विज्ञापन - शीर्ष बैनर
Read in English —JantaScope English
खेल

Hockey World Cup 2026: अर्जेंटीना ने भारत को 5-3 से हराया, सेमीफाइनल का सपना टूटा

FIH Men's Hockey World Cup 2026 में भारतीय पुरुष हॉकी टीम की सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीदें खत्म हो गई हैं। अम्स्टेलवीन में खेले गए अहम मुकाबले में अर्जेंटीना ने भारत को 5-3 से हराया। शुरुआती छह मिनट में दो गोल खाने के बाद भारतीय टीम लगातार दबाव में रही और वापसी की कोशिश पर्याप्त साबित नहीं हुई।

Hockey World Cup 2026: अर्जेंटीना ने भारत को 5-3 से हराया, सेमीफाइनल का सपना टूटा
विज्ञापन

द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: TOI

Hockey World Cup 2026: अर्जेंटीना से 5-3 की हार, भारत की सेमीफाइनल उम्मीदें खत्म

भारतीय पुरुष हॉकी टीम का FIH Men's Hockey World Cup 2026 में सेमीफाइनल तक पहुंचने का सपना टूट गया। सोमवार, 24 अगस्त को नीदरलैंड्स के अम्स्टेलवीन स्थित वैगनर हॉकी स्टेडियम में खेले गए दूसरे दौर के अहम मुकाबले में अर्जेंटीना ने भारत को 5-3 से मात दी। इस हार के साथ भारत की अंतिम चार में पहुंचने की गणितीय उम्मीद भी समाप्त हो गई।

भारत के लिए यह मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण था। नीदरलैंड्स के खिलाफ पिछले मैच में 3-1 की हार ने टीम की स्थिति पहले ही मुश्किल बना दी थी। अर्जेंटीना की इंग्लैंड पर जीत के कारण भारत के पास फिर भी एक रास्ता बचा था, लेकिन इसके लिए अर्जेंटीना के खिलाफ बड़े अंतर से जीत जरूरी थी। इसके उलट भारतीय टीम शुरुआती मिनटों से ही पिछड़ गई।

शुरुआती छह मिनट में अर्जेंटीना ने बनाया दबाव

भारत के लिए मुकाबले की शुरुआत बेहद खराब रही। अर्जेंटीना के जोआक्विन टोस्कानी ने पहले ही मिनट में गोल कर टीम को बढ़त दिला दी। इसके बाद छठे मिनट में निकोलस डेला टोरे ने पेनल्टी कॉर्नर का फायदा उठाकर स्कोर 2-0 कर दिया।

इतने महत्वपूर्ण मुकाबले में शुरुआत में ही दो गोल खाने के कारण भारतीय टीम को अपनी रणनीति बदलकर लगातार आक्रामक खेलना पड़ा।

भारत ने पहले क्वार्टर में सुखजीत सिंह के जरिए एक गोल वापस हासिल किया और मुकाबले में वापसी की उम्मीद जगाई, लेकिन अर्जेंटीना ने बाद में फिर नियंत्रण मजबूत कर लिया।

तीसरे क्वार्टर में अर्जेंटीना ने बढ़ाई मुश्किल

मुकाबले के तीसरे क्वार्टर में टॉमस डोमेने ने अर्जेंटीना के लिए दो महत्वपूर्ण गोल किए। उनके गोलों ने भारत पर दबाव और बढ़ा दिया। जोआक्विन टोस्कानी ने भी मैच में अपना दूसरा गोल किया और अर्जेंटीना का स्कोर पांच तक पहुंचा दिया।

भारत ने अंतिम चरण में संघर्ष जारी रखा। सुखजीत सिंह ने मैच में अपना दूसरा गोल किया, जबकि हार्दिक सिंह ने पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में बदला। इसके बावजूद अर्जेंटीना की शुरुआती बढ़त इतनी बड़ी थी कि भारतीय टीम उसे खत्म नहीं कर सकी। अंतिम स्कोर अर्जेंटीना 5-3 भारत रहा।

भारत के लिए सबसे बड़ी समस्या बनी डिफेंस

इस मुकाबले ने एक बार फिर भारतीय टीम की रक्षात्मक कमजोरियों को सामने रखा। टूर्नामेंट के पांच मैचों में भारत ने कुल 16 गोल खाए, जो 2010 के बाद विश्व कप में उसका सबसे खराब आंकड़ा बताया गया है। इनमें 12 गोल ओपन प्ले से आए।

अर्जेंटीना के खिलाफ शुरुआती छह मिनट में दो गोल खाना विशेष रूप से नुकसानदायक रहा। भारत ऐसी स्थिति में पहुंच गया जहां उसे खुद बड़े अंतर से जीतना था, लेकिन वह मैच के अधिकांश हिस्से में स्कोर का पीछा करता रहा।

मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने भी मुकाबले के बाद खराब शुरुआत को अहम समस्या माना और स्वीकार किया कि टीम शुरुआती चरण में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी।

बड़े मुकाबलों में निरंतरता की कमी

भारत ने ग्रुप चरण में पाकिस्तान को रोमांचक मुकाबले में 5-3 से हराकर अगले दौर में जगह बनाई थी। कप्तान हरमनप्रीत सिंह और अभिषेक ने उस मैच में दो-दो गोल किए थे।

लेकिन मजबूत टीमों के खिलाफ परिणाम भारत के पक्ष में नहीं रहे। टूर्नामेंट में इंग्लैंड, नीदरलैंड्स और अर्जेंटीना के खिलाफ भारत को दो-दो गोल के अंतर से हार का सामना करना पड़ा।

यही अंतर विश्व कप जैसे टूर्नामेंट में निर्णायक साबित हुआ।

51 साल बाद भी सेमीफाइनल का इंतजार

इस नतीजे का ऐतिहासिक पहलू भी भारतीय हॉकी के लिए निराशाजनक है। पुरुष हॉकी विश्व कप में भारत की आखिरी सेमीफाइनल उपस्थिति 1975 में थी—और उसी टूर्नामेंट में भारत ने अपना एकमात्र पुरुष विश्व कप खिताब जीता था।

2026 में भारत के पास इस लंबे इंतजार को खत्म करने का अवसर था, लेकिन अर्जेंटीना के खिलाफ हार के बाद यह इंतजार अब और लंबा हो गया है।

हार से क्या सीख सकती है टीम इंडिया?

भारत का टूर्नामेंट पूरी तरह निराशाजनक कहना उचित नहीं होगा। टीम ने कुछ मुकाबलों में प्रभावशाली आक्रामक हॉकी दिखाई और कठिन परिस्थितियों में गोल करने की क्षमता भी दिखाई।

लेकिन विश्व कप में शीर्ष चार तक पहुंचने के लिए केवल आक्रमण पर्याप्त नहीं होता। शुरुआती मिनटों में एकाग्रता, मजबूत रक्षात्मक संरचना, पेनल्टी कॉर्नर पर प्रभावशीलता और मजबूत विरोधियों के खिलाफ पूरे 60 मिनट तक निरंतर प्रदर्शन जरूरी है।

अर्जेंटीना के खिलाफ मुकाबला इसका स्पष्ट उदाहरण रहा। भारत ने तीन गोल किए, लेकिन पांच गोल खाने के कारण आक्रामक प्रयासों का फायदा नहीं मिल पाया।

संतुलित विश्लेषण

इस हार का पूरा कारण किसी एक खिलाड़ी या एक विभाग पर डालना सही नहीं होगा। भारत ऐसी स्थिति में इस मैच में उतरा था जहां पहले के परिणामों के कारण उसे सामान्य जीत से ज्यादा की आवश्यकता थी। इसका स्वाभाविक रूप से रणनीति और मानसिक दबाव पर प्रभाव पड़ा।

इसके बावजूद शुरुआती छह मिनट में दो गोल गंवाना ऐसी गलती थी जिसे विश्व कप के निर्णायक मुकाबले में संभालना बेहद मुश्किल होता है।

सकारात्मक पक्ष यह है कि भारत ने पिछड़ने के बाद भी हमला करना बंद नहीं किया और तीन गोल किए। लेकिन विश्व की शीर्ष टीमों के खिलाफ रक्षात्मक अनुशासन में दिखाई दी कमी भारतीय हॉकी के लिए आगे सुधार का प्रमुख क्षेत्र होगी।

आगे क्या?

भारत विश्व कप से पूरी तरह बाहर नहीं हुआ है, लेकिन पदक और सेमीफाइनल की दौड़ समाप्त हो चुकी है। अब भारतीय टीम को सातवें-आठवें स्थान के मुकाबले में बेल्जियम का सामना करना है। यह मैच 28 अगस्त को खेला जाना है।

अर्जेंटीना ने इस जीत के साथ अपनी सेमीफाइनल दावेदारी मजबूत की और बाद में पुरुष वर्ग के अंतिम चार में स्थान सुनिश्चित करने वाली टीमों में शामिल हो गया।

निष्कर्ष

अर्जेंटीना के खिलाफ 5-3 की हार केवल एक मैच की हार नहीं, बल्कि भारत के 2026 विश्व कप में सेमीफाइनल तक पहुंचने के अभियान का अंत है।

भारतीय टीम ने टूर्नामेंट के दौरान अपनी आक्रामक क्षमता की झलक दिखाई, लेकिन महत्वपूर्ण मुकाबलों में रक्षात्मक गलतियां और अस्थिर प्रदर्शन भारी पड़े।

अब टीम के सामने चुनौती इस विश्व कप से मिले सबक को आगे की रणनीति में बदलने की है। अंतरराष्ट्रीय हॉकी के शीर्ष स्तर पर भारत के पास प्रतिभा और गोल करने की क्षमता है, लेकिन विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में सफलता के लिए उसी स्तर की निरंतरता और रक्षात्मक मजबूती भी जरूरी होगी।

साझा करें
विज्ञापन - मध्य लेख
विज्ञापन - नीचे