुडवा में दुनिया भर के युवाओं का मुकाबला

चैंपियनशिप का आयोजन 16 से 27 अक्टूबर तक बुडवा के मेडिटेरेनियन स्पोर्ट्स सेंटर में हुआ। आयोजक के अनुसार, इसमें 69 राष्ट्रीय महासंघों के मुक्केबाजों ने भाग लिया और पुरुषों तथा महिलाओं की कुल 20 भार श्रेणियों में मुकाबले हुए।

यह विश्व बॉक्सिंग की अंडर-19 चैंपियनशिप का दूसरा संस्करण था। पहला आयोजन 2024 में अमेरिका के कोलोराडो में हुआ था। आयोजक इस मंच को युवा प्रतिभाओं के अंतरराष्ट्रीय अनुभव से जोड़ता है। अलग देशों की मुक्केबाजी शैलियों के बीच खेलना उभरते खिलाड़ियों को अपनी तैयारी परखने और अगले स्तर की जरूरतें समझने का अवसर देता है।

विश्व बॉक्सिंग की समापन रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतियोगिता में 474 खिलाड़ी शामिल थे और 80 मुक्केबाजों ने पदक जीते। रूस पांच स्वर्ण के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि उज्बेकिस्तान ने चार स्वर्ण हासिल किए। इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में आदित्य का अपने भार वर्ग में चैंपियन बनना भारतीय युवा मुक्केबाजी के लिए उल्लेखनीय परिणाम है।

आगे के सफर के लिए मजबूत आधार

विश्व बॉक्सिंग इस प्रतियोगिता को युवा खिलाड़ियों और सीनियर अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी के बीच महत्वपूर्ण पड़ाव मानता है। आदित्य के लिए बुडवा का अनुभव अब आगे की तैयारी का आधार बन सकता है। अलग देशों के प्रतिद्वंद्वियों का सामना करना और दबाव वाले फाइनल में वापसी करना उनके खेल के विकास में उपयोगी अनुभव हैं।

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