एशियन गेम्स से पहले भारतीय वुशु में चयन विवाद
एशियन गेम्स 2026 से ठीक पहले भारतीय वुशु टीम में बड़ा चयन विवाद सामने आया है। महिला 60 किग्रा सांडा वर्ग की खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी को भारतीय दल से हटाकर उनकी जगह दो बार की एशियन गेम्स पदक विजेता नाओरेम रोशिबिना देवी को शामिल किया गया है।
दिव्यांशी का नाम खेल मंत्रालय की 22 अगस्त को जारी सूची में सात सदस्यीय भारतीय वुशु टीम में शामिल था। बाद में उन्हें मेडिकल आधार पर टीम से बाहर कर दिया गया। Wushu Association of India (WAI) ने कहा है कि मेडिकल जांच में उनके घुटने में partial high-grade ACL tear और large effusion पाया गया था।
दूसरी ओर, दिव्यांशी ने फैसले पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि डॉक्टर ने उन्हें जापान में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि इतना महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया।
दिव्यांशी ने लगाए मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के आरोप
सोशल मीडिया पर सामने आए एक भावुक वीडियो में दिव्यांशी ने आरोप लगाया कि वह पिछले कई महीनों से मानसिक उत्पीड़न का सामना कर रही थीं।
उनका दावा है कि चयन ट्रायल में उन्होंने रोशिबिना देवी को हराया था और इसी आधार पर एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार उन्होंने हासिल किया था।
दिव्यांशी ने पुराने राष्ट्रीय शिविर से जुड़ा शारीरिक उत्पीड़न का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि श्रीनगर में आयोजित एक कैंप के दौरान उनके कंधे को चोट पहुंची थी, जिसके कारण वह कुछ दिनों तक अभ्यास नहीं कर सकीं।
ये गंभीर आरोप फिलहाल दिव्यांशी के दावे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
WAI ने कहा—फैसला चयन नहीं, खिलाड़ी की फिटनेस से जुड़ा
Wushu Association of India ने दिव्यांशी के टीम से बाहर होने को चयन में पक्षपात से जोड़ने के बजाय मेडिकल आधार पर लिया गया फैसला बताया है।
WAI के अनुसार, दिव्यांशी ने जून 24 से 29 के बीच चीन के हुबेई में आयोजित 2026 SCO Wushu Sanda Championship के दौरान चोट लगने की जानकारी दी थी। इसके बाद वह करीब एक महीने घर पर रहने के बाद 10 अगस्त को NIS पटियाला में राष्ट्रीय शिविर से दोबारा जुड़ीं।
फेडरेशन के बयान के मुताबिक, 14 अगस्त को प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने दर्द की शिकायत की और 14 तथा 15 अगस्त को अभ्यास नहीं किया। 17 अगस्त को भी परेशानी सामने आई, जिसके बाद अगले कुछ दिनों तक उनका प्रशिक्षण हल्का रखा गया।
MRI रिपोर्ट के बाद लिया गया फैसला
WAI के अनुसार, परिवार की सहमति के बाद 23 अगस्त को पटियाला के मणिपाल अस्पताल में दिव्यांशी की MRI कराई गई। रिपोर्ट की समीक्षा के बाद उनकी चोट को partial high-grade ACL tear with large effusion बताया गया।
फेडरेशन का कहना है कि खिलाड़ी की सेहत, सुरक्षा और लंबे खेल करियर को ध्यान में रखते हुए मेडिकल सलाह के आधार पर उन्हें प्रतिस्पर्धी गतिविधियों और पूर्ण प्रशिक्षण से दूर रहने की सलाह दी गई।
इसके बाद WAI ने Indian Olympic Association (IOA), Ministry of Youth Affairs and Sports और Sports Authority of India को उनकी चोट के बारे में जानकारी दी।
खेल मंत्रालय के एक सूत्र ने PTI को बताया कि 9 सितंबर को WAI ने IOA को खिलाड़ी को चोट के कारण वापस लेने की जरूरत की जानकारी दी थी और इसके बाद स्थापित प्रक्रिया के अनुसार टीम में बदलाव को मंजूरी दी गई।
दिव्यांशी का दावा—डॉक्टर ने खेलने की अनुमति दी थी
दिव्यांशी का पक्ष इससे अलग है। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें चोट लगी थी, लेकिन उनका दावा है कि डॉक्टर ने टेपिंग के साथ खेलने की संभावना बताई थी।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन में उन्हें खेलने की अनुमति थी, तो उस पक्ष को क्यों स्वीकार नहीं किया गया। साथ ही उनका कहना था कि टीम से उनका नाम हटाने से पहले उन्हें निर्णय की जानकारी और अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए था।
यहीं विवाद का मुख्य बिंदु है—फेडरेशन मेडिकल रिपोर्ट और खिलाड़ी की दीर्घकालिक सुरक्षा का हवाला दे रहा है, जबकि दिव्यांशी का दावा है कि वह प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में थीं।
चयन ट्रायल का नतीजा भी विवाद के केंद्र में
मामला इसलिए भी संवेदनशील बन गया क्योंकि दिव्यांशी का कहना है कि उन्होंने चयन ट्रायल में रोशिबिना देवी को हराया था।
रोशिबिना भारतीय वुशु की अनुभवी खिलाड़ियों में शामिल हैं और दो बार एशियन गेम्स में पदक जीत चुकी हैं। दिव्यांशी की जगह अब वही महिलाओं के 60 किग्रा सांडा वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।
इस बदलाव ने चयन ट्रायल के परिणाम और बाद में मेडिकल आधार पर किए जाने वाले प्रतिस्थापन की प्रक्रिया को लेकर सवाल पैदा किए हैं। हालांकि केवल ट्रायल का नतीजा किसी खिलाड़ी की अंतिम भागीदारी सुनिश्चित नहीं करता; बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में फिटनेस और मेडिकल क्लीयरेंस भी अंतिम टीम संरचना को प्रभावित कर सकते हैं।
बाद में फेडरेशन के फैसले को स्वीकार करने की बात कही
विवाद सामने आने के बाद 13 सितंबर की रिपोर्टों में दिव्यांशी के रुख में बदलाव भी सामने आया। उन्होंने कहा कि अब वह फेडरेशन द्वारा लिए गए निर्णय के पीछे की वजह समझती हैं और फिलहाल उनका ध्यान घुटने की चोट से उबरने पर है।
हालांकि, इससे उनके द्वारा लगाए गए उत्पीड़न संबंधी आरोप स्वतः समाप्त नहीं होते। इन आरोपों और चयन प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर किसी निष्पक्ष जांच या आधिकारिक निष्कर्ष की जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आई है।
खिलाड़ी की सुरक्षा भी बनी अहम चिंता
दिव्यांशी के शुरुआती वीडियो ने चयन विवाद के साथ उनकी मानसिक स्थिति को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा की। वीडियो में उन्होंने आत्महत्या से संबंधित बातें कही थीं और वह अत्यधिक भावनात्मक स्थिति में दिखाई दीं।
ऐसी परिस्थिति में खेल प्रशासन के सामने केवल चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता का सवाल नहीं है। युवा खिलाड़ियों को विवाद, चोट और बड़े टूर्नामेंट से अचानक बाहर होने जैसी परिस्थितियों में पर्याप्त मानसिक स्वास्थ्य सहायता और संस्थागत समर्थन उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है।
फिलहाल पुष्टि योग्य तथ्य यह है कि दिव्यांशी को चोट के आधार पर एशियन गेम्स टीम से हटाया गया है और उनकी जगह रोशिबिना देवी को शामिल किया गया है। उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार से जुड़े आरोप दिव्यांशी ने लगाए हैं, जबकि WAI अपने फैसले को मेडिकल रिपोर्ट और खिलाड़ी की सुरक्षा पर आधारित बता रहा है।
