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खेल

हरमनप्रीत कौर के बल्ले से निकला रनों का तूफान, जिम्बाब्वे को 92 रन से हराकर भारत ने किया क्लीन स्वीप

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज में शानदार प्रदर्शन करते हुए 3-0 से क्लीन स्वीप कर लिया है। रायपुर में खेले गए आखिरी मुकाबले में हरमनप्रीत कौर की विस्फोटक बल्लेबाजी ने मैच का रुख पूरी तरह भारत की ओर मोड़ दिया। उन्होंने महज 41 गेंदों में नाबाद 91 रन बनाए। शैफाली वर्मा की 69 रनों की आक्रामक पारी और नंदनी शर्मा की शानदार गेंदबाजी की बदौलत भारत ने जिम्बाब्वे को 92 रनों के बड़े अंतर से हराया

हरमनप्रीत कौर के बल्ले से निकला रनों का तूफान, जिम्बाब्वे को 92 रन से हराकर भारत ने किया क्लीन स्वीप
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: आईसीसी, बीसीसीआई , इंडियन एक्स्प्रेस

रायपुर में भारतीय बल्लेबाजों का दबदबा

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीसरा और आखिरी टी20 मुकाबला खेला गया।

भारतीय कप्तान स्मृति मंधाना ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में सात विकेट खोकर 216 रन बनाए।

इस बड़े स्कोर में सबसे अहम भूमिका हरमनप्रीत कौर और शैफाली वर्मा की रही। दोनों बल्लेबाजों ने जिम्बाब्वे की गेंदबाजी पर दबाव बनाए रखा और मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट लगाए।

217 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम 20 ओवर में सात विकेट पर 124 रन ही बना सकी। इसके साथ ही भारत ने सीरीज के तीनों मुकाबले जीत लिए।

हरमनप्रीत कौर ने 41 गेंदों में जड़े नाबाद 91 रन

भारतीय पारी का सबसे बड़ा आकर्षण हरमनप्रीत कौर की बल्लेबाजी रही। उन्होंने 41 गेंदों का सामना करते हुए 10 चौकों और पांच छक्कों की मदद से नाबाद 91 रन बनाए।

शुरुआत में हरमनप्रीत ने संभलकर खेला, लेकिन क्रीज पर जमने के बाद उनका अंदाज बदल गया। उन्होंने स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ आगे बढ़कर बड़े शॉट लगाए और तेज गेंदबाजों को भी खुलकर निशाना बनाया।

उन्होंने सिर्फ 25 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। मैच के आखिरी ओवरों तक उनका आक्रामक अंदाज बरकरार रहा।

हालांकि वह शतक से नौ रन दूर रह गईं, लेकिन उनकी इस पारी ने भारतीय टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।

खास बात यह रही कि हरमनप्रीत ने घरेलू मैदान पर महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में किसी भारतीय बल्लेबाज के सबसे बड़े व्यक्तिगत स्कोर का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। इससे पहले यह रिकॉर्ड स्मृति मंधाना के नाम था, जिन्होंने दिसंबर 2025 में श्रीलंका के खिलाफ 80 रन बनाए थे।

शैफाली वर्मा ने दी भारत को तेज शुरुआत

हरमनप्रीत से पहले शैफाली वर्मा ने भारतीय बल्लेबाजी की मजबूत नींव रखी।

शैफाली ने 37 गेंदों में 69 रन बनाए। उनकी पारी में छह चौके और पांच छक्के शामिल रहे। उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए जिम्बाब्वे के गेंदबाजों को दबाव में रखा।

इस मुकाबले में स्मृति मंधाना ने खुद ओपनिंग करने के बजाय अनुष्का शर्मा को शैफाली के साथ भेजा।

दोनों ने पहले विकेट के लिए सिर्फ 32 गेंदों में 54 रन जोड़े। अनुष्का 20 गेंदों में 28 रन बनाकर आउट हुईं।

इसके बाद तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरीं निकी प्रसाद नौ रन ही बना सकीं।

लेकिन शैफाली और हरमनप्रीत ने तीसरे विकेट के लिए 84 रनों की साझेदारी करते हुए भारतीय पारी को संभाल लिया। यह साझेदारी मैच में भारत की मजबूत स्थिति का महत्वपूर्ण कारण बनी।

जिम्बाब्वे के बल्लेबाज नहीं कर सके लक्ष्य का पीछा

217 रनों के बड़े लक्ष्य का पीछा करना जिम्बाब्वे के लिए आसान नहीं था।

भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआत से ही विरोधी टीम पर दबाव बनाए रखा। जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी में शार्ने मेयर्स ने सबसे ज्यादा संघर्ष किया।

मेयर्स ने 49 गेंदों में 60 रन बनाए। उनकी पारी में चार चौके और चार छक्के शामिल थे।

बेलव्ड बीजा ने भी 50 गेंदों में 44 रन बनाए, लेकिन टीम की रन गति लक्ष्य के हिसाब से काफी धीमी रही।

जिम्बाब्वे की टीम शुरुआती झटकों से उबरने के बाद भी जरूरी रन गति हासिल नहीं कर सकी। भारतीय गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट निकालकर मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी।

आखिरकार जिम्बाब्वे की पारी 124 रन पर समाप्त हुई और भारत ने 92 रनों से जीत दर्ज की।

नंदनी शर्मा की गेंदबाजी ने दिलाई बड़ी जीत

इस मुकाबले में भारतीय गेंदबाजी की सबसे सफल खिलाड़ी नंदनी शर्मा रहीं।

उन्होंने अपने चार ओवरों में सिर्फ 18 रन खर्च करते हुए तीन महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए।

नंदनी के अलावा निकी प्रसाद ने दो ओवरों में पांच रन देकर एक विकेट लिया। निकी ने जिम्बाब्वे की अर्धशतक बनाने वाली बल्लेबाज शार्ने मेयर्स को आउट किया।

दीप्ति शर्मा ने भी किफायती गेंदबाजी करते हुए एक विकेट लिया, जबकि क्रांति गौड़ और अरुंधति रेड्डी को एक-एक सफलता मिली।

भारतीय गेंदबाजों के सामूहिक प्रदर्शन के कारण जिम्बाब्वे की टीम बड़े लक्ष्य के करीब भी नहीं पहुंच सकी।

कप्तानी छोड़ने के बाद हरमनप्रीत की यादगार वापसी

हरमनप्रीत कौर के लिए यह पारी व्यक्तिगत रूप से भी महत्वपूर्ण रही।

जिम्बाब्वे सीरीज से पहले उन्होंने भारतीय महिला टीम की कप्तानी छोड़ दी थी, जिसके बाद स्मृति मंधाना को टी20 और वनडे टीम की कमान सौंपी गई।

पिछले कुछ मुकाबलों में हरमनप्रीत अपने पुराने बल्लेबाजी अंदाज में नजर नहीं आ रही थीं।

लेकिन रायपुर में खेली गई नाबाद 91 रनों की पारी ने एक बार फिर उनकी क्षमता साबित कर दी।

मैच के दौरान अपनी बल्लेबाजी के बारे में बातचीत करते हुए हरमनप्रीत भावुक भी हो गईं। उन्होंने कोचिंग स्टाफ से मिले सहयोग और अभ्यास के दौरान की गई मेहनत का जिक्र किया।

उनके अनुसार अब वह कप्तानी की अतिरिक्त जिम्मेदारी से अलग होकर अपने खेल का आनंद लेना चाहती हैं।

स्मृति मंधाना की कप्तानी में पहली सीरीज में क्लीन स्वीप

यह सीरीज भारतीय महिला क्रिकेट के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत भी रही।

स्मृति मंधाना की कप्तानी में भारत ने पहला टी20 मुकाबला चार विकेट से जीता था। दूसरे मैच में भारतीय टीम ने नौ विकेट से बड़ी जीत हासिल की।

तीसरे मुकाबले में 92 रनों की जीत ने सीरीज का शानदार समापन किया।

इस दौरान भारतीय टीम ने अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा क्रिकेटरों को भी मौका दिया। अलग-अलग बल्लेबाजी क्रम और गेंदबाजी विकल्प आजमाने से टीम प्रबंधन को आगामी टूर्नामेंटों की तैयारियों में मदद मिल सकती है।

अब वनडे सीरीज पर भारत की नजर

टी20 सीरीज खत्म होने के बाद दोनों देशों के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज खेली जाएगी।

पहला वनडे मुकाबला 23 अक्टूबर को वडोदरा में निर्धारित है। इसके बाद दूसरा मैच 25 अक्टूबर और तीसरा मुकाबला 28 अक्टूबर को खेला जाएगा।

भारतीय टीम की कोशिश टी20 की सफलता को वनडे क्रिकेट में भी जारी रखने की होगी।

वहीं हरमनप्रीत कौर के शानदार फॉर्म में लौटने से भारत के बल्लेबाजी क्रम को मजबूती मिली है।

जिम्बाब्वे के खिलाफ मिली यह जीत सिर्फ एक सीरीज की सफलता नहीं, बल्कि युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के संयोजन को आजमाने का अवसर भी रही। आने वाले बड़े मुकाबलों में मजबूत टीमों के खिलाफ भारत इस प्रदर्शन को कितना दोहरा पाता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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