CWG 2026 में भारतीय वेटलिफ्टर्स का दमदार प्रदर्शन
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय वेटलिफ्टिंग दल ने आठ पदकों के साथ अपना अभियान समाप्त किया। भारतीय खिलाड़ियों ने अलग-अलग भार वर्गों में लगातार पदक की चुनौती पेश की और कुल एक स्वर्ण, छह रजत और एक कांस्य पदक हासिल किया।
मुख्य कोच विजय शर्मा ने टीम के प्रदर्शन को सकारात्मक बताते हुए खिलाड़ियों की मेहनत के साथ सरकारी स्तर पर उपलब्ध कराई गई सुविधाओं और सहयोग को भी महत्वपूर्ण माना। हालांकि उनका आकलन यह भी रहा कि टीम कुछ मुकाबलों में इससे बेहतर नतीजे हासिल कर सकती थी।
मीराबाई चानू ने दिलाया स्वर्ण
भारतीय अभियान का सबसे बड़ा आकर्षण स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू का प्रदर्शन रहा। उन्होंने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका लगातार तीसरा स्वर्ण पदक रहा, जिससे प्रतियोगिता में उनका शानदार रिकॉर्ड और मजबूत हुआ।
भारतीय दल के बाकी पदकों में छह रजत और एक कांस्य शामिल रहे। इस तरह 11 भार वर्गों में उतरने वाले भारतीय वेटलिफ्टर्स में से आठ पदक जीतने में सफल रहे।
कोच विजय शर्मा ने सरकारी सहयोग को बताया अहम

टीम की सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए विजय शर्मा ने भारत में खिलाड़ियों के लिए विकसित हो रहे सपोर्ट सिस्टम की प्रशंसा की। उनका मानना है कि राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को ट्रेनिंग, तैयारी और जरूरी सुविधाओं के मामले में मजबूत सहयोग मिल रहा है।
CWG से पहले भारतीय वेटलिफ्टिंग दल ने ब्रिटेन में लगभग 25 दिनों का अनुकूलन शिविर भी किया था। इससे खिलाड़ियों को स्थानीय परिस्थितियों, समय और वातावरण के अनुसार खुद को तैयार करने का अवसर मिला।
लक्ष्य के करीब पहुंची भारतीय टीम
कॉमनवेल्थ गेम्स शुरू होने से पहले विजय शर्मा ने भारतीय वेटलिफ्टिंग दल से लगभग आठ से दस पदकों की उम्मीद जताई थी। प्रतियोगिता समाप्त होने पर भारत ने आठ पदक जीतकर इस लक्ष्य की निचली सीमा हासिल कर ली।
यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टीम में अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा वेटलिफ्टर्स को भी बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिस्पर्धा का मौका मिला।
अब आगे की बड़ी चुनौतियों पर नजर
कॉमनवेल्थ स्तर पर भारत लंबे समय से वेटलिफ्टिंग की मजबूत टीमों में शामिल रहा है। हालांकि एशियाई और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कहीं अधिक कठिन होती है। ऐसे में CWG के आठ पदकों को अंतिम उपलब्धि के बजाय अगले चरण की तैयारी के संकेत के रूप में देखना अधिक महत्वपूर्ण होगा।
रजत पदकों की बड़ी संख्या यह भी बताती है कि कई भारतीय खिलाड़ी शीर्ष स्थान के काफी करीब पहुंचे। आने वाले टूर्नामेंटों में तकनीकी सुधार, निरंतरता और दबाव में बेहतर प्रदर्शन इन खिलाड़ियों को रजत से स्वर्ण की ओर ले जा सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रदर्शन?
आठ पदकों का प्रदर्शन भारतीय वेटलिफ्टिंग की गहराई को दर्शाता है। मीराबाई चानू जैसे स्थापित नाम के अलावा अन्य खिलाड़ियों का पोडियम तक पहुंचना बताता है कि भारत के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए खिलाड़ियों का व्यापक समूह तैयार हो रहा है।
साथ ही, कोच विजय शर्मा की सरकारी सहयोग पर टिप्पणी खेलों में लंबे समय की योजना, विदेशी प्रशिक्षण, वैज्ञानिक सपोर्ट और बेहतर बुनियादी ढांचे की भूमिका को सामने लाती है।
संतुलित विश्लेषण
आठ पदक निश्चित रूप से मजबूत परिणाम हैं, लेकिन छह रजत पदक सुधार की गुंजाइश भी दिखाते हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में सफलता भारत के लिए उत्साहजनक संकेत है, पर एशियाई खेलों, विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक जैसे आयोजनों में चीन तथा अन्य शीर्ष वेटलिफ्टिंग देशों के सामने चुनौती ज्यादा कठिन होगी।
इसलिए सरकारी सहायता और बेहतर सुविधाओं का वास्तविक दीर्घकालिक प्रभाव इस बात से तय होगा कि भारतीय खिलाड़ी आने वाले बड़े वैश्विक टूर्नामेंटों में कितनी निरंतरता से पदक जीत पाते हैं।
