एशियन पैरा गेम्स में भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि
नई दिल्ली: जापान के आइची-नागोया में आयोजित पांचवें एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से नया इतिहास लिख दिया है। भारत ने कुल 114 पदक जीतकर इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया। भारतीय दल ने 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदक हासिल किए और अंतिम पदक तालिका में चौथा स्थान प्राप्त किया।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि भारत ने पिछली प्रतियोगिता की तुलना में काफी कम खिलाड़ियों को मैदान में उतारा था। इसके बावजूद भारतीय पैरा एथलीटों ने न केवल अपने पुराने पदक रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा, बल्कि स्वर्ण पदकों की संख्या में भी नया कीर्तिमान स्थापित किया।23 अक्टूबर को भारतीय खिलाड़ियों ने नौ स्वर्ण पदक जीतकर अपने अभियान का शानदार समापन किया। शनिवार, 24 अक्टूबर को प्रतियोगिताओं की समाप्ति के साथ भारत का चौथा स्थान भी सुनिश्चित हो गया।
168 खिलाड़ियों ने हासिल किए 114 पदक
भारत ने एशियन पैरा गेम्स 2026 के लिए कुल 168 खिलाड़ियों का दल भेजा था। इसके मुकाबले हांगझोऊ में 2023 में आयोजित पिछले संस्करण में भारत के 309 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। हांगझोऊ में भारत ने शुरुआत में 111 पदक जीते थे, लेकिन डोपिंग उल्लंघनों के कारण बाद में तीन पदक वापस ले लिए गए। इस प्रकार पिछली प्रतियोगिता का संशोधित आधिकारिक आंकड़ा 108 पदक रह गया था।नागोया में भारत ने उस रिकॉर्ड को छह पदकों से पीछे छोड़ दिया। विशेष बात यह रही कि पिछली बार के 27 स्वर्ण पदकों के मुकाबले इस बार भारतीय खिलाड़ियों ने 30 स्वर्ण जीते। इस प्रदर्शन से स्पष्ट होता है कि भारतीय पैरा खेलों में प्रतिभा विभिन्न स्पर्धाओं में सामने आ रही है।
पैरा एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा
भारत की ऐतिहासिक सफलता में पैरा एथलेटिक्स का सबसे बड़ा योगदान रहा। ट्रैक और फील्ड स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने 22 स्वर्ण, 19 रजत और 24 कांस्य सहित कुल 65 पदक जीते। भालाफेंक खिलाड़ी सुमित अंतिल ने एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता साबित की। उन्होंने पुरुषों की भालाफेंक स्पर्धा में 72.46 मीटर का थ्रो करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसी स्पर्धा में महेंद्र गुर्जर ने रजत और संदीप संजय सरगर ने कांस्य पदक हासिल किया। प्रणव सूरमा ने पुरुषों की क्लब थ्रो F51 स्पर्धा में 32.87 मीटर का गेम्स रिकॉर्ड बनाकर स्वर्ण जीता। वहीं सिमरन ने महिलाओं की 100 मीटर और 200 मीटर T12 स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक हासिल किए। इन परिणामों ने भारतीय एथलेटिक्स दल को पूरे आयोजन में सबसे सफल भारतीय टीम बना दिया।
मोना अग्रवाल और निशाद कुमार ने जीते दो-दो स्वर्ण
भारतीय निशानेबाज मोना अग्रवाल इस प्रतियोगिता की प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल रहीं। उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 स्पर्धा में गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन SH1 स्पर्धा में उन्होंने विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए दूसरा स्वर्ण हासिल किया। दूसरी ओर निशाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप और लॉन्ग जंप T47 स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर शानदार उपलब्धि दर्ज की। दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें 24 अक्टूबर के समापन समारोह के लिए भारतीय दल का ध्वजवाहक चुना गया।
बैडमिंटन और तीरंदाजी में भी शानदार प्रदर्शन
भारतीय पैरा बैडमिंटन खिलाड़ियों ने कुल 16 पदक जीते। इनमें तीन स्वर्ण, पांच रजत और आठ कांस्य शामिल रहे।
पेरिस पैरालंपिक चैंपियन नितेश कुमार ने पुरुष एकल SL3 के फाइनल में हमवतन प्रमोद भगत को 21-18, 21-16 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। महिला युगल SL3-SU5 में तुलसीमति मुरुगेसन और मानसी जोशी की जोड़ी ने चीन की खिलाड़ियों को पराजित कर स्वर्ण हासिल किया। तीरंदाजी में हरविंदर सिंह और विजय सुंडी ने पुरुष रिकर्व युगल का स्वर्ण जीता। भारतीय तीरंदाजों ने कुल छह पदक अपने नाम किए।
तैराकी और टेबल टेनिस में दिखी नई उम्मीद
भारत की सफलता का एक महत्वपूर्ण पहलू उन खेलों का प्रदर्शन रहा, जिनमें पिछली प्रतियोगिता के मुकाबले बड़ा सुधार हुआ। पैरा तैराकी में भारतीय खिलाड़ियों ने 11 पदक जीते, जबकि हांगझोऊ में केवल एक पदक मिला था। इसी तरह टेबल टेनिस में भारत ने सात कांस्य पदक जीते, जबकि पिछले संस्करण में यह संख्या दो थी। हालांकि बैडमिंटन, तीरंदाजी और निशानेबाजी में कुल पदकों की संख्या पिछली बार से कम रही। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि रिकॉर्ड प्रदर्शन के बावजूद कुछ खेलों में सुधार की गुंजाइश बनी हुई है।
चीन पहले स्थान पर, भारत ने दक्षिण कोरिया को पीछे छोड़ा
पांचवें एशियन पैरा गेम्स की अंतिम पदक तालिका में चीन ने पहला स्थान हासिल किया। मेजबान जापान दूसरे और उज्बेकिस्तान तीसरे स्थान पर रहा।भारत 30 स्वर्ण पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा, जबकि दक्षिण कोरिया 29 स्वर्ण पदकों के साथ पांचवें स्थान पर समाप्त हुआ। इस प्रकार भारत ने न केवल कुल पदकों का अपना रिकॉर्ड तोड़ा, बल्कि एशियन पैरा गेम्स के इतिहास में अपनी सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग भी हासिल की।
भारतीय पैरा खेलों के भविष्य के लिए क्या मायने हैं?
इस उपलब्धि ने भारतीय पैरा खिलाड़ियों की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को सामने रखा है। हालांकि एक प्रतियोगिता की सफलता को भविष्य के अंतरराष्ट्रीय परिणामों की गारंटी नहीं माना जा सकता।
खेल विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं के सामने अब चुनौती है कि खिलाड़ियों को नियमित प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव और बेहतर खेल सुविधाएं मिलती रहें।
पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष देवेंद्र झाझरिया ने 114 पदकों की उपलब्धि को भारतीय खिलाड़ियों की मेहनत और दृढ़ संकल्प का परिणाम बताया।
एशियन पैरा गेम्स 2026 भारतीय खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया है। केवल 168 खिलाड़ियों के दल द्वारा 114 पदक जीतना और चौथा स्थान हासिल करना देश के पैरा खेलों की प्रगति को दर्शाता है।
मोना अग्रवाल, निशाद कुमार, सुमित अंतिल, नितेश कुमार और अन्य पदक विजेताओं की सफलता ने भारतीय दल को नई पहचान दी है।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या भारत इस प्रदर्शन को आगे आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी दोहरा पाएगा। इसके लिए खिलाड़ियों की उपलब्धियों के साथ-साथ खेल व्यवस्था में निरंतर निवेश और सुधार भी जरूरी होगा।
