साक्षात्कार प्रक्रिया के बाद हुआ चयन
बीसीसीआई के अनुसार, जूनियर क्रिकेट समिति के सदस्यों की नियुक्ति के लिए क्रिकेट सलाहकार समिति यानी सीएसी ने चयन प्रक्रिया पूरी की। इसमें आवेदनों की छंटनी और उम्मीदवारों के साक्षात्कार शामिल थे। इसके बाद अवाना को अध्यक्ष तथा अन्य तीन पूर्व खिलाड़ियों को सदस्य बनाने की सिफारिश की गई।
यह नियुक्ति ऐसे पूर्व क्रिकेटरों को एक मंच पर लाती है, जिनके पास मैदान पर खेलने के अलावा कोचिंग का भी अनुभव है। हालांकि, बोर्ड की विज्ञप्ति में समिति के कार्यकाल की अवधि या पहली चयन बैठक की तारीख नहीं बताई गई है। इसलिए फिलहाल नियुक्तियों और सदस्यों की पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी ही आधिकारिक तौर पर उपलब्ध है।
दिल्ली से भारतीय टीम तक का सफर
परविंदर अवाना का अंतरराष्ट्रीय करियर छोटा रहा, लेकिन घरेलू क्रिकेट में उन्होंने लंबा समय बिताया। उन्होंने भारत के लिए दो टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनके नाम 62 मैचों में 191 विकेट दर्ज हैं। दिल्ली के अलावा उन्होंने इंडिया ए और शेष भारत का भी प्रतिनिधित्व किया।
अवाना आईपीएल में किंग्स इलेवन पंजाब की ओर से खेले, जिसे अब पंजाब किंग्स के नाम से जाना जाता है। अलग-अलग स्तरों पर खेलने का यह अनुभव उनकी नई भूमिका के लिए प्रासंगिक है। घरेलू प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को बड़े मंच तक पहुंचने के दौरान किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, इससे वह स्वयं परिचित रहे हैं।
संन्यास के बाद युवा खिलाड़ियों के साथ किया काम
खेल से संन्यास लेने के बाद अवाना कोचिंग से जुड़े। उन्होंने दिल्ली की अंडर-16, अंडर-19 और अंडर-23 टीमों के साथ काम किया। इसके अलावा वह भारत की अंडर-19 टीम तथा बीसीसीआई और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के विभिन्न हाई-परफॉर्मेंस कार्यक्रमों से भी जुड़े रहे।
इस पृष्ठभूमि से अनुमान लगाया जा सकता है कि उन्हें अलग-अलग उम्र के खिलाड़ियों की तैयारी और विकास को करीब से देखने का अवसर मिला है। जूनियर स्तर पर किसी खिलाड़ी के मौजूदा प्रदर्शन के साथ उसकी सीखने की क्षमता और तकनीकी प्रगति को समझना भी उपयोगी होता है। हालांकि, नई समिति चयन में किन विशिष्ट मानकों को प्राथमिकता देगी, इसकी घोषणा अभी नहीं हुई है।
कृष्णा दास लेकर आएंगे गेंदबाजी का अनुभव
समिति में शामिल कृष्णा दास असम और गोवा के लिए तेज गेंदबाजी कर चुके हैं। उन्होंने 49 प्रथम श्रेणी मुकाबलों में 166 विकेट हासिल किए। उनके करियर में भारत की अंडर-19 टीम और इंडिया ए का प्रतिनिधित्व भी शामिल रहा है।
खिलाड़ी के रूप में अपना सफर पूरा करने के बाद दास ने कोचिंग में काम किया। वह भारत की अंडर-19 टीम के गेंदबाजी कोच और उत्तराखंड की रणजी ट्रॉफी टीम के गेंदबाजी कोच रहे हैं। इस तरह उनके पास युवा और सीनियर घरेलू क्रिकेट, दोनों स्तरों का अनुभव है।
राकेश पटेल और अर्जुन यादव की पृष्ठभूमि भी अहम
राकेश पटेल ने गुजरात, बड़ौदा और इंडिया ए के लिए क्रिकेट खेला। वह दलीप ट्रॉफी, देवधर ट्रॉफी और ईरानी ट्रॉफी जैसी प्रतियोगिताओं में भी शामिल रहे। बाद में उन्होंने गुजरात और बड़ौदा की विभिन्न आयु वर्ग तथा सीनियर टीमों के साथ कोचिंग की जिम्मेदारियां निभाईं। वह 2025-26 सत्र में बड़ौदा की अंडर-23 टीम के मुख्य कोच थे।
वहीं, एन. अर्जुन यादव ने 83 प्रथम श्रेणी मैच खेले और इंडिया ए का प्रतिनिधित्व किया। वह वर्ष 2000 में अंडर-19 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। हैदराबाद से खेलने के बाद उन्होंने उसकी सीनियर और अंडर-23 टीमों के मुख्य कोच के रूप में काम किया। वह 2022 से बीसीसीआई मैच रेफरी की भूमिका भी निभाते रहे हैं।
नई जिम्मेदारी का महत्व कैसे समझें?
विश्लेषण के तौर पर देखें तो जूनियर चयन में चुनौती केवल सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज या सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज को चुनना नहीं होती। प्रदर्शन किन परिस्थितियों में आया, विपक्ष कितना मजबूत था और खिलाड़ी दबाव में कैसे प्रतिक्रिया देता है—ये पहलू भी उसकी संभावनाओं को समझने में मदद करते हैं।
अवाना और उनके सहयोगियों की खेल तथा कोचिंग पृष्ठभूमि इस मूल्यांकन में उपयोगी हो सकती है। फिर भी, नियुक्ति के आधार पर भविष्य की सफलता तय मानना जल्दबाजी होगी। समिति के काम का आकलन उसके वास्तविक चयन फैसलों से होगा। फिलहाल अगला घोषित कदम पांचवें सदस्य की नियुक्ति है, जिसके बाद पूरे पैनल की तस्वीर साफ होगी।
