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खेल

नई दिल्ली में यादगार रात: BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप का शानदार समापन, मिले नए चैंपियन और रचा गया इतिहास

नई दिल्ली में आयोजित BWF World Championships 2026 का समापन कई ऐतिहासिक उपलब्धियों के साथ हुआ। फ्रांस के Alex Lanier ने पुरुष एकल में देश का पहला विश्व खिताब जीता, जबकि Thom Gicquel और Delphine Delrue ने मिश्रित युगल में फ्रांस को पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बनाया। दक्षिण कोरिया की An Se-young ने महिला एकल में अपना दूसरा विश्व खिताब हासिल किया। भारत की Treesa Jolly और Gayatri Gopichand की जोड़ी ने महिला युगल में कांस्य पदक जीतकर घरेलू दर्शकों को जश्न का मौका दिया।

नई दिल्ली में यादगार रात: BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप का शानदार समापन, मिले नए चैंपियन और रचा गया इतिहास
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: TOI

नई दिल्ली में यादगार अंदाज में खत्म हुआ बैडमिंटन का महाकुंभ

17 से 23 अगस्त तक नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित BWF World Championships 2026 का समापन रविवार को पांच फाइनल मुकाबलों के साथ हुआ। यह टूर्नामेंट का 30वां संस्करण था और भारत में विश्व चैंपियनशिप की 17 साल बाद वापसी हुई थी।

अंतिम दिन फ्रांस और दक्षिण कोरिया ने दो-दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए, जबकि चीन ने पुरुष युगल का खिताब जीतकर चैंपियनशिप में अपनी मजबूत परंपरा बरकरार रखी।

Alex Lanier ने फ्रांस के लिए रचा इतिहास

पुरुष एकल फाइनल इस चैंपियनशिप की सबसे बड़ी कहानियों में से एक बन गया। फ्रांस के 21 वर्षीय Alex Lanier ने जापान के Kodai Naraoka को सीधे गेम में 21-11, 21-11 से हराकर अपना पहला विश्व खिताब जीता।

इस जीत के साथ Lanier BWF World Championships का पुरुष एकल खिताब जीतने वाले पहले फ्रांसीसी खिलाड़ी बन गए। फाइनल में उन्होंने आक्रामक खेल, तेज गति और मजबूत कोर्ट कवरेज के दम पर Naraoka को वापसी के बहुत कम अवसर दिए।

Lanier की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि विश्व बैडमिंटन में यूरोप की चुनौती अब कुछ पारंपरिक देशों तक सीमित नहीं रही है।

फ्रांस को एक ही दिन में मिला दूसरा ऐतिहासिक गोल्ड

Lanier से पहले फ्रांस के Thom Gicquel और Delphine Delrue ने मिश्रित युगल में इतिहास बनाया।

फ्रांसीसी जोड़ी ने चीन के शीर्ष वरीय Feng Yanzhe और Huang Dongping को 22-20, 19-21, 21-15 से हराया। यह फ्रांस का BWF World Championships में पहला स्वर्ण पदक था। कुछ ही समय बाद Lanier की जीत ने इसे फ्रांसीसी बैडमिंटन के लिए असाधारण डबल गोल्ड में बदल दिया।

चैंपियनशिप से पहले फ्रांस के पास विश्व चैंपियनशिप इतिहास में केवल दो कांस्य पदक थे। नई दिल्ली में दो स्वर्ण जीतना इसलिए उसके बैडमिंटन इतिहास में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा सकता है।

An Se-young ने फिर साबित की अपनी बादशाहत

महिला एकल में दक्षिण कोरिया की स्टार An Se-young ने जापान की Akane Yamaguchi को 21-17, 21-14 से हराकर विश्व खिताब अपने नाम किया।

यह An का दूसरा विश्व चैंपियनशिप खिताब है; इससे पहले वह 2023 में भी विश्व चैंपियन बनी थीं। ओलंपिक चैंपियन An की नई दिल्ली में जीत ने मौजूदा महिला बैडमिंटन में उनकी मजबूत स्थिति को और स्पष्ट किया।

हालांकि Yamaguchi खिताब नहीं बचा सकीं, लेकिन उनका सिल्वर भी ऐतिहासिक रहा। यह विश्व चैंपियनशिप में उनका छठा पदक बना, जिससे वह महिला एकल में टूर्नामेंट के इतिहास की सबसे अधिक पदक जीतने वाली खिलाड़ी बन गईं।

दक्षिण कोरिया ने महिला युगल में खत्म किया 31 साल का इंतजार

महिला युगल में दक्षिण कोरिया की Baek Ha-na और Lee So-hee ने चीन की Liu Shengshu और Tan Ning को 21-15, 21-15 से हराकर विश्व खिताब जीता।

यह जोड़ी का पहला विश्व खिताब होने के साथ दक्षिण कोरिया के लिए भी बेहद खास उपलब्धि रही। इस जीत से देश का महिला युगल विश्व खिताब के लिए चला आ रहा 31 साल का इंतजार खत्म हुआ।

पुरुष युगल में चीन ने बचाई अपनी स्वर्णिम परंपरा

पुरुष युगल में चीन के Liang Weikeng और Wang Chang ने मलेशिया के Aaron Chia और Soh Wooi Yik को 21-17, 21-16 से हराकर अपना पहला विश्व खिताब हासिल किया।

इस जीत के साथ चीन ने लगातार 28वीं World Championships में कम से कम एक स्वर्ण पदक जीतने का अपना शानदार रिकॉर्ड कायम रखा।

भारत के लिए Treesa-Gayatri का कांस्य बना खास

मेजबान भारत के लिए Treesa Jolly और Gayatri Gopichand की महिला युगल जोड़ी का प्रदर्शन टूर्नामेंट की प्रमुख उपलब्धियों में रहा।

भारतीय जोड़ी फाइनल तक नहीं पहुंच सकी, लेकिन उसने कांस्य पदक हासिल किया। घरेलू दर्शकों के सामने मिला यह पदक भारतीय महिला युगल बैडमिंटन की बढ़ती क्षमता का महत्वपूर्ण संकेत है।

भारत के Ayush Shetty ने भी शुरुआती दौर में बड़ा उलटफेर किया था। वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदार्पण कर रहे 21 वर्षीय Shetty ने तत्कालीन विश्व नंबर एक और डिफेंडिंग चैंपियन Shi Yuqi को पहले दौर में 21-14, 13-21, 21-19 से हराया था।

नई दिल्ली की चैंपियनशिप क्यों रही खास?

BWF World Championships को ओलंपिक के साथ बैडमिंटन के सबसे प्रतिष्ठित मंचों में गिना जाता है। इसकी शुरुआत 1977 में हुई थी।

2026 संस्करण ने एक साथ कई कहानियां सामने रखीं—फ्रांस जैसी उभरती शक्ति ने दो ऐतिहासिक स्वर्ण जीते, दक्षिण कोरिया ने एकल और युगल दोनों में सफलता हासिल की और चीन ने भी अपना स्वर्ण पदक का सिलसिला जारी रखा।

इससे यह संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन में प्रतिस्पर्धा का दायरा बढ़ रहा है। पारंपरिक एशियाई शक्तियां अब भी मजबूत हैं, लेकिन यूरोपीय देशों की चुनौती भी अधिक गंभीर होती जा रही है।

भारत के लिए आयोजन का क्या महत्व?

विश्व चैंपियनशिप की भारत में 17 साल बाद वापसी अपने आप में महत्वपूर्ण थी। BWF अध्यक्ष Khunying Patama Leeswadtrakul ने भी आयोजन के बाद नई दिल्ली और भारतीय दर्शकों की सराहना की।

भारत के लिए ऐसे बड़े टूर्नामेंट की मेजबानी खिलाड़ियों को घरेलू दर्शकों के सामने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों से मुकाबला करने का मौका देती है। साथ ही यह देश की बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी क्षमता को भी प्रदर्शित करती है।

निष्कर्ष

BWF World Championships 2026 सिर्फ नए विश्व चैंपियनों के नाम तय करने वाला टूर्नामेंट नहीं रहा। नई दिल्ली ने फ्रांस के बैडमिंटन इतिहास के सबसे बड़े दिनों में से एक देखा, An Se-young की श्रेष्ठता का एक और अध्याय देखा और भारतीय महिला युगल को विश्व मंच पर पदक जीतते देखा।

Alex Lanier और Gicquel-Delrue की ऐतिहासिक उपलब्धियों से लेकर दक्षिण कोरिया की दोहरी सफलता और चीन की लगातार जारी स्वर्ण परंपरा तक—नई दिल्ली का यह संस्करण विश्व बैडमिंटन के बदलते प्रतिस्पर्धी संतुलन के लिए याद किया जाएगा।


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