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Duleep Trophy Final में Ishan Kishan का धमाका, नाबाद 111 ठोककर East Zone को मजबूत स्थिति में पहुंचाया

East Zone के कप्तान ईशान किशन ने Duleep Trophy 2026-27 फाइनल में South Zone के खिलाफ नाबाद 111 रन की शानदार पारी खेली। चेन्नई में पहले दिन East Zone ने 79 ओवर में 385/4 बनाए। किशन के साथ कुमार कुशाग्र 63 रन पर नाबाद रहे, जबकि अभिमन्यु ईश्वरन और शिखर मोहन ने भी महत्वपूर्ण पारियां खेलीं।

Duleep Trophy Final में Ishan Kishan का धमाका, नाबाद 111 ठोककर East Zone को मजबूत स्थिति में पहुंचाया
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Janta Scope

फाइनल में कप्तान Ishan Kishan ने संभाली कमान

Duleep Trophy 2026-27 के फाइनल में ईशान किशन ने बल्ले से कप्तानी की जिम्मेदारी निभाते हुए East Zone को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।

चेन्नई के MA Chidambaram Stadium में South Zone के खिलाफ पहले दिन का खेल समाप्त होने तक किशन 135 गेंदों पर 111 रन बनाकर नाबाद थे। उनकी पारी की बदौलत East Zone ने 79 ओवर में चार विकेट खोकर 385 रन बनाए।

किशन के साथ विकेटकीपर-बल्लेबाज कुमार कुशाग्र 63 रन पर नाबाद लौटे।

East Zone ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था और दिन खत्म होने तक यह फैसला पूरी तरह उसके पक्ष में जाता दिखाई दिया।

122 गेंदों में पूरा किया शतक

किशन ने शुरुआत में अपनी स्वाभाविक आक्रामकता को नियंत्रित रखा और परिस्थितियों के मुताबिक पारी आगे बढ़ाई।

उन्होंने 122 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। तीन अंकों तक पहुंचने के दौरान उनके बल्ले से 12 चौके और दो छक्के निकले।

शतक पूरा करने के बाद भी किशन क्रीज पर बने रहे और दिन का खेल समाप्त होने तक उनका स्कोर 111 रन पहुंच चुका था।

इस पारी के दौरान उन्होंने खास तौर पर South Zone के गेंदबाजों की छोटी गेंदों का फायदा उठाया। गेंदबाजों ने जब उन्हें कट और पुल खेलने की गुंजाइश दी तो किशन ने रन बनाने के मौके नहीं छोड़े।

First-Class Cricket का 10वां शतक

यह ईशान किशन के प्रथम श्रेणी करियर का 10वां शतक है।

Duleep Trophy में यह उनका दूसरा शतक है। दिलचस्प रूप से प्रतियोगिता में उनका पिछला शतक भी 111 रन का था, जो उन्होंने दो साल पहले Anantapur में India C की ओर से खेलते हुए बनाया था।

किशन का प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सर्वोच्च स्कोर 273 रन है। उन्होंने यह पारी Jharkhand की ओर से Delhi के खिलाफ 2016 Ranji Trophy में खेली थी।

फाइनल की इस पारी के दौरान किशन ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 4,000 रन का आंकड़ा भी पार किया

उनके लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह भारत के लिए अपना आखिरी Test 2023 में खेले थे। घरेलू red-ball cricket में इस तरह की बड़ी पारी उनके प्रथम श्रेणी रिकॉर्ड में एक और मजबूत प्रदर्शन जोड़ती है।

Vaibhav Sooryavanshi ने दिलाई तेज शुरुआत

East Zone की मजबूत स्थिति केवल किशन की पारी का परिणाम नहीं थी। टीम के शीर्ष क्रम ने पहले ही अच्छी नींव तैयार कर दी थी।

युवा वैभव सूर्यवंशी ने 44 रन की तेज पारी खेली। उनके साथ अभिमन्यु ईश्वरन ने शुरुआती साझेदारी में South Zone के गेंदबाजों पर दबाव बनाया।

ईश्वरन ने अपनी 31वीं वर्षगांठ पर 72 रन बनाए, लेकिन एक बड़ी पारी की ओर बढ़ते समय रन आउट हो गए।

इसके बाद शिखर मोहन ने 85 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। वह शतक की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन चामा मिलिंद की गेंद पर बोल्ड हो गए।

इस तरह East Zone के शुरुआती और मध्यक्रम ने किशन के क्रीज पर आने से पहले ही बड़े स्कोर की जमीन तैयार कर दी थी।

Kishan-Kushagra की साझेदारी ने बढ़ाया दबाव

दिन के आखिरी हिस्से में किशन को कुमार कुशाग्र का मजबूत साथ मिला।

कुशाग्र ने South Zone के स्पिनरों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी की और पहले दिन का खेल खत्म होने तक 63 रन बनाकर नाबाद रहे।

दोनों विकेटकीपर-बल्लेबाजों ने पांचवें विकेट के लिए शतकीय साझेदारी करते हुए South Zone की वापसी की संभावनाओं को कमजोर कर दिया।

खास तौर पर अंतिम सत्र में दोनों ने विकेट बचाने के साथ रन गति भी बनाए रखी।

South Zone के गेंदबाज नहीं बना सके लगातार दबाव

South Zone की गेंदबाजी पहले दिन East Zone की बल्लेबाजी को लंबे समय तक नियंत्रित नहीं कर सकी।

चामा मिलिंद ने दो विकेट लिए और South Zone के सबसे सफल गेंदबाज रहे। लेकिन दूसरे गेंदबाज लगातार breakthroughs हासिल नहीं कर सके।

भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज को पहले दिन कोई विकेट नहीं मिला और वह महंगे साबित हुए।

South Zone की मुश्किलें slow over-rate ने भी बढ़ाईं। अतिरिक्त आधा घंटा मिलने के बावजूद टीम केवल 79 ओवर ही डाल सकी, यानी निर्धारित 90 ओवर से 11 ओवर कम।

दिन के आखिरी हिस्से में खराब होती रोशनी के कारण South Zone को दोनों छोर से स्पिन गेंदबाजी का इस्तेमाल भी करना पड़ा।

Chepauk की पिच आगे निभा सकती है बड़ी भूमिका

पहले दिन बल्लेबाजों ने बड़ा स्कोर जरूर बनाया, लेकिन Chepauk की पिच में कुछ गेंदों पर turn और low bounce भी देखने को मिला।

यदि मैच आगे बढ़ने के साथ पिच धीमी होती है और स्पिनरों को ज्यादा मदद मिलने लगती है, तो पहली पारी का बड़ा स्कोर और महत्वपूर्ण हो सकता है।

यही वजह है कि East Zone दूसरे दिन अपने मौजूदा मजबूत आधार को बड़े स्कोर में बदलना चाहेगा।

किशन और कुशाग्र दोनों नाबाद हैं, इसलिए South Zone के लिए दूसरे दिन की शुरुआत में नई गेंद से जल्दी विकेट लेना अहम होगा।

Semi-Final में भी संकटमोचक बने थे Kishan

फाइनल में शतक से पहले किशन ने सेमीफाइनल में भी कप्तानी पारी खेली थी।

Central Zone के खिलाफ 159 रन के लक्ष्य का पीछा करते समय East Zone दबाव में आ गया था। उस मुकाबले में किशन ने 41 गेंदों पर नाबाद 39 रन बनाकर टीम को चार विकेट से जीत दिलाने और फाइनल में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

अब खिताबी मुकाबले में उनका शतक बताता है कि टूर्नामेंट के दो सबसे महत्वपूर्ण मैचों में कप्तान ने बल्ले से सीधा योगदान दिया है।

East Zone के लिए 14 साल बाद खिताब का मौका

East Zone लंबे अंतराल के बाद Duleep Trophy फाइनल खेल रहा है। टीम ने आखिरी बार 2012-13 में खिताब जीता था

इस लिहाज से पहले दिन का प्रदर्शन महत्वपूर्ण है।

हालांकि 385/4 का स्कोर East Zone को स्पष्ट शुरुआती बढ़त देता है, लेकिन पांच दिवसीय प्रथम श्रेणी मुकाबले में केवल पहले दिन के आधार पर परिणाम तय नहीं किया जा सकता।

दूसरे दिन East Zone की प्राथमिकता मौजूदा स्कोर को 450 या उससे आगे ले जाने की होगी, जबकि South Zone को नई गेंद से किशन-कुशाग्र की साझेदारी जल्द तोड़नी होगी।

Red-Ball Cricket में Kishan का महत्वपूर्ण संदेश

ईशान किशन को अक्सर उनकी आक्रामक white-ball बल्लेबाजी के लिए पहचाना जाता है, लेकिन Duleep Trophy फाइनल की पारी अलग तरह की परीक्षा थी।

उन्होंने 135 गेंदों तक बल्लेबाजी करते हुए आक्रमण और धैर्य के बीच संतुलन बनाया। शीर्ष क्रम से मिली अच्छी शुरुआत को उन्होंने बड़े व्यक्तिगत स्कोर और टीम की मजबूत स्थिति में बदला।

यह पारी अपने आप में भारतीय Test टीम में वापसी की गारंटी नहीं है—राष्ट्रीय चयन कई खिलाड़ियों के प्रदर्शन, टीम संयोजन और चयनकर्ताओं की योजनाओं पर निर्भर करेगा।

लेकिन प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 10वां शतक, 4,000 रन का आंकड़ा और Duleep Trophy फाइनल में कप्तानी करते हुए नाबाद 111 निश्चित रूप से किशन के red-ball résumé को मजबूत करता है।

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