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खेल

Asian Games 2026: भारत ने 492 खिलाड़ियों का दल किया मंजूर, नीरज चोपड़ा समेत कई दिग्गजों पर रहेंगी नजरें

भारत ने जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स 2026 के लिए 492 खिलाड़ियों के दल को मंजूरी दी है। 265 पुरुष और 227 महिला खिलाड़ियों वाले भारतीय दल में एथलेटिक्स सबसे बड़ा समूह है। नीरज चोपड़ा, पीवी सिंधु, लक्ष्य सेन और कई अन्य प्रमुख खिलाड़ी भारत की पदक उम्मीदों का हिस्सा हैं।

Asian Games 2026: भारत ने 492 खिलाड़ियों का दल किया मंजूर, नीरज चोपड़ा समेत कई दिग्गजों पर रहेंगी नजरें
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: OutlookIndia

एशियन गेम्स 2026 के लिए भारत की बड़ी तैयारी

नई दिल्ली: एशियन गेम्स 2026 में मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद के साथ भारत ने 492 खिलाड़ियों के दल को मंजूरी दे दी है। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय से स्वीकृत इस दल में 265 पुरुष और 227 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। भारतीय खिलाड़ी जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले 20वें एशियन गेम्स में चुनौती पेश करेंगे।

भारत के लिए यह प्रतियोगिता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले एशियन गेम्स में देश ने अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। ऐसे में इस बार भारतीय खिलाड़ियों के सामने न सिर्फ उस उपलब्धि को दोहराने, बल्कि उससे आगे निकलने की बड़ी चुनौती होगी।

73 खिलाड़ियों के साथ एथलेटिक्स सबसे बड़ा दल

भारतीय दल में एथलेटिक्स के 73 खिलाड़ी शामिल हैं, जिनमें 35 पुरुष और 38 महिलाएं हैं। यह किसी एक खेल में भारत का सबसे बड़ा समूह है।

इस टीम में दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। उनके अलावा मुरली श्रीशंकर, गुलवीर सिंह, तेजस्विन शंकर और ज्योति याराजी जैसे खिलाड़ी भी भारतीय चुनौती को मजबूत करेंगे।

नीरज चोपड़ा के सामने एक विशेष उपलब्धि हासिल करने का अवसर होगा। वह पुरुष भाला फेंक में लगातार तीसरा एशियन गेम्स स्वर्ण पदक जीतने की कोशिश करेंगे।

पिछले एशियन गेम्स में एथलेटिक्स ने दिलाए थे 29 पदक

भारत के लिए एथलेटिक्स का महत्व आंकड़ों से भी समझा जा सकता है। हांगझोऊ एशियन गेम्स में भारतीय एथलेटिक्स टीम ने कुल 29 पदक—6 स्वर्ण, 14 रजत और 9 कांस्य— जीते थे। कुल पदकों के लिहाज से यह भारत का सबसे सफल खेल रहा था।

इसी कारण 2026 में भी एथलेटिक्स से बड़ी उम्मीदें रहेंगी। नीरज चोपड़ा के साथ अविनाश साबले, तजिंदरपाल सिंह तूर, पारुल चौधरी और अन्नू रानी जैसे पिछले संस्करण के स्वर्ण पदक विजेता फिर शीर्ष स्थान हासिल करने की कोशिश करेंगे।

बैडमिंटन में सिंधु, लक्ष्य और सात्विक-चिराग पर नजर

भारत ने बैडमिंटन के लिए 20 खिलाड़ियों को चुना है। इसमें पीवी सिंधु, लक्ष्य सेन और आयुष शेट्टी जैसे प्रमुख खिलाड़ी शामिल हैं।

डबल्स में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी-चिराग शेट्टी और महिला युगल में ट्रीसा जॉली-गायत्री गोपीचंद की जोड़ी भारतीय उम्मीदों को मजबूती देगी।

बैडमिंटन में एशियाई स्तर की प्रतिस्पर्धा बेहद कठिन मानी जाती है। चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसी मजबूत टीमों की मौजूदगी के कारण भारतीय खिलाड़ियों के लिए पदक तक पहुंचना आसान नहीं होगा।

बॉक्सिंग और कुश्ती में भी भारत की मजबूत चुनौती

भारत ने मुक्केबाजी में 11 खिलाड़ियों को मंजूरी दी है। इसमें लवलीना बोरगोहेन, नरेंदर बेरवाल और जदुमणि सिंह जैसे खिलाड़ी शामिल हैं।

कुश्ती में 16 खिलाड़ी भारतीय चुनौती पेश करेंगे। इनमें विश्व चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता अंतिम पंघाल और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता अमन सहरावत जैसे नाम शामिल हैं।

इसके अलावा रोइंग में 22 और ईस्पोर्ट्स में 15 भारतीय खिलाड़ियों को मंजूरी दी गई है।

क्रिकेट और कबड्डी टीमों के सामने खिताब बचाने की चुनौती

भारत की पुरुष और महिला क्रिकेट टीमें भी एशियन गेम्स में उतरेंगी। इसके साथ ही पुरुष और महिला कबड्डी टीमें भी प्रतियोगिता का हिस्सा होंगी।

इन चारों टीमों के सामने एक खास लक्ष्य होगा—अपने एशियन गेम्स स्वर्ण पदक की रक्षा करना।

टीम खेलों में भारत की सफलता कुल पदक तालिका पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती है। खासकर कबड्डी को लंबे समय से भारत के मजबूत खेलों में गिना जाता रहा है, जबकि क्रिकेट की मौजूदगी भारतीय अभियान को अतिरिक्त आकर्षण देती है।

Hangzhou 2022 में भारत ने बनाया था ऐतिहासिक रिकॉर्ड

भारत ने पिछले एशियन गेम्स में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 107 पदक हासिल किए थे और पदक तालिका में चौथा स्थान प्राप्त किया था। इनमें 28 स्वर्ण, 38 रजत और 41 कांस्य पदक शामिल थे।

यही प्रदर्शन अब आइची-नागोया 2026 के लिए एक बड़ा पैमाना बन गया है।

107 पदकों की उपलब्धि ने दिखाया था कि भारत अब केवल कुछ चुनिंदा खेलों पर निर्भर नहीं है। एथलेटिक्स, शूटिंग, तीरंदाजी, कबड्डी, क्रिकेट और अन्य स्पर्धाओं में बेहतर प्रदर्शन ने पदकों का आधार व्यापक किया है।

492 खिलाड़ियों का चयन क्यों है महत्वपूर्ण?

दल का आकार बड़ा होने के बावजूद चयन का जोर केवल अधिक भागीदारी पर नहीं है। खेल मंत्रालय द्वारा सितंबर 2025 में जारी चयन नीति में व्यक्तिगत स्पर्धाओं के लिए सामान्य तौर पर एशियाई स्तर पर शीर्ष छह के अनुरूप प्रदर्शन और टीम स्पर्धाओं के लिए शीर्ष आठ के स्तर को प्रमुख मानदंड बनाया गया था। विशेष परिस्थितियों में उचित कारणों के आधार पर छूट का प्रावधान भी रखा गया है।

इस दृष्टिकोण का उद्देश्य ऐसे खिलाड़ियों और टीमों को प्राथमिकता देना है जिनके पास महाद्वीपीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन करने की वास्तविक क्षमता हो।

हालांकि चयन को लेकर कुछ विवाद भी सामने आए हैं और कुछ खिलाड़ियों के बाहर रहने के बाद सवाल उठे हैं। खेल मंत्रालय ने संकेत दिया है कि वह घोषित चयन मानकों पर कायम रहेगा।

भारत के सामने 107 पदकों से आगे निकलने की चुनौती

492 खिलाड़ियों की मौजूदगी अपने आप में रिकॉर्ड पदकों की गारंटी नहीं देती। एशियन गेम्स में चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसी खेल महाशक्तियों के अलावा अलग-अलग खेलों में ईरान, उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, इंडोनेशिया और अन्य देशों से कड़ी चुनौती मिल सकती है।

भारत की संभावनाएं काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेंगी कि उसके स्थापित सितारे दबाव में कैसा प्रदर्शन करते हैं और कितने नए खिलाड़ी अप्रत्याशित पदक जीतने में सफल होते हैं।

एथलेटिक्स जैसे बड़े पदक स्रोत में पिछला प्रदर्शन दोहराना अहम होगा, जबकि शूटिंग, बैडमिंटन, कुश्ती, मुक्केबाजी, कबड्डी और अन्य खेल भारत की कुल पदक संख्या बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

निष्कर्ष

Aichi-Nagoya Asian Games 2026 भारत के लिए हांगझोऊ की ऐतिहासिक सफलता के बाद अगली बड़ी परीक्षा होगी।

नीरज चोपड़ा जैसे अनुभवी चैंपियन से लेकर नई पीढ़ी के खिलाड़ियों तक, 492 सदस्यीय दल में भारत की उम्मीदों का व्यापक दायरा दिखाई देता है। अब असली सवाल यह होगा कि क्या भारतीय खिलाड़ी 2022 के रिकॉर्ड प्रदर्शन को दोहरा या उससे बेहतर कर पाएंगे।

19 सितंबर से शुरू होने वाले मुकाबलों में इसका जवाब मिलना शुरू होगा।

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